केंद्रीय बजट : 2023-24 की पूर्व बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण मांगें
नई दिल्ली, नवंबर (महासंवाद)
केंद्र सरकार ने राज्य को पूंजी निवेश के लिए वर्ष 2021-22 के लिए 15 हजार करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्रदान की थी। इसे बढ़ाया गया है और अब चालू वित्त वर्ष में 1 लाख करोड़ रुपये की विशेष सहायता मिली है। महाराष्ट्र सरकार ने करीब 3 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं का प्रस्ताव पेश किया है, जिसे मंजूरी मिलनी चाहिए। इससे राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह मांग राज्य के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की है।
मानेकशॉ सेंटर में केंद्रीय वित्तमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय अर्थसंकल्प : 2023-24 की पूर्व बैठक आयोजित की गई थी, उस बैठक में श्री फडणवीस बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री डॉ. भागवत कराड, पंकज चौधरी के साथ विभिन्न राज्यों के वित्तमंत्री साथ ही वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
श्री फडणवीस ने आगे कहा कि महाराष्ट्र को वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का मुआवजा मिला है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के साथ-साथ वर्ष 2022-23 की प्रथम तिमाही का मौसमी मुआवजा प्राप्त हो चुका है। इसके लिए केंद्र को उन्होंने धन्यवाद दिया। उन्होंने बैठक में बताया कि शेष अवधि के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से प्रमाणीकरण की प्रक्रिया चल रही है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना की राज्य में बहुत अच्छी शुरुआत हुई है। श्री फडणवीस ने मांग की कि आगामी बजट में लॉजिस्टिक क्षेत्र के लिए वित्तीय रियायतें दी जानी चाहिए। केंद्रीय भविष्य निधि में योगदान के लिए वित्तीय सहायता से सूक्ष्म, लघु, मध्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे। श्री फडणवीस ने लौह अयस्क पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने इस संबंध में पहले मांग पत्र भेजा था। इससे प्रचुर मात्रा में खनिज सम्पदावाले कोकण जैसे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बहुत लाभ होगा। इससे खनन और संबद्ध उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए बैंकों से कर्ज नहीं मिल रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार के स्तर पर योजना तैयार की जाए। महाराष्ट्र के साथ और अन्य राज्यों को भी इसका फायदा होगा।
केंद्र सरकार ने राज्य को पूंजी निवेश के लिए वर्ष 2021-22 के लिए 15 हजार करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्रदान की थी। इसे बढ़ाया गया है और अब चालू वित्त वर्ष में 1 लाख करोड़ रुपये की विशेष सहायता मिली है। महाराष्ट्र सरकार ने करीब 3 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं का प्रस्ताव पेश किया है, जिसे मंजूरी मिलनी चाहिए। इससे राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह मांग राज्य के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की है।
मानेकशॉ सेंटर में केंद्रीय वित्तमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय अर्थसंकल्प : 2023-24 की पूर्व बैठक आयोजित की गई थी, उस बैठक में श्री फडणवीस बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री डॉ. भागवत कराड, पंकज चौधरी के साथ विभिन्न राज्यों के वित्तमंत्री साथ ही वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
श्री फडणवीस ने आगे कहा कि महाराष्ट्र को वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का मुआवजा मिला है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के साथ-साथ वर्ष 2022-23 की प्रथम तिमाही का मौसमी मुआवजा प्राप्त हो चुका है। इसके लिए केंद्र को उन्होंने धन्यवाद दिया। उन्होंने बैठक में बताया कि शेष अवधि के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से प्रमाणीकरण की प्रक्रिया चल रही है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना की राज्य में बहुत अच्छी शुरुआत हुई है। श्री फडणवीस ने मांग की कि आगामी बजट में लॉजिस्टिक क्षेत्र के लिए वित्तीय रियायतें दी जानी चाहिए। केंद्रीय भविष्य निधि में योगदान के लिए वित्तीय सहायता से सूक्ष्म, लघु, मध्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे। श्री फडणवीस ने लौह अयस्क पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने इस संबंध में पहले मांग पत्र भेजा था। इससे प्रचुर मात्रा में खनिज सम्पदावाले कोकण जैसे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बहुत लाभ होगा। इससे खनन और संबद्ध उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए बैंकों से कर्ज नहीं मिल रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार के स्तर पर योजना तैयार की जाए। महाराष्ट्र के साथ और अन्य राज्यों को भी इसका फायदा होगा।
