सभी विकास कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाएं : प्रवीण रणदिवे द्वारा मांग अन्यथा किया जाएगा आंदोलन
मांजरी, अगस्त (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
मांजरी बुद्रुक में रेल्वे उड्डानपुल का निर्माण कार्य, मुख्य सड़क के कांक्रीटीकरण सहित विभिन्न विकास कार्य पिछले 3 से 4 वर्षों से बहुत धीमी गति से चल रहे हैं या यूं कहें कि कछुए की चाल रहे हैं, लेकिन इन विकास कार्यों में त्रुटिपूर्ण रवैये के कारण मांजरीवासियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। यातायात के लिए मांजरीवासियों को बहुत घूमकर आना-जाना पड़ता है, जिसके कारण नागरिकों को समय व ईंधन का अधिक भार सहन करना पड़ रहा है? आखिर कब हमें इस समस्या से छुटकारा मिलेगा? इस गंभीर समस्या से हमें राहत कब मिलेगी? हमें मूलभूत सुविधाओं के लिए आखिर कब तक जूझना पड़ेगा? यह नरक यातना कब तक हम मांजरीवासियों को सहन करने पड़ेगी? यह सवाल प्रशासन से समर्पण प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष प्रवीण रणदिवे ने पूछा है।
अधोसंरचना विकास की कमियों के संबंध में साथ-साथ वैकल्पिक सड़कों के निर्माण में प्रशासन को अवगत कराने के लिए समर्पण प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष प्रवीण रणदिवे ने पुणे महानगरपालिका के आयुक्त, जिला परिषद पुणे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सार्वजनिक बांधकाम दक्षिण विभाग के कार्यकारी अभियंता को निवेदन देकर नागरिकों को हो रही परेशानियों की व्यथा सुनाई व इसमें से जल्द से जल्द कोई उपाय निकालकर मांजरीवासियों को राहत देने के लिए कदम उठाने का अनुरोध प्रशासन से किया है।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से रेलवे ट्रैक मांजरी गांव के बीच से होकर गुजरता है साथ ही मुख्य सड़क का काम शुरू होने से पहले वैकल्पिक सड़क उपलब्ध न होने के कारण मांजरीवासियों को पुणे-नगर रोड और सोलापुर रोड को जाने के लिए करीब 4 से 5 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। समय और ईंधन की बर्बादी इसी प्रकार उपलब्ध सड़कों की दुर्दशा के कारण आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं। होने वाली शारीरिक चोट, आकस्मिक मृत्यु, रीढ़ की हड्डी में दर्द आदि मुद्दों का सामना करना पड़ता है, लेकिन गैंडा की खाल से ढके व बुनियादी ढांचे के काम में नामांकित ऐसे प्रशासन व संबंधित ठेकेदारों को इसका कुछ भी लेना-देना नहीं है, यह साबित होता है। नागरिकों का दैनिक सार्वजनिक जीवन आसान व संतोषजनक हो इसलिए मौजूदा भारतीय सुगमता अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है।
समर्पण प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष प्रवीण रणदिवे ने सार्वजनिक बांधकाम दक्षिण विभाग साथ ही पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के माध्यम से जारी विकास कार्यों में जो त्रुटियां हैं, इस बारे में हमारे प्रतिनिधि को बताते हुए कहा कि विभिन्न जगहों पर गड्ढे हैं, परंतु उस स्थान पर कोई सुरक्षा बोर्ड या रिफ्लेक्टर नहीं बिठाए गए है। मुख्य सड़क पर सड़क की बत्तियाँ बंद हैं, जिससे अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। 2 से 3 युवक इसके शिकार हो चुके हैं। रेलवे फ्लाईओवर के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण नहीं हो पाया है, साथ ही ऊबड़-खाबड़ रोड होने के कारण यहां पानी का तैलाब व कीचड़ भरी सड़क हो गई है।
