हड़पसर, सितंबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
आकांक्षी शौचालयों का निर्माण करते समय छोटे होने चाहिए, लेकिन संख्या में अधिक होने चाहिए। सवा दो करोड़ के ई-शौचालय की विफलता के बाद अब प्रत्येक 36 लाख के 11 शौचालयों का प्रस्ताव? यह सवाल प्रशासन से आम आदमी पार्टी के महाराष्ट्र राज्य प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने पूछा है।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों में 100 से अधिक आकांशी शौचालयों का निर्माण करना प्रस्तावित है। इस बारे में महाराष्ट्र नागरिक विकास अभियान संचालनालय ने सभी महानगरपालिका आयुक्त व नगरपंचायत, नगरपरिषद के मुख्य अधिकारी को इस बारे में प्रस्ताव भेजने के लिए बताया गया था। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत इसे अंशतः निधि दी जाएगी। इसके बारे में पुणे महानगरपालिका ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। आम आदमी पार्टी ने इसके बारे में जानकारी लेने पर स्वच्छ भारत अभियान मार्गदर्शक सूचना के अनुसार स्वच्छ व साफ सुथरे शौचालयों में पेपर नैपकिन, सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन व निपटान मशीन व स्नान की सुविधा उपलब्ध होना अपेक्षित है।
पिछले कुछ वर्षों से महिलाओं के शौचालयों का प्रश्न पुणे व मुंबई जैसे शहर में चर्चा में है, उस पर अभी तक कोई भी संतोषजनक स्थिति नहीं बनी है। बंद वेंडिंग मशीन व सुविधा के अलावा आसानी से ओपरेट व तकनीकी ज्ञान के बिना रखरखाव हो ऐसे शौचालयों का निर्माण किया जाना चाहिए। पहले शहरों में 15 महंगी ई शौचालय निर्माण किए गए, उसके लिए सवा दो करोड़ का खर्चा हुआ परंतु वो रखरखाव का अभाव व महिलाओं को फ्रेंडली न रहने से यानी सुलभता से उपयोग न होने से बंद हैं, इसलिए इस समय सरल आरामदायक शौचालयों का निर्माण करें, साथ ही सामूहिक शौचालयों के स्थान पर छोटे, लेकिन अधिक संख्या में शौचालय होने चाहिए। एक ही स्थान पर महिलाओं के लिए पांच व पुरुषों को पांच शौचालय एक साथ बिना बनवाए कम सीटें, लेकिन अधिक स्थानों पर शौचालय बनाए जाएं। स्वच्छ अभियान के तहत ऐसे शौचालय बस स्टॉप, पेट्रोल पंप, मेट्रो स्टेशन, बाजार, पर्यटन स्थल, दवाखाना आदि जगहों से पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थापित किए जाने चाहिए। यह अपेक्षा व्यक्त हो रही है।
इन शौचालयों के लिए निधि का उपयोग करते समय पुणे महानगर पालिका ने पांच पुरुष व पांच महिला टॉयलेट निर्माण करने के लिए 36 लाख का पूर्वगणना पत्रक तैयार किया है। वास्तव में, पुणे के निवासियों को हवाई अड्डों और पांच सितारा होटलों जैसे शौचालयों की उम्मीद नहीं है। महंगे और दिखावटी शौचालयों के बजाय नजदीकी दूरी पर स्वच्छ और आरामदायक शौचालय बनाए जाने चाहिए। प्रत्येक शौचालय पर 36 लाख 28 हजार की कीमत भी ज्यादा है। वर्तमान निर्माण दरों को ध्यान में रखते हुए, यह लागत बहुत अधिक है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने प्रशासन से मांग की है कि अगर ‘पिंक टॉयलेट’ की तर्ज पर महिलाओं के लिए विशेष शौचालय निर्माण किए गए तो यह ज्यादा फायदेमंद होंगे। इस पर महिला और स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों से चर्चा कर फैसला लिया जाए। महंगे, बहु-सीट वाले ब्लॉक के बजाय छोटे शौचालय बनाए जाने चाहिए। शौचालय भीड़-भाड़ वाली जगहों से पांच सौ मीटर की दूरी पर होने चाहिए। ‘पिंक टॉयलेट’ की तर्ज पर महिलाओं के लिए विशेष शौचालय निर्माण किए जाने चाहिए। पहले से निर्मित, मौजूदा शौचालय व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए। यह निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं, स्वास्थ्य, परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए।
