ऑटोमोटेड मल्टिमॉडेल बायोमेट्रिक आयडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (एएमबीआईएस) कंप्यूटर सिस्टम का उद्घाटन करते हुए आपराधिक जांच विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रितेश कुमार, साथ में अन्य अधिकारीगण उक्त चित्र में दिखाई दे रहे हैं।
पुणे, मई (जिमाका)
‘ऑटोमोटेड मल्टिमॉडेल बायोमेट्रिक आयडेंटिफिकेशन सिस्टीम’ (एएमबीआईएस) कंप्यूटर सिस्टम का उद्घाटन आपराधिक जांच विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रितेश कुमार द्वारा किया गया।
इस अवसर पर यहां विशेष पुलिस महानिरीक्षक (पश्चिम) सुरेश मेखला, पुलिस उपमहानिरीक्षक रंजनकुमार शर्मा, महाराष्ट्र सायबर के पुलिस अधीक्षक संजय शित्रे, पिपरी-चिंचवड आयुक्त अंकुश शिंदे, पुलिस अधीक्षक अभिनव देशमुख, सेवानिवृत्त विशेष पुलिस महानिरीक्षक ए.डी. शिंदे, श्री देशपांडे, आपराधिक जांच विभाग के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, अंगुली मुद्रा विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ रोहोदार कसार, प्रथम विशेषज्ञ पुलिस निरीक्षक अविनाश सरवीर, प्रथम विशेषज्ञ पुलिस निरीक्षक रूपाली गायकवाड़ व अन्य अंगुली मुद्रा केंद्र के सभी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
आपराधिक जांच विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रितेश कुमार ने इस अवसर पर कहा कि एएमबीआईएस प्रणाली उन्नत तकनीक पर आधारित है। पुलिस दल ने आधुनिकीकरण के मद्देनजर केवल उंगलियों के निशान नहीं बल्कि हथेलियों, चेहरे और आंखों को स्कैन करना और उन्हें डिजिटल रूप से संग्रहीत करना शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र राज्य की सभी पुलिस घटकों से जब इस प्रणाली का उपयोग किए जाने पर अपराधों का तुरंत समाधान होगा और दोषियों को सिद्ध करने की संख्या बढ़ेगी। कार्यक्रम की प्रस्तावना पुलिस उपमहानिरीक्षक सुधीर हिरेमद ने की।
एएमबीआईएस प्रणाली इस प्रकार है :
पहले अपराधियों के उंगलियों की स्थिति से आरोपी की पहचान की जाती थी, लेकिन अब हाथों की हथेलियाँ, सीसीटीवी फुटेज में चेहरा व फोटो के जरिए दोषियों की पहचान भी की जाएगी। इस सिस्टम में आरोपी की उंगलियों के निशान, हथेली के निशान, चेहरे और आँखों के बुलबुले डिजीटल प्रारूप में सहेज और अन्य तस्वीरों के साथ मिलान करने की क्षमता है। पुलिस ठाणे स्तर तक एएमबीआईएस प्रणाली लागू करनेवाला महाराष्ट्र राज्य भारत का पहला राज्य है। इस व्यवस्था के तहत करीब 6.5 लाख गिरफ्तारियां व दोषी करार दिए गए आरोपियों का रिकॉर्ड कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया है। एएमबीआईएस प्रणाली भविष्य में सीसीटीएनएस, प्रिझम, सीसीटीवी व राष्ट्रीय स्तर पर एनएएफआयएस प्रणाली के साथ संकलित की जाएगी। राज्य के सभी पुलिस स्टेशन, परिक्षेत्रीय कार्यालय, पुलिस आयुक्तालय, जिला पुलिस मुख्यालय, अंगुली मुद्रा केंद्र, प्रशिक्षण केंद्र व मध्यवर्ती जेल में एएमबीआईएस प्रणाली का हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर दिया गया है। इंटरपोल व एफबीआई में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस थाने में गिरफ्तार आरोपियों की अंगुली मुद्रा पत्रिका को ऑनलाइन पंजीकृत करके आपराधिक प्रवृत्तियों के अपने पिछले इतिहास की जाँच करने के लिए व उनके खिलाफ निवारक कार्रवाई करने के लिए इस कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
