मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने की कृषि क्षेत्र के लिए अहम फैसलों की घोषणा
मुंबई, अगस्त (महासंवाद)
लगातार बारिश से 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर पंचनामा करके किसानों को मुआवजा दिया जाएगा और प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित लोगों को सहायता राशि देने में होनेवाली देरी से बचने के लिए अब से पंचनामे के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में दी है।
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि अतिवृष्टि (65 मिमी से अधिक) के कारण नुकसान होने पर मुआवजा दिया जाता है। हालांकि अब तक की मांग को ध्यान में रखते हुए लगातार बारिश से 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान होने पर उसका पंचनामा करके किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
पंचनामे के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि प्रभावित लोगों को प्राकृतिक आपदा में दी जाने वाली राहत राशि के वितरण में होने वाली देरी को कम करने के लिए अब से पंचनामे के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। जल्द ही मोबाइल एप्लीकेशन के द्वारा ई-पंचनामा करना, उसके लिए आवश्यक निधि की मांग करना, संबंधितों के आधार लिंक बैंक खाते में सीधे पैसे जमा करना, इस तरह की एक नई प्रणाली विकसित की जा रही है। इसमें रिमोट सेंसिंग तकनीक (सैटेलाइट इमेज) का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह ड्रोन तकनीक का भी प्रयोग किया जाएगा।
कीटों से होनेवाले फसल नुकसान में भी मदद
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि घोंघे, पीत मोज़ाइक जैसे कीट रोगों के प्रकोप से होने वाले नुकसान के संबंध में पंचनामा करने के निर्देश दिए गए हैं और ऐसे कीड़ों से होने वाले नुकसान के लिए भी प्रभावित किसानों की मदद की जाएगी। अब तक हुई बारिश और अन्य मौसम संबंधी मामलों को मापने के लिए इससे पहले प्रत्येक 2400 राजस्व मंडलों में एक स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किया गया है। यह संख्या अपर्याप्त है इसलिए स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या में वृद्धि की जाएगी। इससे किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान प्राप्त होने पर मदद मिलेगी और बीमा दावों का शीघ्र निपटान किया जा सकेगा। फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कृषि कार्यालय, तहसील कार्यालय या जिस बैंक में बीमा का भुगतान किया गया है, ऐसे स्थान पर नुकसान की सूचना/आवेदन स्वीकार किया जाएगा और और इन आवेदनों को स्वीकार किया जाएगा। इस तरह की लिखित सूचना बीमा कंपनियों को दी जाएगी। नियमित कर्ज का भुगतान करने वाले किसानों को 50,000/- (रुपये पचास हजार मात्र) प्रोत्साहन अनुदान का आवंटन सितंबर महीने से शुरू किया जाएगा।
आपदा संभावित क्षेत्रों के पुनर्वास पर नीति शीघ्र
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि राज्य में जहां-जहां भूस्खलन या बार-बार बाढ़ आने जैसे आपदा प्रवण क्षेत्र हैं, वहां लोगों को निरंतर खतरनाक स्थिति में रहना पड़ रहा है। ऐसे नागरिकों के पुनर्वास के लिए कोई नीति नहीं है। ऐसे क्षेत्रों के पुनर्वास की नीति जल्द ही तय की जा रही है। इससे जानमाल का संभावित नुकसान काफी हद तक टाला जा सकता है।
मूल्य श्रृंखला विकसित करेंगे
डिजिटल खेती अभियान में बीज ट्रेसबिलिटी, ब्लॉक चेन मॉडल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, को- ऑपरेटिव समितियों और किसान उत्पादक समूहों (एफपीओ) के कम्प्यूटरीकरण जैसे इत्यादि कार्य किए जाएंगे। इससे उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज और उर्वरक मिलने पर किसानों की आय में वृद्धि होगी। आधुनिक कृषि में ड्रोन तकनीक, नैनो यूरिया, सिंचाई स्वचालन, कंट्रोल कल्टीवेशन जैसी टेक्नोलॉजी के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जाएगा। फसल विविधीकरण (उीेि ऊर्ळींशीीळषळलरींळेप) के तहत तिलहन, दलहन और फलोत्पादन पर विशेष जोर देते हुए मूल्य श्रृंखला विकसित की जाएगी। उच्च मूल्य वाली फसलों और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए इको सिस्टम तैयार किया जाएगा। कृषि क्षेत्र में सुगन्धित एवं औषधीय वनस्पति की खेती एवं उत्पादन करने के लिए उपयुक्त सुविधाओं और केंद्रों के सहयोग से प्रभावी ढंग से कार्य किया जाएगा।
किसान आत्महत्या रोकने के लिए व्यापक कार्य योजना
