मंडल रेल प्रबंधक, पुणे इन्दू दुबे द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में दी गई जानकारी
पुणे, मार्च (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
भारतीय रेल दुनिया में सबसे बड़ा हरित रेलवे बनने के लिए मिशन मोड में काम कर रहा है और 2030 से पहले शून्य कार्बन उत्सर्जक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल, कुशल, लागत प्रभावी, समयनिष्ठ होने की समग्र दृष्टि से निर्देशित है और नए भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई का एक बड़ा व आधुनिक वाहक है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए पुणे मंडल रेल प्रबंधक श्रीमती इंदू दुबे बताया कि पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन डेक्कन क्वीन बॉम्बे और पुणे के बीच दिनांक 01.06.1930 को चली थी। खंड को 1500 वोल्ट डीसी पर विद्युतीकृत किया गया था। मध्य रेल के पुणे मंडल के डीसी ट्रैक्शन को एसी ट्रैक्शन में बदलना 2004 में शुरू हुआ था और धीरे-धीरे 2008-09 में पूरा किया।
दूसरा विद्युतीकरण पुणे और दौंड के बीच खंड के लिए किया गया था जो बाद में बारामती तक बढ़ा दिया गया था। यह 2014 में शुरू हुआ था और 2019 में पूरा हुआ। पुणे से कोल्हापुर खंड, लोनंद-फलटन का विद्युतीकरण 2019 में शुरू हुआ और 2022 में पूरा हुआ।
पुणे मंडल को 531 रूट किमी के साथ पूरी तरह से विद्युतीकृत कर दिया गया है।
वर्ष 2022-23 के दौरान 11 जोड़ी मेल/ एक्सप्रेस ट्रेनों को इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन में बदला गया। पुणे मंडल पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चलने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनें शताब्दी एक्सप्रेस, वंदे भारत एक्सप्रेस, डेक्कन क्वीन, झेलम एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस आदि हैं। विद्युतीकरण ने पुणे मंडल के ईंधन बिल को काफी कम किया है जो कि औसतन 2303.04 किलो लीटर प्रति माह है और सालाना 0.733 लाख टन कार्बन फुटप्रिंट कम होते हैं।
रेलवे विद्युतीकरण की गति, जो पर्यावरण के अनुकूल है और प्रदूषण को कम करती है, विधुतीकरण का कार्य 2014 के बाद से 9 गुना गति से बढ़ा है। रेलवे ने ब्राड गेज मार्गों के विद्युतीकरण की योजना बनाई है जो डीजल कर्षण को समाप्त करने की सुविधा प्रदान करेगा, जिसके परिणामस्वरूप इसके कार्बन फुटप्रिंट और पर्यावरण प्रदूषण में महत्वपूर्ण कमी आएगी।
भारतीय रेल दुनिया में सबसे बड़ा हरित रेलवे बनने के लिए मिशन मोड में काम कर रहा है और 2030 से पहले शून्य कार्बन उत्सर्जक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल, कुशल, लागत प्रभावी, समयनिष्ठ होने की समग्र दृष्टि से निर्देशित है और नए भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई का एक बड़ा व आधुनिक वाहक है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए पुणे मंडल रेल प्रबंधक श्रीमती इंदू दुबे बताया कि पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन डेक्कन क्वीन बॉम्बे और पुणे के बीच दिनांक 01.06.1930 को चली थी। खंड को 1500 वोल्ट डीसी पर विद्युतीकृत किया गया था। मध्य रेल के पुणे मंडल के डीसी ट्रैक्शन को एसी ट्रैक्शन में बदलना 2004 में शुरू हुआ था और धीरे-धीरे 2008-09 में पूरा किया।
दूसरा विद्युतीकरण पुणे और दौंड के बीच खंड के लिए किया गया था जो बाद में बारामती तक बढ़ा दिया गया था। यह 2014 में शुरू हुआ था और 2019 में पूरा हुआ। पुणे से कोल्हापुर खंड, लोनंद-फलटन का विद्युतीकरण 2019 में शुरू हुआ और 2022 में पूरा हुआ।
पुणे मंडल को 531 रूट किमी के साथ पूरी तरह से विद्युतीकृत कर दिया गया है।
वर्ष 2022-23 के दौरान 11 जोड़ी मेल/ एक्सप्रेस ट्रेनों को इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन में बदला गया। पुणे मंडल पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चलने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनें शताब्दी एक्सप्रेस, वंदे भारत एक्सप्रेस, डेक्कन क्वीन, झेलम एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस आदि हैं। विद्युतीकरण ने पुणे मंडल के ईंधन बिल को काफी कम किया है जो कि औसतन 2303.04 किलो लीटर प्रति माह है और सालाना 0.733 लाख टन कार्बन फुटप्रिंट कम होते हैं।
रेलवे विद्युतीकरण की गति, जो पर्यावरण के अनुकूल है और प्रदूषण को कम करती है, विधुतीकरण का कार्य 2014 के बाद से 9 गुना गति से बढ़ा है। रेलवे ने ब्राड गेज मार्गों के विद्युतीकरण की योजना बनाई है जो डीजल कर्षण को समाप्त करने की सुविधा प्रदान करेगा, जिसके परिणामस्वरूप इसके कार्बन फुटप्रिंट और पर्यावरण प्रदूषण में महत्वपूर्ण कमी आएगी।
विद्युतीकरण के लाभ
-पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का साधन है।
-आयातित डीजल ईंधन पर निर्भरता कम हुई, जिससे कीमती विदेशी मुद्रा की बचत हुई और कार्बन फुटप्रिंट्स में कमी आई है।
-परिचालन लागत कम हुई है।
-भारी मालगाड़ियों की ढुलाई।
-कर्षण परिवर्तन के कारण अवरोधन को समाप्त करके अनुभागीय क्षमता में वृद्धि हुई है।
इस प्रेस कांफ्रेंस में अपर मंडल रेल प्रबंधक बृजेश कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक डॉ. स्वप्निल निला, वरिष्ठ मंडल विद्युत् अभियंता नारायण हरि माहेश्वरी, मंडल वाणिज्य प्रबंधक डॉ. रामदास भिसे, पुणे मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज झंवर उपस्थित थे।
-पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का साधन है।
-आयातित डीजल ईंधन पर निर्भरता कम हुई, जिससे कीमती विदेशी मुद्रा की बचत हुई और कार्बन फुटप्रिंट्स में कमी आई है।
-परिचालन लागत कम हुई है।
-भारी मालगाड़ियों की ढुलाई।
-कर्षण परिवर्तन के कारण अवरोधन को समाप्त करके अनुभागीय क्षमता में वृद्धि हुई है।
इस प्रेस कांफ्रेंस में अपर मंडल रेल प्रबंधक बृजेश कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक डॉ. स्वप्निल निला, वरिष्ठ मंडल विद्युत् अभियंता नारायण हरि माहेश्वरी, मंडल वाणिज्य प्रबंधक डॉ. रामदास भिसे, पुणे मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज झंवर उपस्थित थे।


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