पहली से दसवीं कक्षा के छात्रों के सुविधाजनक प्रवेश के लिए सरकार का फैसला
मुंबई, दिसंबर (महासंवाद)
राज्य में किसी भी पाठ्यक्रम के प्राथमिक या माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 10 वीं में प्रवेश के लिए आवेदन करनेवाले दूसरे स्कूल के छात्र अब आसानी से प्रवेश ले सकेंगे। स्कूल स्थानांतरण प्रमाणपत्र न होने पर (टीसी) (Transfer Certificate) ऐसे छात्रों को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यह अपील स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने की है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम में स्कूल में दाखिला न होने पर छात्र का उसके आयु के अनुसार कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा और एक प्रावधान है कि ऐसे प्रवेश के लिए आयु का प्रमाण स्वीकार्य माना जाएगा। तदनुसार, जन्म प्रमाणपत्र की तारीख को प्रमाण के रूप में लिया जाना चाहिए और छात्रों को उनकी आयु के अनुसार कक्षा में प्रवेश दिया जाना चाहिए। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।
सरकार के इस निर्णय के अनुसार राज्य के किसी भी सरकारी / महानगरपालिका/ नगरपालिका/ निजी अनुदानित/ किसी भी प्रबंधन से स्वयं अर्थसहायता तत्त्व पर चलाई जानेवाली, साथ ही कोई भारतीय या विदेशी पाठ्यक्रम या मंडल से संलग्न रहनेवाली प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पहली से आठवीं तक, साथ ही माध्यमिक विद्यालय में कक्षा नौवीं और दसवीं कक्षा में एक अन्य स्कूल का छात्र दाखिले की मांग कर रहा है ऐसे छात्र के पास स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट का अभाव है (टीसी) (Transfer Certificate) तो प्रवेश से इंकार नहीं किया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया गया है।
छात्र प्रवेश से वंचित नहीं रहेगा, साथ ही शिक्षा बाधित होने के कारण छात्र स्कूल से बाहर न हों इसकी जागरूकता संबंधित स्कूल प्रमुखों/प्राचार्यों को करनी होगी। यदि ऐसा छात्र वंचित है तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध/प्राचार्य के विरुद्ध नियमानुसार/कानून के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई छात्र सरकार के इस निर्णय के अनुसार किसी नए स्कूल में प्रवेश लेता है तो नया विद्यालय पुराने विद्यालय से छात्र की जानकारी सरल पोर्टल से प्राप्त करने का अनुरोध करेगा और पुराना स्कूल सात दिनों के भीतर अनुरोध स्वीकार कर लेगा। यदि विद्यालय ऐसे अनुरोध को स्वीकार नहीं करता है तो संबंधित केन्द्राध्यक्ष अपने स्तर पर ऐसे अनुरोध को स्वीकार करेगा, सरकार के इस फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है।
कोविड के प्रकोप के बाद किन्हीं कारणों से एक छात्र का उसके निजी स्कूल से स्कूल स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) (Transfer Certificate) या स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र (Leaving Certificate) नहीं दिया गया है तो ऐसे छात्र सरकारी या अनुदानित स्कूल में इस प्रमाण पत्र के बिना विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाता है। इससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो और उनका शैक्षणिक वर्ष बर्बाद नहीं होना चाहिए, इस उद्देश्य के लिए ऐसे छात्रों को आसानी से प्रवेश प्रदान करके देने के लिए यह फैसला लिया गया है। यह मंत्री श्री केसरकर ने स्पष्ट किया है।
राज्य में किसी भी पाठ्यक्रम के प्राथमिक या माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 10 वीं में प्रवेश के लिए आवेदन करनेवाले दूसरे स्कूल के छात्र अब आसानी से प्रवेश ले सकेंगे। स्कूल स्थानांतरण प्रमाणपत्र न होने पर (टीसी) (Transfer Certificate) ऐसे छात्रों को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यह अपील स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने की है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम में स्कूल में दाखिला न होने पर छात्र का उसके आयु के अनुसार कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा और एक प्रावधान है कि ऐसे प्रवेश के लिए आयु का प्रमाण स्वीकार्य माना जाएगा। तदनुसार, जन्म प्रमाणपत्र की तारीख को प्रमाण के रूप में लिया जाना चाहिए और छात्रों को उनकी आयु के अनुसार कक्षा में प्रवेश दिया जाना चाहिए। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।
सरकार के इस निर्णय के अनुसार राज्य के किसी भी सरकारी / महानगरपालिका/ नगरपालिका/ निजी अनुदानित/ किसी भी प्रबंधन से स्वयं अर्थसहायता तत्त्व पर चलाई जानेवाली, साथ ही कोई भारतीय या विदेशी पाठ्यक्रम या मंडल से संलग्न रहनेवाली प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पहली से आठवीं तक, साथ ही माध्यमिक विद्यालय में कक्षा नौवीं और दसवीं कक्षा में एक अन्य स्कूल का छात्र दाखिले की मांग कर रहा है ऐसे छात्र के पास स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट का अभाव है (टीसी) (Transfer Certificate) तो प्रवेश से इंकार नहीं किया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया गया है।
छात्र प्रवेश से वंचित नहीं रहेगा, साथ ही शिक्षा बाधित होने के कारण छात्र स्कूल से बाहर न हों इसकी जागरूकता संबंधित स्कूल प्रमुखों/प्राचार्यों को करनी होगी। यदि ऐसा छात्र वंचित है तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध/प्राचार्य के विरुद्ध नियमानुसार/कानून के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई छात्र सरकार के इस निर्णय के अनुसार किसी नए स्कूल में प्रवेश लेता है तो नया विद्यालय पुराने विद्यालय से छात्र की जानकारी सरल पोर्टल से प्राप्त करने का अनुरोध करेगा और पुराना स्कूल सात दिनों के भीतर अनुरोध स्वीकार कर लेगा। यदि विद्यालय ऐसे अनुरोध को स्वीकार नहीं करता है तो संबंधित केन्द्राध्यक्ष अपने स्तर पर ऐसे अनुरोध को स्वीकार करेगा, सरकार के इस फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है।
कोविड के प्रकोप के बाद किन्हीं कारणों से एक छात्र का उसके निजी स्कूल से स्कूल स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) (Transfer Certificate) या स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र (Leaving Certificate) नहीं दिया गया है तो ऐसे छात्र सरकारी या अनुदानित स्कूल में इस प्रमाण पत्र के बिना विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाता है। इससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो और उनका शैक्षणिक वर्ष बर्बाद नहीं होना चाहिए, इस उद्देश्य के लिए ऐसे छात्रों को आसानी से प्रवेश प्रदान करके देने के लिए यह फैसला लिया गया है। यह मंत्री श्री केसरकर ने स्पष्ट किया है।

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