दीपावली का त्यौहार सभी मनाते हैं, परंतु दीपावली केवल एक त्यौहार नहीं है। पृथ्वी के इतिहास में समुद्र मंथन का बहुत बड़ा महत्व है। इससे ही चौदह रत्न निकले और हलाहल विष भी। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को धन्वंतरि प्रकट हुए, जिनके हाथ में अमृत कलश था। धन्वंतरि स्वास्थ्य के स्वामी हैं और स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है, इसलिए धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की प्रथा है। बर्तन के साथ-साथ धातु से बनी चीजें खरीदना भी शुभ माना जाता है, विशेष कर चाँदी से बनी चीजें खरीदना। चाँदी को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है, जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास कराता है। यह सभी जानते हैं कि संतोष से बड़ा कोई धन नहीं है। जैन धर्म में धनतेरस को ध्यान तेरस कहा जाता है। भगवान महावीर इसी दिन तीसरे और चौथे ध्यान से योग निरोध के लिए गए और तीन दिन बाद यानी दीपावली को निर्वाण को प्राप्त हुए। कहा जाता है कि धनतेरस के दिन घर के आँगन में और दरवाजे पर दीया जलाने पर अकाल मृत्यु नहीं होती। धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी आती है, जिसके बारे में अलग से लेख प्रकाशित हो चुका है। नरक चतुर्दशी के बाद दीपावली का मुख्य त्यौहार आता है, जिसमें धन की देवी महालक्ष्मी, बुद्धि के देवता गणेश जी और विद्या की देवी सरस्वती जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि समुद्र मंथन से धनवंतरि, कुबेर और महालक्ष्मी प्रकट हुए। महालक्ष्मी की पूजा दीपावली पर की जाती है। दीपावली पर्व की कई कहानियाँ हैं। धनतेरस को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।
दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा होती है। इंद्र का मद हरण करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी और उन्होंने गोवर्धन की पूजा प्रारंभ की। गोवर्धन का अर्थ गो वृद्धि भी होता है और गौ धन भी होता है। इस प्रकार उन्होंने गौ और गोवंश की रक्षा व वृद्धि के लिए उनकी पूजा प्रारंभ की। इसी दिन अन्नकूट भी बनाया जाता है। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने गौ, गोवंश, कृषि उत्पादों का महत्व प्रतिपादित किया। अंत में भाई दूज का त्यौहार आता है, जिसे यमद्वितीया भी कहा जाता है। इसके पीछे यम और यमुना की कहानी है जो भगवान सूर्य की संतान और आपस में भाई बहन थे। यमुना को भगवान श्री कृष्ण की पत्नी माना जाता है। श्री कृष्ण को ब्रज संस्कृति का जनक और यमुना को माता माना जाता है। यमुना अपने भाई यम को अपने घर भोजन पर निमंत्रित करती थीं पर यमराज व्यस्तता के कारण आ नहीं पाते थे। यमुना ने जब बहुत शिकायत की तो यमराज समय निकाल कर उनके यहाँ भोजन करने के लिए पधारे और इस खुशी में उन्होंने यमपाश में बँधे जीवों को मुक्त कर दिया। यमुना ने भी अपने भाई यमराज के साथ स्नान किया और अपने हाथ से भोजन बना कर खिलाया। यमराज ने बहन यमुना को काफी धन संपत्ति देकर प्रसन्न किया। इस दिन भाई बहन एक दूसरे का हाथ पकड़ कर यमुना में डुबकी लगाते हैं और बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराती हैं और भाई बहन को धन संपत्ति देकर प्रसन्न करते हैं। ऐसा करने से यमपाश में नहीं बँधना पड़ता और जीव की मुक्ति होती है।
दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा होती है। इंद्र का मद हरण करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी और उन्होंने गोवर्धन की पूजा प्रारंभ की। गोवर्धन का अर्थ गो वृद्धि भी होता है और गौ धन भी होता है। इस प्रकार उन्होंने गौ और गोवंश की रक्षा व वृद्धि के लिए उनकी पूजा प्रारंभ की। इसी दिन अन्नकूट भी बनाया जाता है। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने गौ, गोवंश, कृषि उत्पादों का महत्व प्रतिपादित किया। अंत में भाई दूज का त्यौहार आता है, जिसे यमद्वितीया भी कहा जाता है। इसके पीछे यम और यमुना की कहानी है जो भगवान सूर्य की संतान और आपस में भाई बहन थे। यमुना को भगवान श्री कृष्ण की पत्नी माना जाता है। श्री कृष्ण को ब्रज संस्कृति का जनक और यमुना को माता माना जाता है। यमुना अपने भाई यम को अपने घर भोजन पर निमंत्रित करती थीं पर यमराज व्यस्तता के कारण आ नहीं पाते थे। यमुना ने जब बहुत शिकायत की तो यमराज समय निकाल कर उनके यहाँ भोजन करने के लिए पधारे और इस खुशी में उन्होंने यमपाश में बँधे जीवों को मुक्त कर दिया। यमुना ने भी अपने भाई यमराज के साथ स्नान किया और अपने हाथ से भोजन बना कर खिलाया। यमराज ने बहन यमुना को काफी धन संपत्ति देकर प्रसन्न किया। इस दिन भाई बहन एक दूसरे का हाथ पकड़ कर यमुना में डुबकी लगाते हैं और बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराती हैं और भाई बहन को धन संपत्ति देकर प्रसन्न करते हैं। ऐसा करने से यमपाश में नहीं बँधना पड़ता और जीव की मुक्ति होती है।
-श्री सत्येंद्र सिंह,
सप्तगिरी सोसाइटी, जांभुलवाडी रोड,
आंबेगांव खुर्द, पुणे-411046
0 टिप्पणियाँ