मुख्य समाचार

6/recent/ticker-posts

आम आदमी पार्टी द्वारा जिला परिषद स्कूलों को बंद करने की राज्य सरकार की रणनीति का कड़ा विरोध

जिला परिषद कार्यालय के बाहर आम आदमी पार्टी द्वारा किया गया आंदोलन : मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, सीईओ व जिला शिक्षण अधिकारी को दिया निवेदन

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार, सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह 1 किमी के भीतर प्राथमिक विद्यालय और 3 किमी के भीतर माध्यमिक विद्यालय प्रदान करे। नई शिक्षा नीति के अनुसार, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा भी शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आएगी और इसलिए सरकार को स्कूलों के लिए और अधिक बुनियादी ढांचा प्रदान करना चाहिए।

हड़पसर, अक्टूबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)

आम आदमी पार्टी की ओर से जिला परिषद स्कूलों को बंद करने की रणनीति का कड़ा विरोध किया गया है। झेडपी स्कूल को बंद करने की साजिश के मंसूबों को हम पूरा नहीं होने देंगे। दिल्ली में आम आदमी पार्टी स्कूलों का नए से निर्माण कर रही है तो दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार स्कूल बंद कर रही है। दिल्ली में शिक्षा मुफ्त, महाराष्ट्र में शिक्षा खरीदकर? यह सवाल महाराष्ट्र राज्य सरकार से आम आदमी पार्टी ने किया है। 
पुणे में स्थित जिला परिषद के कार्यालय के बाहर आम आदमी पार्टी की ओर से आंदोलन किया गया। मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री, सीईओ व जिला शिक्षण अधिकारी को निवेदन भी दिया गया। 
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए आम आदमी पार्टी पुणे जिला के अध्यक्ष मुकुंद किर्दत ने बताया कि 20 से कम उपस्थित विद्यार्थी संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की नीति का विरोध करनेवाले निवेदन पूरे राज्य में मुख्यमंत्री व शिक्षणमंत्री को दिए गए हैं। 0 से 20 छात्र संख्या वाले राज्य के स्कूल के बारे में जानकारी जमा की जा रही है और उनका समायोजन अर्थात राज्य सरकार एक बार फिर वो स्कूलों को बंद करने की नीति लागू करेगी, ऐसा खुद शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने कहा है। आम आदमी पार्टी ने अपने बयान में कहा है कि इसका सबसे बड़ा और दीर्घकालीन असर ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित, कमजोर और आदिवासी वर्ग और मुख्य रूप से लड़कियों पर पड़ेगा। 2017 में, भाजपा सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने 10 से कम अंकवाले स्कूलों को बंद करने के संबंध में नवंबर 2017 में एक परिपत्र जारी किया था। सरकार इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कह रही है कि निम्न गुणवत्ता वाले स्कूलों में छात्रों की संख्या घट रही है। साथ ही, ऐसे स्कूलों में छात्रों का समूहीकरण करना मुश्किल हो जाता है, इसलिए अकादमिक और सामाजिक रूप से बच्चों के लिए पास के अच्छे स्कूल में समायोजन अधिक उपयुक्त है। आप ने महाराष्ट्र में 1314 स्कूलों को समायोजित करने के इस आदेश के खिलाफ कानूनी आपत्ति दर्ज की थी और बाल अधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया था। आप कार्यकर्ताओं ने दिसंबर 2017 में निरीक्षण किया था, सरकार के दावों और हकीकत में भारी अंतर पाया गया।
आगे उन्होंने कहा कि इसलिए आम आदमी पार्टी ने महाराष्ट्र में 1300 स्कूलों को बंद करने के फैसले के खिलाफ तत्कालीन मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को लिखित आपत्ति दर्ज कराई। आम आदमी पार्टी की आपत्ति के बाद पिछले आदेश के अनुसार 1314 में से 884 स्कूलों का समायोजन रोक दिया गया है। उसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री आशीष शेलार ने मानसून सत्र के दौरान इस संबंध में जवाब दिया था कि किसी स्कूल को बंद करने की सरकार की भूमिका नहीं है, लेकिन सत्यशोधन समिति इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करेगी। तीन साल पहले राज्य के 13544 स्कूलों में 20 से कम छात्र हैं, उन्होंने ऐसी जानकारी दी। अब पिछली सरकार से एक कदम आगे बढ़कर आपने 20 से कम नामांकनवाले स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में स्कूलों से जानकारी एकत्र करने के आदेश दिए गए हैं, इसलिए फिर से वही समाजीकरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने के लिए 20 से कम छात्र वाले स्कूलों को समायोजित करेंगे, ऐसा बताया गया है। यह स्पष्ट है कि वास्तव में लागत कम करने के लिए एक समायोजन नीति लागू की जा रही है। इस प्रकार की  नीति से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था चरमरा सकती है। चूंकि गुणवत्ता, बच्चों के समाजीकरण आदि के कारण दिए गए हैं, इसलिए इसका ठीक से अध्ययन करना आवश्यक है। साथ ही अधिकारियों का कहना है कि इनमें से प्रत्येक स्कूल पर 15 लाख खर्च किए जा रहे हैं और वे इसे वहन नहीं कर सकते। कानून के अनुसार वंचित और कमजोर वर्ग के माता-पिता, झुग्गी-झोपड़ी के माता-पिता को इन सरकारी स्कूलों का बड़ा समर्थन है।
आम आदमी पार्टी पुणे जिला अध्यक्ष मुकुंद किर्दत ने अंत में कहा कि बच्चों के शैक्षिक अधिकार को पूरा करने के लिए आस-पास के क्षेत्रों में स्कूल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए कि किसी के साथ अन्याय न हो और एक छात्र भी शिक्षा से वंचित न रहे। दिल्ली में आप सरकार की तर्ज पर इसके लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान की जरूरत है।  स्कूल बंद करने की इस नीति का आम आदमी पार्टी विरोध कर रही है। यदि इस नीति को जबरन थोपने या लागू करने का प्रयास किया गया तो आम आदमी पार्टी अदालत और सड़क पर उतरकर आंदोलन के माध्यम से इस नीति का तीव्र विरोध करेगी। 
  जिला परिषद स्कूलों को बंद करने की रणनीति का कड़ा विरोध करने के लिए जिला परिषद के कार्यालय बाहर आम आदमी पार्टी की ओर से किए गए आंदोलन में आप पुणे जिला अध्यक्ष मुकुंद किर्दत, आम आदमी पार्टी महिला संघटक सीमा गुट्टे, आम आदमी पार्टी हड़पसर की अध्यक्षा ललिता गायकवाड, निलेश वांजले, सुरेखा भोसले, सतीश यादव, अनिल कोंढालकर, सुनीता सेरखाने, शंकर थोरात, सूर्यकांत कांबले, तुकाराम शिंदे, डॉ. किशोर शहाणे, दिलीप गायकवाड, अमोल काले, अक्षय शिंदे, साहिल जवलेकर, श्रीकांत चांदणे, रवि लाटे, उल्हास जाधव, तानाजी सेरखाने, राजेंद्र सालवे, गंगाराम खरात, अजिंक्य जगदाले, मनोज माने, व्यंकट आडरराव, रामभाऊ इंगले, गजानन भोसले, संजय कटारनवरे, शिवाजी डोलारे, संदेश दिवेकर, अजिंक्य शेडगे, प्रशांत कांबले, राकेश कांबले आदि उपस्थित थे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