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‘नाचणी, वरई, बाजरा, ज्वार’ अनाज पोषक तत्वों से भरपूर

पौष्टिक अनाज को वैश्विकस्तर पर लाने के लिए साथ ही आहार में अनाज शामिल करने के लिए वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय पौष्टिक अनाज वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार ने ‘मकर संक्रांति भोगी’ को ‘पौष्टिक अनाज दिवस’ के रूप में घोषित किया है। अनाज के महत्व से नागरिकों को अवगत कराने के लिए पूरे वर्ष कृषि विभाग के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अनाज के सेवन के अनेक फायदे हैं, इस विषय पर राज्य के कृषि आयुक्त सुनील चव्हाण द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर लेख...
भारत दुनिया का सबसे बड़ा पौष्टिक अनाज उत्पादक है। आजकल युवा पीढ़ी स्वस्थ भोजन और जीवन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। चूंकि अनाज में बड़ी संख्या में फाइबर उत्पाद हैं, इसलिए लोगों ने ‘सुपरफूड’ के रूप में देखा है। बदलती जीवनशैली के कारण आहार की ओर हो रही अनदेखी व जिसके चलते प्रत्याशित बीमारी के प्रभाव को दूर करने के लिए पौष्टिक अनाज को आहार में शामिल करना आवश्यक है। रागी, वरई, बाजरी, ज्वार, राजगिरा जैसे पौष्टिक अनाज कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों द्वारा समृद्ध हैं।
बढ़ते उत्पादकता पर जोर
पौष्टिक अनाज की फसल का उत्पादन मुख्य रूप से शुष्क क्षेत्र में होता है। शुष्क क्षेत्र में किसानों की पोषण अनाज की फसल पद्धति टिककर रखें, इसलिए बेहतर बीज और औजार का विविध योजनाओं के द्वारा आपूर्ति करके बढ़ते    उत्पादकता पर  महाराष्ट्र शासन की ओर से जोर दिया जाएगा। साथ ही पौष्टिक अनाज फसल प्रक्रिया व मूल्य श्रृंखला विकसन पर जोर दिया जा रहा है। उसके द्वारा किसानों से उत्पादित फसल का मूल्यवर्धन होगा। इससे पौष्टिक अनाज खपत में वृद्धि होगी और उसका लाभ शुष्क क्षेत्र के किसानों के उत्पादन को अधिक कीमतें प्राप्त करने में सहायता की जाएगी।
अनाज का पोषण मूल्य
ज्वार : रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। ज्वार वजन कम करने में मदद करता है। हड्डी के स्वास्थ्य के लिए ज्वार उपयोगी है। शरीर में ऊर्जा स्तर में सुधार करता है। इसके अलावा हृदय का स्वास्थ्य भी ज्वार से सुधार करता है।
बाजरा : बाजरा, कैल्शियम, विटामिन ए, बी और फास्फोरस, लौह, मोनसोरिस में अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं। रक्त में ऊतक नियंत्रण, रक्तचाप, नियंत्रण, हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए और नेमिया    बीमारी को दूर करने के लिए   बाजरा उपयुक्त है। 
नाचणी : शक्तिवर्धक, पित्तशामक रहने से रागी खून शुद्ध करने के लिए उपयुक्त है। कैल्शियम और लौह प्रचुर मात्रा में रहने से गर्भवती माताओं और बुजुर्गों की हड्डियों और अनिमिया पर रागी के पदार्थ उपयोगी होते हैं। नाचणी से मोटापा को कम करने के लिए मधुमेह रोगियों के लिए रोगनिवारक, यकृत में चरबी को कम करने में मदद करता है।

राला : इसमें आयरन की मात्रा अधिक होने के कारण यह दिमाग की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इसकी अँटीऑक्सिडन्ट गुणधर्म रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। अंकुर आनेवाले राला खाने से हड्डियों की भंगुरता कम होती है और हड्डियां मजबूत होती हैं। साथ ही सिरदर्द, निद्रानाश, कॉलरा, बुखार की उपचार पद्धति में राला का मुख्य रूप से उपायोग होता है।
वरई : नवजात शिशु, बालक व माता के लिए सबसे अच्छा पौष्टिक अनाज है। सदृढ़ स्वास्थ्य व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए वरई उपयुक्त है। वरई मधुमेह, हृदय रोग जैसी बीमारियों का धोखा कम करती है। 
अंतर्राष्ट्रीय पौष्टिक अनाज वर्ष के अवसर पर किए जानेवाले प्रबोधन के कारण महाराष्ट्र की जनता के स्वास्थ्य में सुधार होने हेतु मदद होगी। पौष्टिक अनाज के फसल उत्पादन व उत्पन्न वृद्धि से किसान राजा खुश होगा। 
संकलन : विभागीय सूचना कार्यालय, पुणे

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