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए नैशनल डिटरमाईंड कॉन्ट्रिब्युशन (एनडीसी) को मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद देते हुए श्री फडणवीस ने विनती करते हुए कहा कि आगामी बजट में स्वच्छ ऊर्जा उद्योगों के लिए कुछ कर रियायतें और प्रोत्साहन योजनाएं शामिल की जानी चाहिए। आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने स्थानीय निकायों के लिए 1 हजार 444 करोड़ रुपए की कार्यप्रदर्शन निधि (परफॉर्मन्स ग्रांटस) वित्तीय वर्ष 2018-19 और वर्ष 2019-20 के लिए सिफारिश की है। इसके अनुसार पंचायत राज मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 1208.72 करोड़ रुपये की अनुशंसा की थी। 14वें वित्त आयोग की निधि राज्य को दी जाए। नई 8170 आंगनवाड़ियां स्वीकृत की जाएं। पोषण कार्यक्रम के तहत दी गई दरें वर्ष 2017 की हैं, इसलिए इसे बढ़ाया जाए। केंद्र सरकार की न्यूनतम आधार मूल्य (एमएसपी) खरीद योजना की सीमा को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 348.83 करोड़ की मांग
शिक्षा का अधिकार (राइट टू एजूकेशन) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु 348.83 करोड़ की व्यवस्था की जाए। समाज शिक्षा अभियान में ढांचागत विकास के लिए राशि आवंटित की जाए। नए राष्ट्रीय बायोगैस और जैविक खाद (ऑर्गेनिक मैन्यूअर) कार्यक्रम के लिए 46 करोड़ रुपये की मांग की। महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान के लिए धन 4 किश्तों के बजाय 2 किश्तों में वितरित किया जाना चाहिए, इससे योजना का अधिक प्रभावी कार्यान्वयन हो सकेगा।
राज्य में 6 किलो के संवर्धन के लिए 500 करोड़ की मांग
महाराष्ट्र राज्य में 6 किलो के संवर्धन के लिए 500 करोड़ रुपए दिए जाएं। इसमें रायगढ़, तोरणा, शिवनेरी (पुणे जिला), सुधागढ़ (रायगढ़), विजयदूर्ग और सिंधुदूर्ग (सिंधुदूर्ग जिला) किलों का समावेश है। स्वदेश 2.0 के तहत पर्यटन सुविधाएं सृजित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। इसमें निवती (सिंधुदूर्ग), अजिंठा (औरंगाबाद), ताडोबा (चंद्रपूर), गोसिखूर्द धरण (भंडारा), टिपेश्वर (यवतमाल), शिवसृष्टि (पुणे) का समावेश है।
कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों से निपटने के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कार्यालयों में बांस के फर्नीचर और अन्य वन संबंधी उत्पादों की खरीद में 25 प्रतिशत प्रधानता दी जानी चाहिए।
कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रक्रिया, पैकेजिंग आदि को शामिल किया जाना चाहिए। आदिवासियों और वनवासियों के लिए छात्रवृत्ति और कौशल विकास कार्यक्रमों की योजना बनाई जानी चाहिए। बाघ संरक्षण के लिए योगदान 100 प्रतिशत कर मुक्त होना चाहिए। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत तेंदूपत्ता बीननेवालों, वन संसाधन संग्राहकों का बीमा कराया जाए।
वर्ष 2000 से 2022 की अवधि में राज्य को केंद्रीय सड़क कोष से 7316.45 करोड़ रुपये मिले और राज्य ने 8295.71 करोड़ रुपये खर्च किए। शेष 979.26 करोड़ रुपये राज्य को लौटाए जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को 2028-29 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें महाराष्ट्र अपना पर्याप्त और मजबूत योगदान देगा।
आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 348.83 करोड़ की मांग
शिक्षा का अधिकार (राइट टू एजूकेशन) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु 348.83 करोड़ की व्यवस्था की जाए। समाज शिक्षा अभियान में ढांचागत विकास के लिए राशि आवंटित की जाए। नए राष्ट्रीय बायोगैस और जैविक खाद (ऑर्गेनिक मैन्यूअर) कार्यक्रम के लिए 46 करोड़ रुपये की मांग की। महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान के लिए धन 4 किश्तों के बजाय 2 किश्तों में वितरित किया जाना चाहिए, इससे योजना का अधिक प्रभावी कार्यान्वयन हो सकेगा।
राज्य में 6 किलो के संवर्धन के लिए 500 करोड़ की मांग
महाराष्ट्र राज्य में 6 किलो के संवर्धन के लिए 500 करोड़ रुपए दिए जाएं। इसमें रायगढ़, तोरणा, शिवनेरी (पुणे जिला), सुधागढ़ (रायगढ़), विजयदूर्ग और सिंधुदूर्ग (सिंधुदूर्ग जिला) किलों का समावेश है। स्वदेश 2.0 के तहत पर्यटन सुविधाएं सृजित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। इसमें निवती (सिंधुदूर्ग), अजिंठा (औरंगाबाद), ताडोबा (चंद्रपूर), गोसिखूर्द धरण (भंडारा), टिपेश्वर (यवतमाल), शिवसृष्टि (पुणे) का समावेश है।
कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों से निपटने के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कार्यालयों में बांस के फर्नीचर और अन्य वन संबंधी उत्पादों की खरीद में 25 प्रतिशत प्रधानता दी जानी चाहिए।
कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रक्रिया, पैकेजिंग आदि को शामिल किया जाना चाहिए। आदिवासियों और वनवासियों के लिए छात्रवृत्ति और कौशल विकास कार्यक्रमों की योजना बनाई जानी चाहिए। बाघ संरक्षण के लिए योगदान 100 प्रतिशत कर मुक्त होना चाहिए। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत तेंदूपत्ता बीननेवालों, वन संसाधन संग्राहकों का बीमा कराया जाए।
वर्ष 2000 से 2022 की अवधि में राज्य को केंद्रीय सड़क कोष से 7316.45 करोड़ रुपये मिले और राज्य ने 8295.71 करोड़ रुपये खर्च किए। शेष 979.26 करोड़ रुपये राज्य को लौटाए जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को 2028-29 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें महाराष्ट्र अपना पर्याप्त और मजबूत योगदान देगा।


0 टिप्पणियाँ