हड़पसर, अप्रैल (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
15 से 20 गुना मनमाना टैक्स वसूल कर पिसोली के किसान के बेटों को बर्बाद करने के लिए पुणे महानगरपालिका की साजिश है! अब महाराष्ट्र के कर्जदार किसानों की तरह क्या हमें आत्महत्या कर लेनी चाहिए? यह सवाल रास्ता रोको आंदोलन में पिसोली के पूर्व-भूतपूर्व जनप्रतिनिधि और सामाजिक युवा कार्यकर्ताओं ने पुणे मनपा व राज्य की शिंदे सरकार से पूछा है।
पुणे महानगरपालिका ने नये से शामिल किए गए पिसोली गांव में गोदाम, वेयर हाउस आय के लिए ग्रामपंचायत टैक्स से अधिक 15 गुना मनपा ने टैक्स लगाया है। इसके विरोध में पिसोली ग्रामीणों ने आंबेकर होटल चौक में कात्रज रास्ता रोककर पुणे मनपा की मनमाने टैक्स नीति की कड़ी शब्दों में निंदा की और कहा कि अब हम पीछे नहीं हटेंगे, हमें हमारी अपनी ग्रामपंचायत चाहिए, नहीं तो कोर्ट में न्याय के लिए दरवाजा खटखटाएंगे और पुणे महानगरपालिका पर हल्लाबोल आंदोलन करने की चेतावनी दी।
इस अवसर पर पिसोली के गणमान्य ग्रामीणों एवं युवा समाजसेवियों ने कहा कि पहले से ही शुष्क क्षेत्रों में पिसोली के स्थानीय किसानों के शिक्षित पुत्रों द्वारा अपनी जमीन बिल्डरों के गले में डालने के बजाय करोड़ों का बैंक कर्ज निकालकर गोदाम, वेयर हाउसेस बनाए हैं। इस माध्यम से ट्रान्सपोर्ट, होटल्स के साथ ही विभिन्न व्यवसायों को बढ़ावा मिला और हजारों रोजगार सृजित हुए तो पिसोली के भूमिपुत्रों के गोदामों पर पुणे महानगरपालिका ने 15 से 20 गुना अनुचित कर लगा दिया। इस गोडाऊन के निर्माण के लिए लिए गए बैंक ऋण की किश्तें चुकाना भी मुश्किल हो गया है। पुणे महानगर पालिका अब किसान पुत्रों पर आत्महत्या करने का समय लेकर आई है। हमारे पिसोली गांव को पुणे महानगरपालिका सीमा से बाहर कर दें और इसे फिर से ग्राम पंचायत बनाएं अन्यथा मनपा आयुक्तालय से मंत्रालय तक हम आंदोलन करेंगे। यह चेतावनी देते हुए शिंदे सरकार को इस मसले पर ध्यान देना चाहिए। यह मांग भी उन्होंने इस अवसर पर की।
इस आंदोलन में श्री शिव प्रतिष्ठान युवा हिंदुस्थान पुणे अध्यक्ष मुकुंद मासाल, ह्यूमन राइट्स के भागवत येप्रे, अवी धावडे, बापूसाहेब मासाल, प्रकाश मासाल, युवा नेता तानाजी कालभोर, युवा नेता राजेंद्र भिंताडे, पूर्व सरपंच किरण येप्रे, एडवोकेट प्रकाश मासाल, विजय दगडे, विनोद कालभोर, दीपक धावडे, किशोर धावडे, बजरंग भिंताडे, किशोर गोडावले, सचिन भापकर, निखिल मासाल, शरद मासाल, कपिल कालभोर, स्वप्निल मासाल, सोमनाथ दगडे, अविनाश धावडे, संजय कदम, पुष्पा मासाल, संध्या कदम, मैना मासाल, सचिन भापकर आदि के साथ बड़ी संख्या में महिला व ग्रामीण उपस्थित थे।
15 से 20 गुना मनमाना टैक्स वसूल कर पिसोली के किसान के बेटों को बर्बाद करने के लिए पुणे महानगरपालिका की साजिश है! अब महाराष्ट्र के कर्जदार किसानों की तरह क्या हमें आत्महत्या कर लेनी चाहिए? यह सवाल रास्ता रोको आंदोलन में पिसोली के पूर्व-भूतपूर्व जनप्रतिनिधि और सामाजिक युवा कार्यकर्ताओं ने पुणे मनपा व राज्य की शिंदे सरकार से पूछा है।
पुणे महानगरपालिका ने नये से शामिल किए गए पिसोली गांव में गोदाम, वेयर हाउस आय के लिए ग्रामपंचायत टैक्स से अधिक 15 गुना मनपा ने टैक्स लगाया है। इसके विरोध में पिसोली ग्रामीणों ने आंबेकर होटल चौक में कात्रज रास्ता रोककर पुणे मनपा की मनमाने टैक्स नीति की कड़ी शब्दों में निंदा की और कहा कि अब हम पीछे नहीं हटेंगे, हमें हमारी अपनी ग्रामपंचायत चाहिए, नहीं तो कोर्ट में न्याय के लिए दरवाजा खटखटाएंगे और पुणे महानगरपालिका पर हल्लाबोल आंदोलन करने की चेतावनी दी।
इस अवसर पर पिसोली के गणमान्य ग्रामीणों एवं युवा समाजसेवियों ने कहा कि पहले से ही शुष्क क्षेत्रों में पिसोली के स्थानीय किसानों के शिक्षित पुत्रों द्वारा अपनी जमीन बिल्डरों के गले में डालने के बजाय करोड़ों का बैंक कर्ज निकालकर गोदाम, वेयर हाउसेस बनाए हैं। इस माध्यम से ट्रान्सपोर्ट, होटल्स के साथ ही विभिन्न व्यवसायों को बढ़ावा मिला और हजारों रोजगार सृजित हुए तो पिसोली के भूमिपुत्रों के गोदामों पर पुणे महानगरपालिका ने 15 से 20 गुना अनुचित कर लगा दिया। इस गोडाऊन के निर्माण के लिए लिए गए बैंक ऋण की किश्तें चुकाना भी मुश्किल हो गया है। पुणे महानगर पालिका अब किसान पुत्रों पर आत्महत्या करने का समय लेकर आई है। हमारे पिसोली गांव को पुणे महानगरपालिका सीमा से बाहर कर दें और इसे फिर से ग्राम पंचायत बनाएं अन्यथा मनपा आयुक्तालय से मंत्रालय तक हम आंदोलन करेंगे। यह चेतावनी देते हुए शिंदे सरकार को इस मसले पर ध्यान देना चाहिए। यह मांग भी उन्होंने इस अवसर पर की।
इस आंदोलन में श्री शिव प्रतिष्ठान युवा हिंदुस्थान पुणे अध्यक्ष मुकुंद मासाल, ह्यूमन राइट्स के भागवत येप्रे, अवी धावडे, बापूसाहेब मासाल, प्रकाश मासाल, युवा नेता तानाजी कालभोर, युवा नेता राजेंद्र भिंताडे, पूर्व सरपंच किरण येप्रे, एडवोकेट प्रकाश मासाल, विजय दगडे, विनोद कालभोर, दीपक धावडे, किशोर धावडे, बजरंग भिंताडे, किशोर गोडावले, सचिन भापकर, निखिल मासाल, शरद मासाल, कपिल कालभोर, स्वप्निल मासाल, सोमनाथ दगडे, अविनाश धावडे, संजय कदम, पुष्पा मासाल, संध्या कदम, मैना मासाल, सचिन भापकर आदि के साथ बड़ी संख्या में महिला व ग्रामीण उपस्थित थे।

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