पुणे, सिर्फ एक एक क्राइम जॉनर की फिल्म है। जो हमारे जीवन पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव और इसके फायदे और नुकसान एवं किशोरों की अपराध की ओर बढ़ती प्रवृत्ति पर प्रकाश डालती है। सिर्फ एक फिल्म का मुहूर्त प्रसिद्ध फोटोग्राफर राधाकृष्णन चाक्यत के हाथों पुणे में किया गया था। सिर्फ एक फिल्म के निर्देशक राहुल पनाशिकर हैं, जिसे राहुल ग्राफिक्स द्वारा निर्मित किया गया है। 'सिर्फ एक’ फिल्म के मुहूर्त समारोह पर अभिनेत्री लीना जुमानी, अभिनेता महेश सैनी, सुजीत देशपांडे, अनुज प्रभु, देवांशी धमनकर, आशुतोष परांजपे आदि प्रमुख कलाकार उपस्थित थे। तकनीक ने हमारे जीवन में हर तरह से प्रवेश किया है। इसके कई फायदे भी हैं तो कुछ नुकसान भी। पिछले दो वर्षों के कोविड संकट के दौरान संगणकीकरण ने हम सभी को विभिन्न स्तरों पर कई तरह से मदद की है। बच्चों को ऑनलाइन स्कूल करना पड़ा। इसी के साथ कंप्यूटर और मोबाइल फोन के माध्यम से उनके लिए एक सोशल मीडिया गैलरी आसानी से किशोरों के हाथ में उपलब्ध हुई। इन सभी माध्यमों पर समग्र रूप से समाज की निर्भरता काफी बढ़ गई है।
इस कालावधि में किशोर युवकों का प्रत्यक्ष दोस्ती से आभासी दोस्ती तक तेजी से बढता सफर बेहद धोकादायक है। शुरुवात में सिर्फ एक साधारण ऑनलाइन दोस्ती और चैटिंग के माध्यम से नौसिखियों तकअनजाने में सेक्सटिंग की ओर आकर्षित होने वाले और उसके बाद होने वाले भीषण अपराधों की संख्या समाज में तेजी से बढ़ रही है। बलात्कार, ब्लैकमेल, आत्महत्या के लिए उकसाना और हत्या जैसे कई अपराध समाज के हर एक क्षेत्रों में बढ़ रहे हैं । हमारे आसपास भी यह बढ़तेे देखते रहे हैं। इसमें छोटे बच्चों को भी मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है.... ऐसी खबरें लगातार हमारे कानों में आ रही हैं, जो टेलीविजन पर दिखाई दे रही है । सिर्फ एक ऐसी फिल्म है जो इस तरह के अपराध पर प्रकाश डालती है। फिल्म प्रभावी माध्यम है, जिसके माध्यम से लोगों तक आकर्षक कहानी पहुंचाना यह मकसद है। भले ही 'सिर्फ एक’ पुणे में बन रही है, लेकिन यह काहानी देश में कहीं भी और किसी के भी घर की हो सकती है, इसी कारण लोगों को इस विषय पर सोचने को पर मजबूर कर देगा, यह यकीन निर्देशक राहुल पणशीकर को है।


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