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि केन्द्र की योजनाओं को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए सुनियोजित पद्धति से कार्य किया जाएगा। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट सक्षम करके तेज गति से दिशा प्रदान करने काम किया जाएगा। जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के संबंध में केंद्र की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा ताकि हमारी कृषि विषाक्त मुक्त हो सके। किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेत -खलिहान से लेकर बाजार तक एक संपूर्ण गुणवत्तापूर्ण श्रृंखला बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। किसान उत्पादक समूहों को बढ़ावा देने का काम किया जाएगा। महाराष्ट्र में किसान आत्महत्या रोकने के लिए सरकार के विभिन्न विभागों के समन्वय से व्यापक कार्य योजना तैयार करने की कार्यवाही की जा रही है। इस संबंध में एक व्यापक नीति जल्द ही घोषित की जाएगी।
आपदा स्थिति में वास्तविक घटनास्थल पर जाकर कार्य
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र हर साल भारी बारिश, बाढ़, चक्रवात, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है। पहली कैबिनेट बैठक में इसकी समीक्षा की गई थी। मुंबई और कोंकण में लंबे ब्रेक के बाद बारिश शुरू हुई। कार्यभार संभालने के बाद राज्य में आपदा प्रबंधन की समीक्षा करने के लिए बैठक की गई और अधिकारियों को क्षेत्र में जाकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि आपदाओं में किसी की जान न जाए। हर सुबह कोंकण के जिलाधिकारियों से लगातार बात हो रही है। विभिन्न नदियों में बाढ़ आ गई। कुछ नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं। राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) की 11 इकाइयों को तैनात किया गया था। साथ ही बेस स्टेशन पर ‘एनडीआरएफ’ की 9 और ‘एसडीआरएफ की 4 कुल 13 इकाइयां तैयार रखी गईं। अमरावती जिले के तिवासा तहसील के चांदुरबाजार और मोर्शी में बाढ़ की स्थिति निर्माण हो गई थी। वहां के गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के कार्य पर भी नजर रखी गई। ठाणे जिला आपदा राहत प्रबंधन की बैठक आयोजित कर आपदा प्रबंधन कार्यों की जानकारी ली गई और सुझाव दिए गए। मैंने और उपमुख्यमंत्री दोनों ने बाढ़ प्रभावित गढ़चिरोली का दौरा किया और बाढ़ पीड़ितों का ढाढस बंधाया। दक्षिण गढ़चिरोली में भामरागड, अहेरी और सिरोंचा में बारिश के पानी के कारण कई सड़कें बंद हो गई थीं। खराब मौसम के कारण नागपुर से हवाई मार्ग से जाना और निरीक्षण करना संभव नहीं हुआ, इसलिए सड़क मार्ग से जाकर निरीक्षण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अतिवृष्टि, लगातार बारिश और बाढ़ से 18 लाख 21 हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। इसमें 17 लाख 59 हजार 633 हेक्टेयर में खेती, 25 हजार 476 हेक्टेयर में बागवानी और 36 हजार 294 हेक्टेयर में फल फसल शामिल है। अब तक 21 हजार बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मृत पशुओं के नुकसान के लिए हम 1 करोड़ 52 लाख रुपए की निधि दे रहे हैं। घरों, झोपड़ियों और गौशालाओं को हुए नुकसान के लिए 4 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि दी जा रही है। कृषि भूमि के कटाव से हुए नुकसान के लिए 5 करोड़ 78 लाख रुपए की सहायता दी जा रही है।
ड्रिप सेट और फ्रॉस्ट सेट का नुकसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 212 ड्रिप सेट और 469 फ्रॉस्ट सेट को नुकसान हुआ है। केंद्र के निर्देश के अनुसार लाभार्थी 7 वर्ष बाद ही सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का लाभ उठा सकता है क्योंकि उस संच का 7 साल का जीवन निर्धारित किया गया है।
कृषि फसलों को नुकसान के लिए बढ़ी दर पर सहायता
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि कृषि फसलों को हुए नुकसान के लिए जुलाई-2022 में संशोधित दर पर राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) से सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। यह सहायता प्रति हेक्टेयर बढ़ी मदद है। पहले दो हेक्टेयर की मर्यादा में मदद दी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर तीन हेक्टेयर तक कर दिया गया है। आपदा में तत्काल दी जाने वाली सहायता राशि 5,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए करने का निर्णय लिया गया है। सबसे खास बात यह है कि सभी प्रभावित इलाकों का पंचनामा महज डेढ़ महीने में पूरा कर लिया गया है। कोई भी बाढ़ प्रभावित मदद से वंचित नहीं रहेगा। जिला प्रशासन को सूचित किया गया है कि सहायता वितरण के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री एनडीआरएफ के नुकसान के मानदंड को बदलने के पक्ष में हैं। उनकी प्राथमिकता कृषि और किसान हैं।
