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खानदान का चिराग लड़का ही क्यों, लड़की क्यों नहीं...?

लेखिका : डॉ.शुभांगी गादेगांवकर, मुंबई

संविधान ने महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता का अधिकार दिया है, लेकिन क्या वाकई हर जगह पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता है? एक महिला को वही करना पड़ता है जो पुरुष कहता है। अगर उसने ऐसा नहीं किया तो उसका जीवन असहनीय हो जाता है। उसे घर से बाहर निकाल दिया जाता है। उसे अपना सम्मान बचाए रखने के लिए शांत रहने की जरूरत है।
कुछ बस ऐसे ही कहते हैं, यह एक पुरुष प्रधान संस्कृति है यानी स्त्री और पुरुष की समानता को पूरी तरह से सभी ने स्वीकार नहीं किया है। यह उसी का संकेत है। लड़के के जन्म का जश्न मनाया जाता है, लेकिन एक लड़की के जन्म होने पर उसके जन्म का जश्न मनानेवाले अभिभावक बहुत ही कम हैं। लड़का होने के लिए पांच-पांच, छह-छह लड़कियों की लाइन लग जाती है। आखिर यह इंतजार क्यों? तो यह एक लड़का हो इसलिए, खानदान को चिराग मिले? एक लड़के की उम्मीद एक महिला को कितना दर्द देती है। एक माँ के रूप में वह यह सब दर्द सहती है। समाज में हमारा बहुत सम्मान होना चाहिए। आपका परिवार सुखी और समृद्ध रहे इसलिए एक महिला चुपचाप रहकर लड़के की उम्मीद से बार-बार गर्भधारण का सामना करती है। हमें एक ऐसा बेटा चाहिए जो हमारा सहारा बने। वो लड़का जो सीखकर अच्छा काम करनेवाला हो। बेटा पैदा होगा तो वह तुम्हारा ख्याल रखेगा। आपका नाम आगे लेकर चलेगा। वह आपके बुढ़ापे में एक मजबूत सहारा होगा। यह सरल गुप्त आशा प्रत्येक व्यक्ति के भीतर निहित रहती है। कुछ अपवाद भी होंगे। कन्या भ्रूण हत्या अक्सर की जाती है। लड़के की उम्मीद लड़की के जन्म में बाधक बन जाती है। लड़के को जन्म देने की इच्छा मन में रखनेवाले व्यक्तियों को आज भी यह समझ में नहीं आया है कि एक लड़की ही लड़के को जन्म देती है। अगर यह लड़की ही नहीं होगी तो लड़के का जन्म कैसे होगा?
आज लड़का होने की उम्मीद कुछ हद तक टूट चुकी है। आज की पीढ़ी शिक्षित है। इस भेदभाव को रोकने की जरूरत है। कुछ लोगों ने इसे आदर्श मानकर कदम उठाया है। केवल एक बेटी होने के बाद उन्हें खानदान बढ़ाना रोकना चाहिए। वे बेटी को अपने परिवार का सहारा मानते हैं। मराठी में एक कहावत है ‘मुलगी शिकली प्रगती झाली’ इस कहावत के अनुसार लड़की को पढ़ाकर और समझदार बनाकर, अच्छी नौकरी देकर आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। आज ये लड़कियां भी ससुर और मायके दोनों में अपना फर्ज निभा रही हैं। वे न केवल परिवार का प्रतिनिधित्व करती हैं बल्कि वे समाज और देश की शान हैं। आज द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति होने का गौरव प्राप्त है। बेशक हम यह कह सकते हैं कि लड़का हो या लड़की इस खानदान के चिराग को सभी को अखंड रखना चाहिए।

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