बोध कथा
चिंटू एक होशियार और बुद्धिमान बालक था। वह अपने माता-पिता की बात पूरी तरह मानता था। शहर में किडनैपिंग की कुछ घटनाओं के बारे में सुनकर उसके पिताजी ने उसे एक घड़ी लाकर उसकी कलाई पर बाँध दी और उसे समझाया कि वह अब कहीं से भी उनसे बात कर सकता है ठीक वैसे जैसे मोबाइल पर बात की जाती है और उसमें माता पिता के अलावा पुलिस का नंबर भी डाल दिया।चिंटू के माता-पिता ने यह भी समझाया कि कालोनी में किसी अनजान आदमी से खाने पीने की कोई चीज न ले और न उसकी बातों में आए, न उसके साथ कहीं जाए और कभी भी कोई बात हो तो तुरंत उनसे बात करे। ज्यादा कुछ ऐसा वैसा महसूस हो तो पुलिस को फोन लगा दे परंतु बिना किसी ठोस कारण के पुलिस को फोन न करे। उसके माता-पिता दोनों काम करते थे परंतु दोनों में से एक घर पर जरूर रहता।
एक दिन चिंटू कालोनी में अपने दोस्त बच्चों के साथ खेल रहा था तभी उसके पास एक आदमी आया और चिंटू से बात करने लगा। पहले उसका नाम पछा, फिर स्कूल का नाम पूछा और उसके माता-पिता के बारे में पूछा। पूछते पूछते चिंटू को चॉकलेट दी तो चिंटू को उस पर शक हो गया। उसके पापा ऑफिस में थे और मम्मी बाजार गई थी। उसने झट से अपनी वॉच पर पापा से बात की और बताया कि एक अंकल आए हैं, आप लोगों के बारे में पूछ रहे हैं और मुझे चॉकलेट भी दे रहे हैं। उसके पापा समझ गए कि कोई गलत आदमी आ गया है और उन्होंनेे तुरंत पुलिस को बताया तथा चिंटू की मम्मी को भी। वह आदमी चिंटू को फुसला रहा था कि वह उसके साथ उसकी गाड़ी तक चले तो उसे बहुत सारी मिठाई खिलाएगा। वह बोल ही रहा था कि वहाँ पुलिस पहुँच गई साथ ही चिंटू के माता पिता भी। पुलिस उस आदमी को पकड़ कर ले गई। पूछताछ करने पर पता चला कि वह आदमी बच्चों को किडनैप करता था और इससे पहले दो बच्चों को किडनैप कर चुका था। चिंटू की समझदारी से वह खुद तो बचा ही और पहले से किडनैप किए हुए बच्चों को भी आजाद करवा दिया। पुलिस ने आकर चिंटू को शाबाशी दी और इनाम भी दिया।

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