एएमबीआईएस प्रणाली के अंतर्गत दी जानेवाली पोर्टेबल एएमबीआईएस तकनीक का इस्तेमाल करके अपराध स्थल पर मिली चान्सप्रिट द्वारा अपराधियों का पता लगाना कुछ ही मिनटों में संभव हुआ है, इसलिए अपराध के खुलासे में वृद्धि होकर राज्य में दोष सिद्ध दर में वृद्धि होगी है। एएमबीआईएस प्रणाली उन्नत तकनीक पर आधारित है। प्रणाली की गति और सटीकता के कारण यह अन्य प्रणालियों से अलग है। महाराष्ट्र राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ निवारक कार्रवाई करने के लिए एएमबीआईएस प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है। प्रयोगात्मक आधार पर प्रयोगों में एएमबीआईएस प्रणाली पर वर्ष 2020 से अप्रैल 2022 तक 52 मामलों में 2.14 करोड़ रुपये की चोरी की संपत्ति के मामले में आरोपियों का पता लगा लिया गया है।
पहले अपराधियों के उंगलियों की स्थिति से आरोपी की पहचान की जाती थी, लेकिन अब हाथों की हथेलियाँ, सीसीटीवी फुटेज में चेहरा व फोटो के जरिए दोषियों की पहचान भी की जाएगी। इस सिस्टम में आरोपी की उंगलियों के निशान, हथेली के निशान, चेहरे और आँखों के बुलबुले डिजीटल प्रारूप में सहेज और अन्य तस्वीरों के साथ मिलान करने की क्षमता है। पुलिस ठाणे स्तर तक एएमबीआईएस प्रणाली लागू करनेवाला महाराष्ट्र राज्य भारत का पहला राज्य है। इस व्यवस्था के तहत करीब 6.5 लाख गिरफ्तारियां व दोषी करार दिए गए आरोपियों का रिकॉर्ड कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया है। एएमबीआईएस प्रणाली भविष्य में सीसीटीएनएस, प्रिझम, सीसीटीवी व राष्ट्रीय स्तर पर एनएएफआयएस प्रणाली के साथ संकलित की जाएगी। राज्य के सभी पुलिस स्टेशन, परिक्षेत्रीय कार्यालय, पुलिस आयुक्तालय, जिला पुलिस मुख्यालय, अंगुली मुद्रा केंद्र, प्रशिक्षण केंद्र व मध्यवर्ती जेल में एएमबीआईएस प्रणाली का हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर दिया गया है। इंटरपोल व एफबीआई में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस थाने में गिरफ्तार आरोपियों की अंगुली मुद्रा पत्रिका को ऑनलाइन पंजीकृत करके आपराधिक प्रवृत्तियों के अपने पिछले इतिहास की जाँच करने के लिए व उनके खिलाफ निवारक कार्रवाई करने के लिए इस कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
एएमबीआईएस प्रणाली के अंतर्गत दी जानेवाली पोर्टेबल एएमबीआईएस तकनीक का इस्तेमाल करके अपराध स्थल पर मिली चान्सप्रिट द्वारा अपराधियों का पता लगाना कुछ ही मिनटों में संभव हुआ है, इसलिए अपराध के खुलासे में वृद्धि होकर राज्य में दोष सिद्ध दर में वृद्धि होगी है। एएमबीआईएस प्रणाली उन्नत तकनीक पर आधारित है। प्रणाली की गति और सटीकता के कारण यह अन्य प्रणालियों से अलग है। महाराष्ट्र राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ निवारक कार्रवाई करने के लिए एएमबीआईएस प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है। प्रयोगात्मक आधार पर प्रयोगों में एएमबीआईएस प्रणाली पर वर्ष 2020 से अप्रैल 2022 तक 52 मामलों में 2.14 करोड़ रुपये की चोरी की संपत्ति के मामले में आरोपियों का पता लगा लिया गया है।


0 टिप्पणियाँ