नागपूर, दिसंबर (महासंवाद)
पुणे शहर के लिए समान जलापूर्ति योजना परियोजना के तहत काम सितंबर 2023 से पहले और राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत पुणे शहर की मुला-मुठा नदी का प्रदूषण पर नियंत्रण करना इस प्रकल्प के काम मार्च 2025 तक पूरे कर लिए जाएंगे। इन कार्यों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाएगी। यह जानकारी विधानसभा में मंत्री उदय सामंत ने दी। विधानसभा सदस्य सुनील कांबले ने इस संबंध में एक सुझाव पेश किया था, उसका जवाब देते हुए मंत्री श्री सामंत बोल रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि पुणे शहर भौगोलिक रूप से उच्च और निम्न क्षेत्रों में विभाजित है, इसलिए कुछ क्षेत्रों में पानी उच्च दबाव और लंबे समय तक उपलब्ध रहता है तो कुछ इलाकों में पानी की आपूर्ति बहुत कम दबाव से होता है। तद्नुसार पुणे महानगरपालिका ने पुणे शहर के लिए एक समान जलापूर्ति योजना 24ु7 की एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। इस परियोजना में मुख्य रूप से टंकी का निर्माण, मेन प्रेशर पाइप लाइन बिछाना, मौजूदा वितरण प्रणाली को पुनर्जीवित करना, पंपिंग स्टेशनों का निर्माण और नागरिकों के नलों पर एएमआर मीटर लगाना शामिल है। इस परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए जल संग्रहण टैंक निर्माण हेतु एक निविदा, मेन प्रेशर पाइप बिछाने हेतु एक निविदा, शहर के जल शोधन केंद्र के अनुसार पांच टेंडर ऐसी 7 निविदाओं की प्रक्रिया, शहर एवं जल शोधन केन्द्र हेतु पांच निविदायें क्रियान्वित की जा चुकी हैं। इस तरह 7 टेंडर की प्रक्रिया लागू कर दी गई है। इन टेंडरों में 82 जल भंडारण टैंकों में से आज तक 42 टंकियों का काम पूरा हो गया है। 22 टैंकों का कार्य प्रगतिपथ पर है और क्रमशः सितंबर 2023 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत पुणे शहर में मुला-मुठा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करना। इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर स्वीकृत कर वर्क ऑर्डर दे दिया गया है। इस परियोजना के तहत मुख्य रूप से कुल 11 गंदा पानी शुद्धिकरण प्लांटों का निर्माण किया जा रहा है (कुल क्षमता 396 एमएलडी) और 55 कि.मी लंबी नालियां डालने का प्रस्ताव है। इन 11 गंदा पानी शुद्धिकरण प्लांट में नायडू हॉस्पिटल (127 एमएलडी.), भैरोबा (7500 एमएलडी.), धानोरी (33 एमएलडी.), वडगांव (26 एमएलडी.) इन गंदा पानी शुद्धिकरण केंद्रों के काम जगह पर शुरू किए गए हैं। साथ ही 55 कि.मी. लंबाई की मलवाहिनी डालने के लिए जरूरी सर्वे का काम पूरा हो चुका है। इस परियोजना का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर मार्च 2025 के अंत तक पूरा करने की योजना है। योजना के लागू होने के बाद नदी का प्रदूषण कम होने में मदद होगी। यह जानकारी मंत्री उदय सामंत ने दी है।
पुणे शहर के लिए समान जलापूर्ति योजना परियोजना के तहत काम सितंबर 2023 से पहले और राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत पुणे शहर की मुला-मुठा नदी का प्रदूषण पर नियंत्रण करना इस प्रकल्प के काम मार्च 2025 तक पूरे कर लिए जाएंगे। इन कार्यों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाएगी। यह जानकारी विधानसभा में मंत्री उदय सामंत ने दी। विधानसभा सदस्य सुनील कांबले ने इस संबंध में एक सुझाव पेश किया था, उसका जवाब देते हुए मंत्री श्री सामंत बोल रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि पुणे शहर भौगोलिक रूप से उच्च और निम्न क्षेत्रों में विभाजित है, इसलिए कुछ क्षेत्रों में पानी उच्च दबाव और लंबे समय तक उपलब्ध रहता है तो कुछ इलाकों में पानी की आपूर्ति बहुत कम दबाव से होता है। तद्नुसार पुणे महानगरपालिका ने पुणे शहर के लिए एक समान जलापूर्ति योजना 24ु7 की एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। इस परियोजना में मुख्य रूप से टंकी का निर्माण, मेन प्रेशर पाइप लाइन बिछाना, मौजूदा वितरण प्रणाली को पुनर्जीवित करना, पंपिंग स्टेशनों का निर्माण और नागरिकों के नलों पर एएमआर मीटर लगाना शामिल है। इस परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए जल संग्रहण टैंक निर्माण हेतु एक निविदा, मेन प्रेशर पाइप बिछाने हेतु एक निविदा, शहर के जल शोधन केंद्र के अनुसार पांच टेंडर ऐसी 7 निविदाओं की प्रक्रिया, शहर एवं जल शोधन केन्द्र हेतु पांच निविदायें क्रियान्वित की जा चुकी हैं। इस तरह 7 टेंडर की प्रक्रिया लागू कर दी गई है। इन टेंडरों में 82 जल भंडारण टैंकों में से आज तक 42 टंकियों का काम पूरा हो गया है। 22 टैंकों का कार्य प्रगतिपथ पर है और क्रमशः सितंबर 2023 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत पुणे शहर में मुला-मुठा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करना। इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर स्वीकृत कर वर्क ऑर्डर दे दिया गया है। इस परियोजना के तहत मुख्य रूप से कुल 11 गंदा पानी शुद्धिकरण प्लांटों का निर्माण किया जा रहा है (कुल क्षमता 396 एमएलडी) और 55 कि.मी लंबी नालियां डालने का प्रस्ताव है। इन 11 गंदा पानी शुद्धिकरण प्लांट में नायडू हॉस्पिटल (127 एमएलडी.), भैरोबा (7500 एमएलडी.), धानोरी (33 एमएलडी.), वडगांव (26 एमएलडी.) इन गंदा पानी शुद्धिकरण केंद्रों के काम जगह पर शुरू किए गए हैं। साथ ही 55 कि.मी. लंबाई की मलवाहिनी डालने के लिए जरूरी सर्वे का काम पूरा हो चुका है। इस परियोजना का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर मार्च 2025 के अंत तक पूरा करने की योजना है। योजना के लागू होने के बाद नदी का प्रदूषण कम होने में मदद होगी। यह जानकारी मंत्री उदय सामंत ने दी है।

0 टिप्पणियाँ