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शिक्षण संस्थाएं फीस माफ करें, अन्यथा अभिभावकों के साथ जगह-जगह पर करेंगे रास्ता रोको आंदोलन

शिक्षण हक्क परिषद के अध्यक्ष उमेश चव्हाण द्वारा चेतावनी
पुणे, जुलाई (ह.ए. प्रतिनिधि)

पिछले दो सालों से स्कूलों के दरवाजे नहीं खोले गए हैं। शैक्षणिक वर्ष 2020 का पूरा वर्ष ऑनलाइन पद्धति से सम्पन्न हुआ। शिक्षा, स्कूल और शिक्षा का मानो खेल समग्र रूप से रचा गया है। शिक्षा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। शिक्षा की बहुत बुरी स्थिति निर्माण हुई है। इस साल भी शिक्षा के लिहाज से साल 2021 ऑनलाइन पद्धति से शुरू हो रहा है। हालाँकि अभी भी अभिभावकों से वसूली का तकादा चालू है। यह प्रकार चैरिटी और निजी शिक्षण संस्थाओं द्वारा तुरंत नहीं रोका गया तो अभिभावकों को साथ लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में रास्ता रोको आंदोलन आयोजित किया जाएगा। यह चेतावनी शिक्षण  हक्क परिषद के अध्यक्ष उमेश चव्हाण ने दी है। 
आगे बोलते हुए उमेश चव्हाण ने कहा कि बेरोजगारी से परेशान नागरिकों को दो वक्त पेट भरने का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। ऐसी स्थिति में शिक्षा के लिए शुल्क क्या होना चाहिए ? शिक्षा के विपणन के लिए अत्यधिक शुल्क मूल्यांकन को लेकर समय- समय पर शिक्षण हक्क परिषद आवाज उठाती रही है।
अंत में उन्होंने कहा कि इस साल जब स्कूल की इमारत के दरवाजे-खिड़कियां बंद हैं, शिक्षक घर से पढ़ा रहे हैं तो ‘फीस’ लेने की जहमत क्यों ? स्वास्थ्य और शिक्षा मौलिक अधिकार हैं और हम उनके लिए संवैधानिक तरीके से लड़ेंगे।

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