लगातार बारिश से 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर पंचनामा करके किसानों को मुआवजा दिया जाएगा और प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित लोगों को सहायता राशि देने में होनेवाली देरी से बचने के लिए अब से पंचनामे के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में दी है।
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि अतिवृष्टि (65 मिमी से अधिक) के कारण नुकसान होने पर मुआवजा दिया जाता है। हालांकि अब तक की मांग को ध्यान में रखते हुए लगातार बारिश से 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान होने पर उसका पंचनामा करके किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
पंचनामे के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि प्रभावित लोगों को प्राकृतिक आपदा में दी जाने वाली राहत राशि के वितरण में होने वाली देरी को कम करने के लिए अब से पंचनामे के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। जल्द ही मोबाइल एप्लीकेशन के द्वारा ई-पंचनामा करना, उसके लिए आवश्यक निधि की मांग करना, संबंधितों के आधार लिंक बैंक खाते में सीधे पैसे जमा करना, इस तरह की एक नई प्रणाली विकसित की जा रही है। इसमें रिमोट सेंसिंग तकनीक (सैटेलाइट इमेज) का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह ड्रोन तकनीक का भी प्रयोग किया जाएगा।
कीटों से होनेवाले फसल नुकसान में भी मदद
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि घोंघे, पीत मोज़ाइक जैसे कीट रोगों के प्रकोप से होने वाले नुकसान के संबंध में पंचनामा करने के निर्देश दिए गए हैं और ऐसे कीड़ों से होने वाले नुकसान के लिए भी प्रभावित किसानों की मदद की जाएगी। अब तक हुई बारिश और अन्य मौसम संबंधी मामलों को मापने के लिए इससे पहले प्रत्येक 2400 राजस्व मंडलों में एक स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किया गया है। यह संख्या अपर्याप्त है इसलिए स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या में वृद्धि की जाएगी। इससे किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान प्राप्त होने पर मदद मिलेगी और बीमा दावों का शीघ्र निपटान किया जा सकेगा। फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कृषि कार्यालय, तहसील कार्यालय या जिस बैंक में बीमा का भुगतान किया गया है, ऐसे स्थान पर नुकसान की सूचना/आवेदन स्वीकार किया जाएगा और और इन आवेदनों को स्वीकार किया जाएगा। इस तरह की लिखित सूचना बीमा कंपनियों को दी जाएगी। नियमित कर्ज का भुगतान करने वाले किसानों को 50,000/- (रुपये पचास हजार मात्र) प्रोत्साहन अनुदान का आवंटन सितंबर महीने से शुरू किया जाएगा।
आपदा संभावित क्षेत्रों के पुनर्वास पर नीति शीघ्र
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि राज्य में जहां-जहां भूस्खलन या बार-बार बाढ़ आने जैसे आपदा प्रवण क्षेत्र हैं, वहां लोगों को निरंतर खतरनाक स्थिति में रहना पड़ रहा है। ऐसे नागरिकों के पुनर्वास के लिए कोई नीति नहीं है। ऐसे क्षेत्रों के पुनर्वास की नीति जल्द ही तय की जा रही है। इससे जानमाल का संभावित नुकसान काफी हद तक टाला जा सकता है।
मूल्य श्रृंखला विकसित करेंगे
डिजिटल खेती अभियान में बीज ट्रेसबिलिटी, ब्लॉक चेन मॉडल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, को- ऑपरेटिव समितियों और किसान उत्पादक समूहों (एफपीओ) के कम्प्यूटरीकरण जैसे इत्यादि कार्य किए जाएंगे। इससे उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज और उर्वरक मिलने पर किसानों की आय में वृद्धि होगी। आधुनिक कृषि में ड्रोन तकनीक, नैनो यूरिया, सिंचाई स्वचालन, कंट्रोल कल्टीवेशन जैसी टेक्नोलॉजी के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जाएगा। फसल विविधीकरण (उीेि ऊर्ळींशीीळषळलरींळेप) के तहत तिलहन, दलहन और फलोत्पादन पर विशेष जोर देते हुए मूल्य श्रृंखला विकसित की जाएगी। उच्च मूल्य वाली फसलों और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए इको सिस्टम तैयार किया जाएगा। कृषि क्षेत्र में सुगन्धित एवं औषधीय वनस्पति की खेती एवं उत्पादन करने के लिए उपयुक्त सुविधाओं और केंद्रों के सहयोग से प्रभावी ढंग से कार्य किया जाएगा।
किसान आत्महत्या रोकने के लिए व्यापक कार्य योजना
