शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री को तौर पर शपथ ले ली है। विधानसभा भवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री की शपथ ली है। फडणवीस ने ही मुख्यमंत्री पद के लिए एकनाथ शिंदे के नाम का ऐलान किया था और खुद इस सरकार से बाहर रहने की बात कही थी। लेकिन आखिरी समय में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कहने पर फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार कर लिया। इसी के साथ महाराष्ट्र की सियासत में 21 जून को उठा भूचाल अब थमता हुआ दिखाई दे रहा है।
इसके पहले देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाए जाने का ऐलान किया था। उनके इस ऐलान के बाद सभी सियासी दल चौंक गए। इसके पहले सियासी गलियारों में इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि शिवसेना के बागी विधायक बीजेपी को समर्थन देकर सरकार बनाएंगे और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनेंगे।
इसके पहले देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाए जाने का ऐलान किया था। उनके इस ऐलान के बाद सभी सियासी दल चौंक गए। इसके पहले सियासी गलियारों में इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि शिवसेना के बागी विधायक बीजेपी को समर्थन देकर सरकार बनाएंगे और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनेंगे।
एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन महाराष्ट्र के राजभवन में आयोजित किया गया। इस दौरान शिवसेना और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहें। एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र की कैबिनेट का गठन किया जाएगा। इस दौरान ये सत्ता में आए दोनों दलों के नेताओं को मंत्रालयों की जिम्मेदारियां दी जाएंगी। आपको बता दें कि इसके पहले गुरुवार की शाम को देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि शाम साढ़े सात बजे एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे, जबकि इनकी कैबिनेट अगले कुछ दिनों में शपथ लेगी।
महाराष्ट्र में पिछले एक सप्ताह से सियासी उथल-पुथल मची हुई थी। सत्ताधारी शिवसेना दो गुटों में विभाजित हो गई थी। शिवसेना के 2 तिहाई से ज्यादा विधायक बागी हो गए और पहले वो सूरत और फिर बाद में गुवाहाटी जाकर शिफ्ट हो गए। इस दौरान शिवसेना ने काफी बयानबाजियां कीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने यहां तक कह दिया था कि उन 40 विधायकों के शव वापस आएंगे महाराष्ट्र में। हालांकि बाद में उद्धव ठाकरे ने विधायकों से वापस आने की भावुक अपील भी की थी।
बागी शिवसेना विधायकों की मांग थी कि उद्धव ठाकरे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बना लें। बागी विधायकों ने कहा कि आप महाविकास अघाड़ी का साथ छोड़ दीजिए, हम आपके साथ आ जाएंगे। इसके बाद संजय राउत और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे की बयान बाजियों ने आग में घी का काम किया और नतीजा एक सप्ताह के भीतर ही उद्धव ठाकरे को सत्ता गंवानीं पड़ी। अब एक बड़ा सवाल शिवसेना के चुनाव चिन्ह को लेकर भी खड़ा होगा। एकनाथ शिन्दे गुट दावा करता है कि वो असली शिवसेना है, उसके पास 2 तिहाई से ज्यादा विधायकों का बहुमत है, लेकिन उद्धव ठाकरे कहते हैं शिवसेना उनकी पार्टी है।
महाराष्ट्र में पिछले एक सप्ताह से सियासी उथल-पुथल मची हुई थी। सत्ताधारी शिवसेना दो गुटों में विभाजित हो गई थी। शिवसेना के 2 तिहाई से ज्यादा विधायक बागी हो गए और पहले वो सूरत और फिर बाद में गुवाहाटी जाकर शिफ्ट हो गए। इस दौरान शिवसेना ने काफी बयानबाजियां कीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने यहां तक कह दिया था कि उन 40 विधायकों के शव वापस आएंगे महाराष्ट्र में। हालांकि बाद में उद्धव ठाकरे ने विधायकों से वापस आने की भावुक अपील भी की थी।
बागी शिवसेना विधायकों की मांग थी कि उद्धव ठाकरे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बना लें। बागी विधायकों ने कहा कि आप महाविकास अघाड़ी का साथ छोड़ दीजिए, हम आपके साथ आ जाएंगे। इसके बाद संजय राउत और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे की बयान बाजियों ने आग में घी का काम किया और नतीजा एक सप्ताह के भीतर ही उद्धव ठाकरे को सत्ता गंवानीं पड़ी। अब एक बड़ा सवाल शिवसेना के चुनाव चिन्ह को लेकर भी खड़ा होगा। एकनाथ शिन्दे गुट दावा करता है कि वो असली शिवसेना है, उसके पास 2 तिहाई से ज्यादा विधायकों का बहुमत है, लेकिन उद्धव ठाकरे कहते हैं शिवसेना उनकी पार्टी है।


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