इससे वाहनचालकों, स्थानीय निवासियों, पैदल चलनेवाले वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और स्कूली छात्रों को काफी परेशानी हो रही है। मूल स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार एवं समय पर कार्य नहीं हो रहा है। यह एक हकीकत है और कई जगहों पर यह कुछ लोगों का पक्ष बनाए रखने के लिए फुटपाथ या फिर सड़क की चौड़ाई एक समान से कम और ज्यादा हो गई है। इस तरह की आशंका क्षेत्र के निवासी व्यक्त कर रहे हैं। इस बारे में प्रशासन से स्पष्टीकरण की उम्मीद है। चौड़ीकरण में महावितरण के ट्रांसफार्मर्स, बिजली के खंभे, कम और उच्च दबाववाली बिजली लाइनें स्थानांतरण या भूमिगत करने का कार्य केवल दस्तावेज में है, लेकिन इन कामों में किसी तरह की गति दिखाई नहीं दे रही है।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए मुख्य सड़क के किनारे पर्यावरण के अनुकूल पेड़ लगाने का स्थान न रखने के कारण प्रशासन की असफलता दिखाई दे रही है। सड़क के डिवाइडर के बीच फाइकस गैर-पर्यावरण के अनुकूल विलायती वृक्षों का रोपण किसी भी प्रकार से नहीं किया जाना चाहिए। ड्रेनेज लाइन का काम भी गलत तरीके से किया गया है चूंकि सड़क का काम धीरे-धीरे किया जा रहा है, जिसका असर तैयार कांक्रीट सड़क के किनारों पर हो रहा है।
वैकल्पिक सड़क निर्माण के संबंध में जानकारी देते हुए आगे उन्होंने बताया कि द्राक्ष बागायतदार संघ (सोलापुर रोड) से मांजरी गांवठाण के बीच सड़क को चौड़ा किया जाए। भापकर मला में छोटे अंडर पास को चौड़ा किया जाए व वहां से निकलनेवाले गंदे पानी के लिए उचित रास्ता निर्माण किया जाए। म्हसोबा वस्ती (मांजरी-मुंढवा रोड) से घुले बस्ती के बीच वाली सड़क का कांक्रीटीकरण करना अपेक्षीत है। बीच सड़क पर रेलवे अंडरपास के चौड़ीकरण से वाहन चालकों को राहत मिलेगी। हालांकि यदि संभव हो तो सड़क के किनारे प्रॉपर्टीधारकों के समझौते से इस संबंध में उचित मार्ग निकाल जाना चाहिए। साडेसतरा नली से लोणकर बस्ती के बीच सड़क का चौड़ीकरण करना, साथ ही वहां रेलवे गेट पर रेलवे फ्लाईओवर बन जाए तो ट्रैफिक जाम की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। सोलापुर रोड (15 नंबर) से साडेसतरानली बीच नहर पर साथ ही भापकर मला से गोडबोले बस्ती के बीच वाली रंगीन धारा पर सड़क अच्छी तरह से बनाई गई तो आंतरिक यातायात तनाव कम होगा। घुले बस्ती में नहर के किनारे की संकरी सड़क की घेराबंदी (तार कम्पाउंड) की जाए। यहां अब तक 3 से 4 छोटे बच्चे नहर में डूबकर मर गए हैं। कुंजीर बस्ती साथ ही भापकर मला रोड पर वाहनचालकों के जीवन के लिए अनावश्यक जोखिम व कई अवैज्ञानिक स्पीड ब्रेकर तत्काल हटाए जाएं। वैज्ञानिक ढंग से आवश्यक स्थानों पर ही स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं। के. के. घुले विद्यालय चौक व घुले बस्ती नहर के चौराहों पर वैज्ञानिक तरीके से स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं। साथ ही सुरक्षा के लिहाज से हाई मास्ट लाइट और अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए। के. के. घुले विद्यालय चौक से केशवनगर के बीच सड़क का चौड़ीकरण होना जरूरी है।
हालांकि, अगले 15 दिनों में उपरोक्त मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाना चाहिए और उचित उपाय किए जाने चाहिए और नागरिकों के लिए किए जानेवाले उपाययोजना तत्काल घोषित करें, नहीं तो ग्रामीणों की ओर से जन आंदोलन किया जाएगा। यह चेतावनी प्रशासन को समर्पण प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष प्रवीण रणदिवे ने दी है।
पुणे महानगरपालिका के आयुक्त, जिला परिषद पुणे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सार्वजनिक बांधकाम दक्षिण विभाग के कार्यकारी अभियंता को समर्पण प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष प्रविण रणदिवे ने निवेदन दिया है। इस अवसर पर यहां राहुल खलसे, गणेश मरल, रमेश सूर्यवंशी व सिद्धेश्वर जाधव साथ में उपस्थित थे।
रेलवे फ्लाईओवर ब्रिज के नीचे एक छोटा सा अंडरपास तैयार किया जा रहा है, उसमें से छोटे वाहनचालकों को वहां से आने और जाने की (यातायात की) अनुमति प्राप्त हो, इस संदर्भ में रेल विभाग के साथ समन्वय करके नागरिकों को राहत दी जाए, जिसके कारण यातायात पर हो रहा गहरा प्रभाव कम होगा और वाहनचालकों का ईंधन व समय बच सकता है।

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