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि केन्द्र की योजनाओं को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए सुनियोजित पद्धति से कार्य किया जाएगा। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट सक्षम करके तेज गति से दिशा प्रदान करने काम किया जाएगा। जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के संबंध में केंद्र की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा ताकि हमारी कृषि विषाक्त मुक्त हो सके। किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेत -खलिहान से लेकर बाजार तक एक संपूर्ण गुणवत्तापूर्ण श्रृंखला बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। किसान उत्पादक समूहों को बढ़ावा देने का काम किया जाएगा। महाराष्ट्र में किसान आत्महत्या रोकने के लिए सरकार के विभिन्न विभागों के समन्वय से व्यापक कार्य योजना तैयार करने की कार्यवाही की जा रही है। इस संबंध में एक व्यापक नीति जल्द ही घोषित की जाएगी।
आपदा स्थिति में वास्तविक घटनास्थल पर जाकर कार्य
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र हर साल भारी बारिश, बाढ़, चक्रवात, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है। पहली कैबिनेट बैठक में इसकी समीक्षा की गई थी। मुंबई और कोंकण में लंबे ब्रेक के बाद बारिश शुरू हुई। कार्यभार संभालने के बाद राज्य में आपदा प्रबंधन की समीक्षा करने के लिए बैठक की गई और अधिकारियों को क्षेत्र में जाकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि आपदाओं में किसी की जान न जाए। हर सुबह कोंकण के जिलाधिकारियों से लगातार बात हो रही है। विभिन्न नदियों में बाढ़ आ गई। कुछ नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं। राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) की 11 इकाइयों को तैनात किया गया था। साथ ही बेस स्टेशन पर ‘एनडीआरएफ’ की 9 और ‘एसडीआरएफ की 4 कुल 13 इकाइयां तैयार रखी गईं। अमरावती जिले के तिवासा तहसील के चांदुरबाजार और मोर्शी में बाढ़ की स्थिति निर्माण हो गई थी। वहां के गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के कार्य पर भी नजर रखी गई। ठाणे जिला आपदा राहत प्रबंधन की बैठक आयोजित कर आपदा प्रबंधन कार्यों की जानकारी ली गई और सुझाव दिए गए। मैंने और उपमुख्यमंत्री दोनों ने बाढ़ प्रभावित गढ़चिरोली का दौरा किया और बाढ़ पीड़ितों का ढाढस बंधाया। दक्षिण गढ़चिरोली में भामरागड, अहेरी और सिरोंचा में बारिश के पानी के कारण कई सड़कें बंद हो गई थीं। खराब मौसम के कारण नागपुर से हवाई मार्ग से जाना और निरीक्षण करना संभव नहीं हुआ, इसलिए सड़क मार्ग से जाकर निरीक्षण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अतिवृष्टि, लगातार बारिश और बाढ़ से 18 लाख 21 हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। इसमें 17 लाख 59 हजार 633 हेक्टेयर में खेती, 25 हजार 476 हेक्टेयर में बागवानी और 36 हजार 294 हेक्टेयर में फल फसल शामिल है। अब तक 21 हजार बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मृत पशुओं के नुकसान के लिए हम 1 करोड़ 52 लाख रुपए की निधि दे रहे हैं। घरों, झोपड़ियों और गौशालाओं को हुए नुकसान के लिए 4 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि दी जा रही है। कृषि भूमि के कटाव से हुए नुकसान के लिए 5 करोड़ 78 लाख रुपए की सहायता दी जा रही है।
ड्रिप सेट और फ्रॉस्ट सेट का नुकसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 212 ड्रिप सेट और 469 फ्रॉस्ट सेट को नुकसान हुआ है। केंद्र के निर्देश के अनुसार लाभार्थी 7 वर्ष बाद ही सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का लाभ उठा सकता है क्योंकि उस संच का 7 साल का जीवन निर्धारित किया गया है।
कृषि फसलों को नुकसान के लिए बढ़ी दर पर सहायता
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा कि कृषि फसलों को हुए नुकसान के लिए जुलाई-2022 में संशोधित दर पर राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) से सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। यह सहायता प्रति हेक्टेयर बढ़ी मदद है। पहले दो हेक्टेयर की मर्यादा में मदद दी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर तीन हेक्टेयर तक कर दिया गया है। आपदा में तत्काल दी जाने वाली सहायता राशि 5,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए करने का निर्णय लिया गया है। सबसे खास बात यह है कि सभी प्रभावित इलाकों का पंचनामा महज डेढ़ महीने में पूरा कर लिया गया है। कोई भी बाढ़ प्रभावित मदद से वंचित नहीं रहेगा। जिला प्रशासन को सूचित किया गया है कि सहायता वितरण के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री एनडीआरएफ के नुकसान के मानदंड को बदलने के पक्ष में हैं। उनकी प्राथमिकता कृषि और किसान हैं।

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