पुणे, अप्रैल (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
गुरुकुल प्रतिष्ठान के विद्यमान अध्यक्ष, पुणे विश्वविद्यालय के संत नामदेव अध्यासन के पूर्व प्रमुख तथा संत साहित्य के गाढ़े अभ्यासक डा.अशोक कामत ने हाल ही में अपनी आयु के 81 वें वर्ष में प्रवेश किया है। इस शुभ अवसर पर गुरुकुल प्रतिष्ठान, उनका मित्र परिवार तथा छात्रों ने मिलकर उनके सम्मान में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इसमें विभिन्न साहित्यिक तथा अध्यात्मिक विषयों पर आधारित डा. कामत की दस मुलाकातों का संकल्प तथा पुस्तक प्रकाशन आदि कार्यक्रमों का समावेश है।
दस मुलाकातों के अंतर्गत पहली मुलाकात 25 मार्च 2022 को श्री अवधूत मचाले तथा श्री प्रल्हाद गायकवाड ने ‘हिरवाई आणि तरुणाई’ विषय पर ली। दूसरी मुलाकात टिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डा. श्री. ग. बापट ने ‘डा.कामत यांचा जीवनप्रवास’ इस विषय पर ली। तीसरी मुलाकात 1 अप्रैल को महाराष्ट्र साहित्य परिषद के स्थानीय सचिव श्री दीपक करंदीकर तथा श्री बंडा जोशी ने ‘संस्था सेवा सहभाग’ विषय पर ली। चौथी मुलाकात वक्ता एवं कलाकार प्रा. श्याम भुर्के ने ‘मोठ्या माणसांचा सहवास’ विषय पर ली। पाँचवीं मुलाकात 11 अप्रैल को दासबोध के अभ्यासक श्री रमण चितले ने ‘वारकरी आणि वारकरी वाङमय विषयक कार्य’ विषय पर ली। छठी मुलाकात महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा, पुणे के वर्तमान सहसचिव प्रा. रविकिरण गलंगे ने ‘हिंदी संस्था सेवाकार्य’ विषय पर हिंदी भाषा में ली।
शेष चार मुलाकातें जल्द ही संपन्न होगी। डा. कामत ने आज तक समूचे महाराष्ट्र में अनेक विषयों पर सैकड़ों व्याख्यान दिए हैं। अनेक विश्वविद्यालय से उन्हें पीएच.डी. के परीक्षक के रूप में सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया जाता है। पचास से भी अधिक छात्रों ने उनके मार्गदर्शन में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने आज तक 150 से अधिक किताबों का लेखन-संपादन किया है।
यह जानकारी महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा, पुणे के वर्तमान सहसचिव प्रा. रविकिरण गलंगे द्वारा दी गई है।
गुरुकुल प्रतिष्ठान के विद्यमान अध्यक्ष, पुणे विश्वविद्यालय के संत नामदेव अध्यासन के पूर्व प्रमुख तथा संत साहित्य के गाढ़े अभ्यासक डा.अशोक कामत ने हाल ही में अपनी आयु के 81 वें वर्ष में प्रवेश किया है। इस शुभ अवसर पर गुरुकुल प्रतिष्ठान, उनका मित्र परिवार तथा छात्रों ने मिलकर उनके सम्मान में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इसमें विभिन्न साहित्यिक तथा अध्यात्मिक विषयों पर आधारित डा. कामत की दस मुलाकातों का संकल्प तथा पुस्तक प्रकाशन आदि कार्यक्रमों का समावेश है।
दस मुलाकातों के अंतर्गत पहली मुलाकात 25 मार्च 2022 को श्री अवधूत मचाले तथा श्री प्रल्हाद गायकवाड ने ‘हिरवाई आणि तरुणाई’ विषय पर ली। दूसरी मुलाकात टिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डा. श्री. ग. बापट ने ‘डा.कामत यांचा जीवनप्रवास’ इस विषय पर ली। तीसरी मुलाकात 1 अप्रैल को महाराष्ट्र साहित्य परिषद के स्थानीय सचिव श्री दीपक करंदीकर तथा श्री बंडा जोशी ने ‘संस्था सेवा सहभाग’ विषय पर ली। चौथी मुलाकात वक्ता एवं कलाकार प्रा. श्याम भुर्के ने ‘मोठ्या माणसांचा सहवास’ विषय पर ली। पाँचवीं मुलाकात 11 अप्रैल को दासबोध के अभ्यासक श्री रमण चितले ने ‘वारकरी आणि वारकरी वाङमय विषयक कार्य’ विषय पर ली। छठी मुलाकात महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा, पुणे के वर्तमान सहसचिव प्रा. रविकिरण गलंगे ने ‘हिंदी संस्था सेवाकार्य’ विषय पर हिंदी भाषा में ली।
शेष चार मुलाकातें जल्द ही संपन्न होगी। डा. कामत ने आज तक समूचे महाराष्ट्र में अनेक विषयों पर सैकड़ों व्याख्यान दिए हैं। अनेक विश्वविद्यालय से उन्हें पीएच.डी. के परीक्षक के रूप में सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया जाता है। पचास से भी अधिक छात्रों ने उनके मार्गदर्शन में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने आज तक 150 से अधिक किताबों का लेखन-संपादन किया है।
यह जानकारी महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा, पुणे के वर्तमान सहसचिव प्रा. रविकिरण गलंगे द्वारा दी गई है।

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