आकांक्षी शौचालयों का निर्माण करते समय छोटे होने चाहिए, लेकिन संख्या में अधिक होने चाहिए। सवा दो करोड़ के ई-शौचालय की विफलता के बाद अब प्रत्येक 36 लाख के 11 शौचालयों का प्रस्ताव? यह सवाल प्रशासन से आम आदमी पार्टी के महाराष्ट्र राज्य प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने पूछा है।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों में 100 से अधिक आकांशी शौचालयों का निर्माण करना प्रस्तावित है। इस बारे में महाराष्ट्र नागरिक विकास अभियान संचालनालय ने सभी महानगरपालिका आयुक्त व नगरपंचायत, नगरपरिषद के मुख्य अधिकारी को इस बारे में प्रस्ताव भेजने के लिए बताया गया था। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत इसे अंशतः निधि दी जाएगी। इसके बारे में पुणे महानगरपालिका ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। आम आदमी पार्टी ने इसके बारे में जानकारी लेने पर स्वच्छ भारत अभियान मार्गदर्शक सूचना के अनुसार स्वच्छ व साफ सुथरे शौचालयों में पेपर नैपकिन, सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन व निपटान मशीन व स्नान की सुविधा उपलब्ध होना अपेक्षित है।
पिछले कुछ वर्षों से महिलाओं के शौचालयों का प्रश्न पुणे व मुंबई जैसे शहर में चर्चा में है, उस पर अभी तक कोई भी संतोषजनक स्थिति नहीं बनी है। बंद वेंडिंग मशीन व सुविधा के अलावा आसानी से ओपरेट व तकनीकी ज्ञान के बिना रखरखाव हो ऐसे शौचालयों का निर्माण किया जाना चाहिए। पहले शहरों में 15 महंगी ई शौचालय निर्माण किए गए, उसके लिए सवा दो करोड़ का खर्चा हुआ परंतु वो रखरखाव का अभाव व महिलाओं को फ्रेंडली न रहने से यानी सुलभता से उपयोग न होने से बंद हैं, इसलिए इस समय सरल आरामदायक शौचालयों का निर्माण करें, साथ ही सामूहिक शौचालयों के स्थान पर छोटे, लेकिन अधिक संख्या में शौचालय होने चाहिए। एक ही स्थान पर महिलाओं के लिए पांच व पुरुषों को पांच शौचालय एक साथ बिना बनवाए कम सीटें, लेकिन अधिक स्थानों पर शौचालय बनाए जाएं। स्वच्छ अभियान के तहत ऐसे शौचालय बस स्टॉप, पेट्रोल पंप, मेट्रो स्टेशन, बाजार, पर्यटन स्थल, दवाखाना आदि जगहों से पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थापित किए जाने चाहिए। यह अपेक्षा व्यक्त हो रही है।
इन शौचालयों के लिए निधि का उपयोग करते समय पुणे महानगर पालिका ने पांच पुरुष व पांच महिला टॉयलेट निर्माण करने के लिए 36 लाख का पूर्वगणना पत्रक तैयार किया है। वास्तव में, पुणे के निवासियों को हवाई अड्डों और पांच सितारा होटलों जैसे शौचालयों की उम्मीद नहीं है। महंगे और दिखावटी शौचालयों के बजाय नजदीकी दूरी पर स्वच्छ और आरामदायक शौचालय बनाए जाने चाहिए। प्रत्येक शौचालय पर 36 लाख 28 हजार की कीमत भी ज्यादा है। वर्तमान निर्माण दरों को ध्यान में रखते हुए, यह लागत बहुत अधिक है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने प्रशासन से मांग की है कि अगर ‘पिंक टॉयलेट’ की तर्ज पर महिलाओं के लिए विशेष शौचालय निर्माण किए गए तो यह ज्यादा फायदेमंद होंगे। इस पर महिला और स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों से चर्चा कर फैसला लिया जाए। महंगे, बहु-सीट वाले ब्लॉक के बजाय छोटे शौचालय बनाए जाने चाहिए। शौचालय भीड़-भाड़ वाली जगहों से पांच सौ मीटर की दूरी पर होने चाहिए। ‘पिंक टॉयलेट’ की तर्ज पर महिलाओं के लिए विशेष शौचालय निर्माण किए जाने चाहिए। पहले से निर्मित, मौजूदा शौचालय व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए। यह निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं, स्वास्थ्य, परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए।

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