वर्ष 2021-22 में शहरी स्थानीय निकायों के लिए अब तक कुल 4,761.8 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया जा चुका है
जारी किए गए अनुदान में 10 लाख से अधिक शहरों/शहरी समूहों (एमपीसी/यूए) में आंध्र प्रदेश राज्य में विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम, छत्तीसगढ़ राज्य में दुर्ग भिलाईनगर और रायपुर, महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद, ग्रेटर मुंबई, नागपुर नासिक, पुणे और वसई विरार शहर और उत्तर प्रदेश राज्य में आगरा, इलाहाबाद, गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ, मेरठ और वाराणसी शामिल है।
15वें वित्त आयोग ने 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए अपनी रिपोर्ट में शहरी स्थानीय निकायों को दो श्रेणियों में बांटा है- (ए) 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरी समुदायों/शहरों (दिल्ली और श्रीनगर को छोड़कर) और (बी) दस लाख से कम आबादी वाले अन्य शहर और कस्बे (नॉन मिलियन प्लस सिटीज)। 15वें वित्त आयोग ने इन शहरों के लिए अलग से अनुदान देने की सिफारिश की है। दस लाख से अधिक शहरों/शहरी समूहों (एमपीसी/यूए) के लिए आयोग द्वारा अनुशंसित कुल अनुदानों में से, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन घटक के लिए 2/3 से अधिक की सिफारिश की जाती है और शेष 1/3 को परिवेशी वायु गुणवत्ता के लिए आवंटित किया जाता है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 में राज्यों को जारी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) अनुदान की राज्यवार राशि इस प्रकार है ;
क्रं संख्या | राज्य का नाम | वित्त वर्ष 2022-23 में जारी यूएलबी अनुदान की राशि (करोड़ रुपये में) |
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1 | आंध्र प्रदेश | 293.75 |
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2 | अरुणाचल प्रदेश | 0.00 |
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3 | असम | 0.00 |
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4 | बिहार | 7.35 |
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5 | छत्तीसगढ़ | 307.20 |
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6 | गोवा | 0.00 |
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7 | गुजरात | 20.21 |
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8 | हरियाणा | 77.40 |
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9 | हिमाचल प्रदेश | 78.00 |
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10 | झारखंड | 11.94 |
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11 | कर्नाटक | 7.35 |
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12 | केरल | 256.00 |
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13 | मध्य प्रदेश | 314.10 |
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14 | महाराष्ट्र | 840.34 |
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15 | मणिपुर | 42.50 |
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16 | मेघालय | 44.00 |
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17 | मिजोरम | 17.00 |
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18 | नगालैंड | 0.00 |
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19 | ओडिशा | 0.00 |
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20 | पंजाब | 0.00 |
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21 | राजस्थान | 11.94 |
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22 | सिक्किम | 7.50 |
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23 | तमिलनाडु | 14.70 |
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24 | तेलांगना | 331.40 |
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25 | त्रिपुरा | 21.00 |
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26 | उत्तर प्रदेश | 1988.07 |
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27 | उत्तराखंड | 62.70 |
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28 | पश्चिम बंगाल | 7.35 |
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| कुल | 4761.80 |

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