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किसानों की आजादी संकल्प को मजबूत करने के लिए संभाजी ब्रिगेड पुणे जिला द्वारा अन्नत्याग आंदोलन

संभाजी ब्रिगेड पुणे जिला की ओर से किसानों के हित के लिए व नरभक्षी कानूनों का विरोध करने के लिए आयोजित किए गए अन्नत्याग आंदोलन में संभाजी ब्रिगेड के पुणे जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर घाडगे व साथ में अन्य उक्त चित्र में दिखाई दे रहे हैं।

हड़पसर, मार्च (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)

किसानों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार अधिकतम कृषि भूमि प्रतिधारण (सिलिंग), आवश्यक वस्तु, भूमि अधिग्रहण आदि नरभक्षी कानूनों का विरोध करने व किसानों की आजादी संकल्प को मजबूत करने के लिए संभाजी ब्रिगेड पुणे जिला की   ओर से अन्नत्याग आंदोलन   किया  गया। यह जानकारी संभाजी   ब्रिगेड के पुणे जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर घाडगे ने दी है।
इस बारे में जानकारी देते हुए जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर घाडगे ने बताया कि 19 मार्च 1986 को देश के पहले किसान ने आत्महत्या की थी, जिसकी सरकार के पास अधिकृत जानकारी है, जो यवतमाल जिले के चिलगव्हाण गांव के सामाजिक व संत विचारों के किसान स्मृतिशेष साहेबराव पाटिल करपे हैं।
उन्होंने उस दिन अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ सामूहिक आत्महत्या कर ली थी। सरकार की किसान विरोधी नीतियां व उसमें कृषि व्यवसाय में हुई कृषि की विकट स्थिति सामूहिक हत्याओं के पीछे का मुख्य कारण था। इस घटना से पूरा महाराष्ट्र सदमे में था। तब से लेकर अब तक देशभर में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला जारी है। सरकार की गलत नीतियों के कारण पिछले कुछ वर्षों में 4 लाख से अधिक किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। कृषि से जुड़े सभी लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करना प्रत्येक संवेदनशील और विचारशील व्यक्ति का कर्तव्य है।
अन्नत्याग आंदोलन में संभाजी ब्रिगेड पुणे जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर घाडगे के साथ जिला सचिव निलेश ढगे, मावल लोकसभा कार्याध्यक्ष दिनकर केदारी, विद्यार्थी आघाडी जिलाध्यक्ष जयदीप रणदिवे, व्यापारी आघाडी कार्याध्यक्ष विवेक कावरे, जिला संघटक हनुमंत गुरव, शिरूर लोकसभा कार्याध्यक्ष गणेश बावणे, कामगार आघाडी संघटक अंकुश हाके, संघटक संतोष सूर्यवंशी व एकनाथ पवार ने    भाग लिया।

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