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दीपक चमकने दो...!

श्री सुधीर उद्धवराव मेथेकर
(वरिष्ठ पत्रकार)
दुनिया के सामने महामारी का संकट अब लगभग टल गया है। उसमें देखा जाए तो अपने भारत देश की खतरे की स्थिति नियंत्रण में आ गई है, इसलिए यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि सरकार ने पाबंदियों में ढील दी है। सभी त्यौहारों, सार्वजनिक उत्सवों को मनाने पर प्रतिबंध हटा दिया गया है। भारत एक सांस्कृतिक/ उत्सवपूर्ण देश है, इसलिए ये त्यौहार और उत्सव संकट को हराकर मनाए जाते हैं। इस वर्ष अब तक सभी धर्मों के पर्व-त्यौहार हर्षोल्लास और उत्सव के माहौल में संपन्न हुए हैं और आशा है कि भविष्य में भी होंगे। भारतीय संस्कृति में साल भर विभिन्न त्यौहारों का एक अनूठा महत्व है। दिवाली एक ऐसा त्यौहार है जो सभी को पसंद है।
विक्रम संवत्सर का नया साल शुरू हो गया है। इसी दिन से दीपोत्सव शुरू होता है। दीया जलते ही अँधेरा दूर हो जाता है और परिसर प्रकाशमान हो जाता है। इसी प्रकार यदि हममें प्रेम की ज्योति प्रज्ज्वलित हो तो हमारे मन की अव्यवस्था दूर हो जाती है और त्याग और समर्पण की भावना प्रबल हो जाती है। यह तभी संभव है जब हमारा हृदय शुद्ध हो। हृदय की शुद्धि के लिए विवेक और सामाजिक जागरूकता जरूरी है।
अगर हमारी विवेकवृत्ति जागती रहे, मन की पवित्रता से आत्मा प्रकाश के आसपास के कालिख का आवरण हट जाएगा और आत्मा का प्रकाश तेज हो जाएगा।
आइए एक अच्छे उद्देश्य से दीप जलाएं। द्वेष, ईर्ष्या, अज्ञान, अवसाद को दूर कर मन के द्वार खोलने चाहिए। तभी हृदय में स्नेह की ज्योति जगमगा सकती है। अगर प्यार और सच्चाई का दीया हमेशा जलता रहे तो निश्चय ही वसुबरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, बलि प्रतिपदा, पाड़वा, भाईदूज के माध्यम से उत्साह पैदा करने से खुशी  दोगुनी हो जाएगी।
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं व भविष्य में विश्व किसी भी महामारी से मुक्त रहे, आइए इस अवसर पर सभी के लिए सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबे जीवन की प्रार्थना करें!

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