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आतंकी समूहों के वित्तीय स्रोतों पर अंकुश लगाना जरूरी : विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर

मुंबई, अक्टूबर (महासंवाद)
आतंकवादी समूहों के वित्तीय स्रोतों तक पहुंचना और उन पर अंकुश लगाना आवश्यक है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सभी देशों के सदस्यों से इसके लिए सहयोग करने की अपील की। वह मुंबई के ताज होटल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद निरोधी समिति की बैठक में बोल रहे थे।
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने 26 नवंबर, 2008 (26/11) को मुंबई में हुए भीषण आतंकवादी हमले में अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष और गैबॉन गणराज्य के विदेश मंत्री माइकल मौस्सा अडामो मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन आतंकवाद निरोधी समिति की अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत श्रीमती रुचिरा कंबोज द्वारा किया गया।
भारत 2022 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी समिति का अध्यक्ष है। समिति में संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्य देशों के राजनयिक शामिल हैं। भारत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद निरोधी समिति की दो दिवसीय बैठक हुई। यह बैठक मुंबई के ताज होटल में हुई। बैठक का आयोजन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी समिति द्वारा ‘आतंकवाद के  वित्तपोषण का मुकाबला’ पर   एक अनौपचारिक चर्चा करने के लिए किया गया था। स्थानीय  और क्षेत्रीय स्तर के उपायों पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। आतंकवाद और उसके प्रायोजकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए। आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकाने, प्रशिक्षण के मैदानों को खोजकर उनके राजनीतिक समर्थन, वित्तीय और वैचारिक संरक्षण को नष्ट करना आवश्यक है।
इन वर्षों में, आतंकवादी समूहों ने अपनी आय के स्रोतों में विविधता लाई है। उन्होंने नई तकनीकों का उपयोग बढ़ाया है। वित्तपोषण के लिए उपलब्ध गुमनामी का लाभ उठाते हुए, धन उगाहने ने आभासी मुद्राओं का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

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