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नियमित करें योग, दूर भगाएं रोग

 योग दिन पर विशेष लेख...

आज के तनावपूर्ण जीवन में कई लोगों की शिकायत रहती है कि उनके पास खुद पर ध्यान देने का समय नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों की शुरुआत के बाद दैनिक जीवन की भागदौड़ में अपना ख्याल रखना भी जरूरी है। फिर शुरू होती है डॉक्टर की फीस। इस डॉक्टर के पास जाओ, उस डॉक्टर के पास जाओ। ऐसा समय आने से पहले ही अगर हर कोई प्राणायाम, योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेने लगे तो अस्पताल पहुंचने का समय नहीं मिलेगा। मौजूदा हालात में यह बेहद जरूरी है। प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसलिए आइए हम सब कहें... नियमित रूप से करें योग और दूर भगाएं रोग...
योग उपचार से मनुष्य की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रगति होती है। यह श्वसन प्रणाली को मजबूत करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में भी मदद करता है। योगासन का अभ्यास करने से पहले आपको अपने शरीर और दिमाग को अभ्यास के लिए तैयार करना होगा। शरीर में लचीलापन लाने के साथ-साथ सभी जोड़ों को आराम देना भी जरूरी है।
शारीरिक पूर्व तैयारी
पैर की उंगलियों से गर्दन तक शरीर के जोड़ों की सभी गतिविधियों को क्रम में किया जाना चाहिए। मानसिक तैयारी में प्रार्थना, ध्यान और ओंकार का जप शामिल होना चाहिए। इसे हर कोई अपनी सुविधानुसार बदल सकता है। मन को योग के लिए तैयार करने की, मन को स्थिर करने की एक ही अपेक्षा है।
योग करते समय पालन करने वाले नियम
योग अभ्यास के लिए कोई आयु सीमा नहीं है। पुरुष और महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी आसानों का अध्ययन कर सकते हैं। योग सुबह जल्दी उठकर या शाम को खाली पेट करना चाहिए। भोजन के बाद वज्रासन के अतिरक्ति अन्य आसन न करें। आसन के जगह समतल होनी चाहिए। आसन प्रसन्न खुली जगह और प्राकृतिक वातावरण में करना चाहिए। जब तक आसन पूरा न हो जाए तब तक न बात करें और न ही मजाक करें। आसान आसनों से शुरुआत करते हुए धीरे-धीरे कठिन आसनों का अध्ययन करें। आसन के दौरान सांस लेना स्वाभाविक होना चाहिए। जब तक थकान न हो तब तक आसन न करें। आसन के अंत में 10 से 15 मिनट तक सांस लें।
नियमित योगाभ्यास के लाभ
योग का अभ्यास करने वाला व्यक्ति उन्नत और सुसंस्कृत जीवन जीता है। योग का अभ्यास अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु को बढ़ावा देता है। तनाव से मुक्ति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। जैसे-जैसे योग मन की शांति लाता है, जीवन सन्तुष्ट हो जाता है और व्यक्तित्व का विकास होता है। मानसिक विकार और अनिद्रा जैसी बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। योग स्कूली बच्चों को स्वस्थ रहने और बौद्धिक रूप से विकसित करने में मदद करता है। बदली हुई जीवन शैली से जुड़े मोटापे, मधुमेह और उच्च रक्त की चर्बी बढ़ने जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए योग का उपयोग किया जा सकता है। आसनों के नियमित अभ्यास से रक्त परिसंचरण में सुधार कर हृदय और फेफड़ों के स्वास्थ्य में सुधार होता है। उत्साह बढ़ाता है, मस्तिष्क के कार्य में सुधार करता है।
बहुत बार व्यवहार में योगासन व्यायाम के रूप में समझकर योगासन किये जाते हैं। व्यायाम में शरीर की गति तेज होती है, लेकिन आसन में शरीर के स्थिर रहने की उम्मीद की जाती है। व्यायाम की समझ के साथ योग करने से शरीर को अपेक्षित लाभ मिले बिना नुकसान हो सकता है। इसके लिए आसन और व्यायाम के बीच के अंतर को समझना जरूरी है। आइए इस योग दिवस के अवसर पर वैज्ञानिक ढंग से गौरवमयी एवं अमूल्य योग साधना करके अपने जीवन को स्वस्थ एवं सुखी, दीर्घायु बनाने का संकल्प लें, जिससे समस्त भारत लाभान्वित हुआ है।
-विभागीय सूचना कार्यालय, पुणे

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