नई दिल्ली, जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता रहे कन्हैया कुमार और गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने मंगलवार को कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद कन्हैया कुमार ने खुद बताया है कि उन्होंने यह कदम क्यों उठाया। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर इन दोनों युवा नेताओं ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में देश की सबसे पुरानी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
कन्हैया कुमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक बड़े जहाज की तरह है। अगर इसे बचाया जाता है, तो मेरा मानना है कि कई लोगों की आकांक्षाएं, महात्मा गांधी की एकता, भगत सिंह की हिम्मत और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के समानता के विचार की भी रक्षा की जाएगी, इसलिए शामिल हुआ हूं। उन्होंंने कहा, क्योंकि मुझे ये महसूस होता है कि देश में कुछ लोग सिर्फ लोग नहीं हैं, वो एक सोच हैं। वो देश की सत्ता पर न सिर्फ काबिज़ हुए हैं, देश की चिंतन परंपरा, संस्कृति, मूल्य, इतिहास, वर्तमान, भविष्य खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
कन्हैया कुमार ने कहा कि नौजवानों को लगने लगा है कि कांग्रेस नहीं बचेगी तो देश भी नहीं बचेगा और ऐसे में वह लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि देश में वैचारिक संघर्ष को कांग्रेस ही नेतृत्व ही दे सकती है। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले कन्हैया जेएनयू में कथित तौर पर देशविरोधी नारेबाजी के मामले में गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में आए थे।
वहीं, गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने कहा कि लोकतंत्र और भारत के विचार को बचाने के लिए, मुझे उस पार्टी के साथ रहना होगा जिसने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया और अंग्रेजों को देश से बाहर निकाला, इसलिए मैं आज यहां कांग्रेस के साथ हूं। जिग्नेश मेवानी ने कहा कि वो तकनीकी कारणों से औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं हो सके। मैं एक निर्दलीय विधायक हूं, अगर मैं किसी पार्टी में शामिल होता हूं, तो मैं विधायक नहीं रह सकता। मैं वैचारिक रूप से कांग्रेस का हिस्सा हूं, आगामी गुजरात चुनाव कांग्रेस के चुनाव चिह्न से लड़ूंगा।
कन्हैया कुमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक बड़े जहाज की तरह है। अगर इसे बचाया जाता है, तो मेरा मानना है कि कई लोगों की आकांक्षाएं, महात्मा गांधी की एकता, भगत सिंह की हिम्मत और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के समानता के विचार की भी रक्षा की जाएगी, इसलिए शामिल हुआ हूं। उन्होंंने कहा, क्योंकि मुझे ये महसूस होता है कि देश में कुछ लोग सिर्फ लोग नहीं हैं, वो एक सोच हैं। वो देश की सत्ता पर न सिर्फ काबिज़ हुए हैं, देश की चिंतन परंपरा, संस्कृति, मूल्य, इतिहास, वर्तमान, भविष्य खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
कन्हैया कुमार ने कहा कि नौजवानों को लगने लगा है कि कांग्रेस नहीं बचेगी तो देश भी नहीं बचेगा और ऐसे में वह लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि देश में वैचारिक संघर्ष को कांग्रेस ही नेतृत्व ही दे सकती है। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले कन्हैया जेएनयू में कथित तौर पर देशविरोधी नारेबाजी के मामले में गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में आए थे।
वहीं, गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने कहा कि लोकतंत्र और भारत के विचार को बचाने के लिए, मुझे उस पार्टी के साथ रहना होगा जिसने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया और अंग्रेजों को देश से बाहर निकाला, इसलिए मैं आज यहां कांग्रेस के साथ हूं। जिग्नेश मेवानी ने कहा कि वो तकनीकी कारणों से औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं हो सके। मैं एक निर्दलीय विधायक हूं, अगर मैं किसी पार्टी में शामिल होता हूं, तो मैं विधायक नहीं रह सकता। मैं वैचारिक रूप से कांग्रेस का हिस्सा हूं, आगामी गुजरात चुनाव कांग्रेस के चुनाव चिह्न से लड़ूंगा।

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