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मुला-मुथा नदी प्रदूषण के खिलाफ ‘एमआईटी’ के विद्यार्थियों का आंदोलन

 नदी पात्र में अवैध कचरा फेंकने के विरोध में एमआईटी विश्वविद्यालय प्रवेश द्वार पर प्रदर्शन; आग और जहरीले धुएं से स्वास्थ्य पर खतरा

Loni MIT News

लोणी-कालभोर, मार्च (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
पुणे शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली मुला-मुथा नदी के पात्र में बिना किसी प्रक्रिया के अवैध रूप से डाले जा रहे कचरे को तुरंत बंद करने की मांग को लेकर एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय (एडीटी) शैक्षणिक परिसर के विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने बुधवार को विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर तीव्र प्रदर्शन किया।

इस आंदोलन में शैक्षणिक परिसर के एमआईटी विश्वशांति गुरुकुल, एमआईटी जूनियर कॉलेज तथा एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों और निवासी कर्मचारियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुद्दे की गंभीरता, भविष्य में संभावित खतरे, मुला-मुथा नदी के अस्तित्व पर मंडराते संकट, स्थानीय ग्राम पंचायतों की पर्यावरण के प्रति उदासीनता तथा स्थानीय और जिला प्रशासन द्वारा इस गंभीर समस्या की अनदेखी के विरोध में जोरदार नारेबाजी की। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से नदी में बिना प्रक्रिया के प्रतिदिन डाले जा रहे 35 से 40 ट्रैक्टर कचरे को तत्काल रोकने तथा ऐसे वाहनों को विश्वविद्यालय प्रवेश द्वार पर ही रोकने की मांग की। इस संबंध में विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को ज्ञापन भी सौंपा।

हाल ही में नदी पात्र में डाले गए कचरे के ढेर में 26 फरवरी 2026 को भीषण आग लग गई, जो लगातार चार दिनों तक सुलगती रही। इसके कारण पूरे परिसर में जहरीले धुएं के घने गुबार फैल गए। 27 फरवरी को एमआईटी एडीटी शैक्षणिक परिसर के 6–7 विद्यार्थियों को सांस लेने में तकलीफ और दम घुटने की समस्या होने पर उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस आग और धुएं के कारण विद्यार्थियों, स्थायी कर्मचारियों तथा आसपास के नागरिकों को गंभीर श्वसन समस्याओं का सामना करना पड़ा।

नदी पात्र में लगे इस आग को पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) की एकमात्र अग्नि शामक दल तथा एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय के 25–30 कर्मचारियों ने पांच दिनों के अथक प्रयासों के बाद मंगलवार (2 मार्च) को बुझाया। हालांकि इस दौरान चार दिनों तक क्षेत्र में जहरीले धुएं का घना प्रभाव बना रहा, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन तथा गले में परेशानी जैसी समस्याएं हुईं। जहरीले धुएं के कारण शुक्रवार मध्यरात्रि को कुछ विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

एमआईटी शैक्षणिक परिसर में वर्तमान में राज्य सहित देश-विदेश से आए लगभग 20,000 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, जिनमें से करीब 5,000 विद्यार्थी और 1,000 कर्मचारी परिसर में ही निवास करते हैं। विद्यार्थियों ने प्रशासन से इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेकर नदी पात्र में कचरा डालना तुरंत बंद करने की मांग की।



विद्यार्थियों के वक्तव्य
पिछले कुछ वर्षों से लोणी-कालभोर, कदमवाकवस्ती तथा आसपास के गांवों से प्रतिदिन 35 से 40 ट्रैक्टर कचरा बिना किसी प्रक्रिया के सीधे मुला-मुथा नदी पात्र में डाला जा रहा है। इसके कारण नदी में कचरे के बड़े-बड़े ढेर बन गए हैं। इससे न केवल वायु प्रदूषण बल्कि जल प्रदूषण भी बढ़ रहा है और नदी का पानी गंभीर रूप से दूषित हो चुका है, जिससे जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा उत्पन्न हो गया है। इस प्रदूषण और दुर्गंध के कारण पुणे शहर तथा महाराष्ट्र की छवि भी प्रभावित हो रही है।
— दादासाहेब भोसुरे, छात्र प्रतिनिधि

मुला-मुथा नदी में सीधे कचरा डालना अत्यंत गंभीर मामला है। नदी पात्र में कचरे के पहाड़ बन गए हैं और लगातार आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। जहरीले धुएं के कारण विद्यार्थियों को श्वसन संबंधी समस्याएं हो रही हैं। जिला प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर अवैध रूप से कचरा डालना बंद कराना चाहिए तथा ग्राम पंचायतों के ठोस कचरा प्रबंधन प्रकल्प के लिए तत्काल जमीन उपलब्ध करानी चाहिए।
— मुग्धा सोनवणे, छात्रा

मुला-मुथा नदी के किनारे स्थित हमारा एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय परिसर अत्यंत प्राकृतिक और सुंदर है, लेकिन बिना प्रक्रिया के डाले जा रहे कचरे के कारण नदी का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो गया है और पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है। लगातार लगनेवाली आग से वायु प्रदूषण बढ़ गया है और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 340 दर्ज किया गया है, जो गंभीर श्रेणी में आता है। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
— अनय अहिरे, छात्र

नदी पात्र में डाले जा रहे कचरे के कारण विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है। पिछले चार दिनों से श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ने के कारण विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर आंदोलन किया। विद्यार्थियों की मांग के बाद ग्राम पंचायतों के कचरा वाहनों को आज से प्रवेश द्वार पर ही रोकने का निर्णय लिया गया है। जिला प्रशासन को शीघ्र हस्तक्षेप कर ठोस कचरा प्रबंधन हेतु जमीन उपलब्ध करानी चाहिए।
— डॉ. महेश चोपड़े,
कुलसचिव, एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय, लोणी-कालभोर, पुणे

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