सह्याद्री प्रतिष्ठान द्वारा जिला परिषद स्कूल, कान्हेवाड़ी बुद्रुक (ता.खेड़) में आयोजित स्ट्राबेरी महोत्सव में विद्यार्थियों ने स्ट्रॉबेरी खाने का आनंद लिया।
हड़पसर, फरवरी (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
कान्हेवाडी के जिला परिषद स्कूल में सह्याद्री प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित स्ट्राबेरी महोत्सव की अनोखी पहल का पूरा आनंद छात्रों ने उठाया।
स्ट्राबेरी फल तस्वीरों में या टीवी पर देखा, किताबों में पढ़ा, लेकिन कभी चखा नहीं, लेकिन सह्याद्री प्रतिष्ठान व अस्तित्व कला मंच द्वारा आयोजित किए गए स्ट्राबेरी महोत्सव के माध्यम से हमें स्ट्राबेरी फल चखने को मिला। यह भावना कान्हेवाडी बुद्रुक (ता. खेड) स्थित जिला परिषद स्कूल के छात्रों ने व्यक्त की।
इस उत्सव का आयोजन फाउंडेशन द्वारा किया गया था और इसमें ग्राम मुख्यालय के साथ-साथ वाडी स्कूलों के 85 छात्रों ने भाग लिया था। उन्हें स्ट्रॉबेरी के ढेर में अपने हाथों से जितने चाहें उतने फल खाने की आजादी दी गई। पहली बार छात्रों के हाथों में पर्याप्त स्ट्रॉबेरी पाकर बहुत खुशी हुई। स्ट्रॉबेरी खाकर छात्र-छात्राएं काफी खुश हुए।
छात्रों को हमेशा राष्ट्रीय त्यौहारों के अवसर पर ग्रामीणों या मेहमानों से चॉकलेट, बिस्कुट या अन्य फल मिलते हैं। आज उन्हें जो खाने को मिला, वह बच्चों की जिज्ञासा जगा रहा था। स्ट्राबेरी की फसल ठंडी हवा में उगाई जाती है, जिन विद्यार्थियों ने इस पुस्तक को पढ़ा या जो हमने पढ़ाया, वे बहुत कम जानते थे। हालाँकि उन्हें यह फल चखने को मिला है। सह्याद्री प्रतिष्ठान की यह पहल अभिनव है। यह भावना मुख्याध्यापक सुरेश नाईकरे व शंकर बुरसे ने व्यक्त की।
सह्याद्री प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कृष्णकांत कोबल ने कहा कि प्रतिष्ठान समय-समय पर गांव के स्कूली बच्चों एवं अन्य तत्वों के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित करता रहता है। कोरोना काल में प्रतिष्ठान के कार्यकर्ताओं ने चंदा इकट्ठा कर गांव के जरूरतमंद परिवारों को एक माह का राशन उपलब्ध कराया था। स्कूल के छात्रों के लिए पिछले दो सालों से कोई भी गतिविधि का आयोजन किया नहीं गया था, स्ट्राबेरी महोत्सव की एक अनूठी गतिविधि के रूप में आयोजित करते हुए छात्रों को फिर से स्कूल से प्यार करने का यह एक प्रयास है।
प्रतिष्ठान के सदस्य योगेश खाडे, पिंटू पवार, सुजीत थोरात, विलास कोबल, विनोद कोबल, कलामंच की प्रमुख डॉ. अश्विनी शेंडे, योगेश गोंधले, स्ट्रॉबेरी उत्पादक किसान सोमनाथ शिंदे द्वारा महोत्सव का संयोजन किया गया था।
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