हड़पसर, मार्च (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
संगीत की कोई सीमा नहीं होती, कोई भेद नहीं होता, उसी तरह खाद्य संस्कृति में कोई भेद नहीं होता है।
आज देखा जाए तो हमें एक अलग पहल यहां दिखाई दी गई कि हिंदू समाज की महिलाओं के हाथों से चिकन बिर्याणी और मुस्लिम समाज की महिलाओं के हाथों से पूरनपोली बनाकर सामाजिक एकता का संदेश देने में बहुमूल्य योगदान ‘दीया फाउंडेशन’ के प्रमुख इमरान शेख व नसीम शेख ने दिया है। यह विचार पूर्व गृह राज्यमंत्री व पुणे शहर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रमेश बागवे ने व्यक्त किए।
महिला दिन के अवसर पर दीया फाउंडेशन के प्रमुख इमरान शेख व नसीम शेख की ओर से महिलाओं के लिए एक अनोखी पहल के तहत सभी समुदायों की खाद्य संस्कृति का सम्मान करते हुए महिला दिवस के मौके पर दीया फाउंडेशन ने अपनी संस्था के माध्यम से पुणे फूड फेस्टिवल का आयोजन किया था, जिसमें महिलाओं के लिए तीन प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं, चिकन बिर्यानी, पूरनपोली और केक बनाना, जिसमें महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, तब प्रमुख अतिथि के रूप में वे बोल रहे थे। प्रतियोगिता का पुरस्कार स्वरूप इस प्रकार था, पहला पुरस्कार 11 हजार रुपए, दूसरा पुरस्कार 7 हजार रुपए और तीसरा पुरस्कार 5 हजार रुपए।
रमेश बागवे ने आगे कहा कि उल्लेखनीय है कि चिकन बिर्यानी बनाने की प्रतियोगिता में हिंदू समुदाय की महिलाओं ने हिस्सा लिया और पूरनपोली बनाने की प्रतियोगिता में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने हिस्सा लिया। इमरान शेख ने इस प्रतियोगिता के जरिए सामाजिक एकता का संदेश देने की कोशिश की। सैयदनगर व हांडेवाड़ी रोड से बड़ी संख्या में महिलाओं ने दीया फाउंडेशन के इस फूड फेस्टिवल में भाग लिया और वहां अपने व्यंजन पेश किए।
इमरान शेख ने कहा कि हम भारत जैसे देश में रहते हैं जहां हर एक किलोमीटर के बाद खाद्य संस्कृति बदलती है। हमें इन हर खाद्य संस्कृतियों का सम्मान करना चाहिए। आज हम देखते हैं कि इस प्रतियोगिता में चिकन बिर्यानी बनाने में बड़ी संख्या में हिंदू महिलाएं शामिल हुईं और पूरनपोली बनाने में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुईं। इससे बढ़कर सामाजिक एकता का संदेश क्या हो सकता है?
संगीत की कोई सीमा नहीं होती, कोई भेद नहीं होता, उसी तरह खाद्य संस्कृति में कोई भेद नहीं होता है।
आज देखा जाए तो हमें एक अलग पहल यहां दिखाई दी गई कि हिंदू समाज की महिलाओं के हाथों से चिकन बिर्याणी और मुस्लिम समाज की महिलाओं के हाथों से पूरनपोली बनाकर सामाजिक एकता का संदेश देने में बहुमूल्य योगदान ‘दीया फाउंडेशन’ के प्रमुख इमरान शेख व नसीम शेख ने दिया है। यह विचार पूर्व गृह राज्यमंत्री व पुणे शहर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रमेश बागवे ने व्यक्त किए।
महिला दिन के अवसर पर दीया फाउंडेशन के प्रमुख इमरान शेख व नसीम शेख की ओर से महिलाओं के लिए एक अनोखी पहल के तहत सभी समुदायों की खाद्य संस्कृति का सम्मान करते हुए महिला दिवस के मौके पर दीया फाउंडेशन ने अपनी संस्था के माध्यम से पुणे फूड फेस्टिवल का आयोजन किया था, जिसमें महिलाओं के लिए तीन प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं, चिकन बिर्यानी, पूरनपोली और केक बनाना, जिसमें महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, तब प्रमुख अतिथि के रूप में वे बोल रहे थे। प्रतियोगिता का पुरस्कार स्वरूप इस प्रकार था, पहला पुरस्कार 11 हजार रुपए, दूसरा पुरस्कार 7 हजार रुपए और तीसरा पुरस्कार 5 हजार रुपए।
रमेश बागवे ने आगे कहा कि उल्लेखनीय है कि चिकन बिर्यानी बनाने की प्रतियोगिता में हिंदू समुदाय की महिलाओं ने हिस्सा लिया और पूरनपोली बनाने की प्रतियोगिता में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने हिस्सा लिया। इमरान शेख ने इस प्रतियोगिता के जरिए सामाजिक एकता का संदेश देने की कोशिश की। सैयदनगर व हांडेवाड़ी रोड से बड़ी संख्या में महिलाओं ने दीया फाउंडेशन के इस फूड फेस्टिवल में भाग लिया और वहां अपने व्यंजन पेश किए।
इमरान शेख ने कहा कि हम भारत जैसे देश में रहते हैं जहां हर एक किलोमीटर के बाद खाद्य संस्कृति बदलती है। हमें इन हर खाद्य संस्कृतियों का सम्मान करना चाहिए। आज हम देखते हैं कि इस प्रतियोगिता में चिकन बिर्यानी बनाने में बड़ी संख्या में हिंदू महिलाएं शामिल हुईं और पूरनपोली बनाने में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुईं। इससे बढ़कर सामाजिक एकता का संदेश क्या हो सकता है?
0 टिप्पणियाँ