केंद्र ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से टूटे हुए चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय की अधिसूचना में कहा गया है कि टूटे चावल निर्यात नीति में संशोधन किया गया है। यह फैसला आज से प्रभावी हो गया है। विदेश व्यापार नीति 2015-2020 के तहत परवर्ती व्यवस्था के प्रावधान अधिसूचना पर लागू नहीं होंगे।
सरकार ने घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए सेला चावल को छोड़कर गैर-बासमती चावल पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया है। राजस्व विभाग की एक अधिसूचना में कहा गया है कि धान या कच्चे और ब्राउन राइस पर 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लगाया गया है। अर्द्ध नरम या पूर्ण रूप से नरम चावल और पॉलिश वाले चावल के निर्यात पर भी 20 प्रतिशत सीमा शुल्क लगेगा। खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा है कि वर्ष 2021-22 में टूटे चावल का कुल निर्यात बढ़कर 38 लाख 90 हजार मीट्रिक टन हो गया, पिछले चार वर्षों में यह दो सौ प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में श्री पांडे ने कहा कि वर्ष 2018-19 में टूटे चावल का कुल निर्यात 12 लाख 21 हजार मीट्रिक टन हुआ था।

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