नई दिल्ली, अगस्त (ह.ए. प्रतिनिधि)
दिल्ली स्थित उद्यमी शिवमान गुलाबराव अहिरराव पाटिल और उनका परिवार अपनी अपाहिज बहन की गत 64 वर्ष से व्यवस्था देख रहे हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर शिवमान अहिरराव परिवार ने बहन को खुशी की अनोखी सौगात देकर उनके चेहरे पर रौनक खड़ी कर दी। भारत की समाज व्यवस्था में इसतरह के प्रेरक संदर्भों को सम्मानित और प्रचारित करना समय की आवश्यकता है।
बहन की प्रातर्विधी व्यवस्था, स्नानविधि, कपड़ा पहनाना, भोजन व्यवस्था उनके बाल बनाना आदि वास्तविक ईशसेवा देवीपूजन शिवमान भाई गुलाबराव अहिरराव पाटिल तथा उनकी धर्मपत्नी शिवमती आबईसा, मंदाबेन अहिरराव पाटिल निभा रहे हैं।
मानव समाज का भरणपोषण करनेवाली कृषि सभ्यता के अनुरूप शिवधर्म विधि अनुसार राखी पूर्णिमा के उपलक्ष्य पर बहन से राखी बांधने के बजाए अहिरराव ने बहन शिवमती शोभाताई अहिरराव का अक्षता पूजन कुमकुम तिलक किया, दीप आरती की, बहन को राखी बांधकर, मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन पर अभिनव विधि की शिवमान ने शुरूआत की।
इस प्रेरक प्रसंग पर संवाद करते हुये शिवश्री अहिरराव ने कहा कि भाई को राखी बांधकर बहन की रक्षा विषयक मजबूरी का हमारे समाज में किये जानेवाला प्रदर्शन एक तरह से अमानवीय ही नहीं अपितु महिला शक्ति को कमजोर साबित करने का तौरतरीका सिद्ध होता है। बल्कि पुरुष शक्ति ने महिला शक्ति को विश्वास दिलाने के लिए बहन को वचनसूत्र देना अपेक्षित है, क्योंकि सुरक्षा का विश्वास हमेशा बलवान ही कमजोर को देता है और महिला शक्ति यह मानव संसार की सृजक है वह कमजोर तो हो ही नहीं सकती। उसके बावजूद बहन को ऐसी क्या जरुरत पड़ी की वह सुरक्षा की भावना से भाई से राखी बांधकर सुरक्षा का वचन नामा कबूल कराये, यह उचित नहीं है।
भारत की कृषक सभ्यता में महादेव गिरीजा, निवृत्ति, वृंदा, महाराज शहाजी राजे-+राष्ट्रमाता जिजाऊ, छत्रपति ताराऊ, कुलमुखत्यार छत्रपति सईबाई+ छत्रपति संभाजीराजे, लोकमाता अहिल्याबाई+ ससुर मल्हारराव, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई + महात्मा ज्योतिबा फुले आदि वीर+ वीरांगणाओं का धाकड़ इतिहास रहा है, के बावजूद आखिर महिला शक्ति को पुरुष शक्ति भाई से रक्षासूत्र बांधकर वचन की जरूरत क्यों पड़ी ? ऐसे क्या स्थितियां बनी की महिला शक्ति हमने अपाहिज समझ लिया? इन सारी स्थिति से बाहर आकर अब महिला शक्ति की स्वयंपूर्णता समाज ने स्वीकारनी चाहिए। जब समाज इस माध्यम से बदलेगा तो घर परिवार के बच्चों पर उसका वैचारिक संस्कार बनेगा।
शिवमती आबईसा, मंदाबेन कहती हैं कि भारत में वर्षभर चलनेवाले त्योहारों में हम देवियों का पूजन हवन कराते हैं, नवरात्र में उपवास व्रत मनाते हैं। देवियों का जागरण कराते हैं और रक्षाबंधन पर वही देवी, पुरुष भाई से सुरक्षा की गुहार लगावे यह किसी तर्क की कसौटी पर प्रमाणित नहीं बनता तथा सालभर दुनिया में महिला अत्याचार की घटनाओं से हम सब रुबरु भी होते रहते हैं। इससे समाज को बाहर लाने की जरुरत है।
उक्त अनोखा अभिनव सम्मानित प्रेरक समारोह से शिवमान गुलाबराव अहिरराव पाटिल और परिवार का चारों ओर से अभिनंदन, तारीफ के साथ विशेषत: विभिन्न महिला संगठनों द्वारा शिवश्री अहिरराव परिवार को धन्यवाद और बधाई देकर खुशी जाहिर की जा रही है।
उक्त संयोजन में वैचारिक भूमिका अदा करनेवाले मराठा सेवा संघ के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष शिवक्रांतिदूत कमलेश पाटिल, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष तथा उत्तरप्रदेश पीडब्ल्यूडी के सेवावकाश प्रमुख इंजीनियर ई. रवींद्र गंगवार, उत्तर प्रदेश कार्याध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश पीडब्ल्यूडी के सेवावकाश प्रमुख इंजीनियर इं. सुरजित सिंह निरंजन, जिजाऊ ब्रिगेड उत्तर प्रदेश की अध्यक्षा तथा ख्याति प्राप्त समाजसेवी डॉ. मंजू वर्मा, जिजाऊ ब्रिगेड मध्य प्रदेश की अध्यक्षा ताईसा, शिवमती शर्मिला पाटिल, मराठा सेवा संघ मध्यप्रदेश अध्यक्ष तथा ख्याति प्राप्त समाजसेवी डॉ. एन.पी. कनाठे, दिल्ली अध्यक्ष वकील आकाश काकडे तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष कामाजी पवार, जिजाऊ ब्रिगेड की राष्ट्रीय अध्यक्षा ताईसा, डॉ. निर्मला पाटिल, शिवजन रेखाताई खेडेकर, युगपुरुष पुरुषोत्तम खेडेकर ने अहिरराव परिवार को बधाई देकर संगठन की तरफ से प्रातिनिधीक आभार व्यक्त किया।


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