पिंपरी, मई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम द्वारा आयोजित जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज संतपीठ टालगाँव चिखली में नि:शुल्क साम्प्रदायिक संगीत शिक्षा का उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथियों, ग्रामीणों की उपस्थिति एवं गणमान्य व्यक्तियों के आशीर्वाद से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति बोर्ड के अध्यक्ष एवं संतपीठ के निदेशक ह.भ.प. डॉ. सदानंद मोरे ने की। कार्यक्रम का उद्घाटन पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम के आयुक्त व संतपीठ के अध्यक्ष शेखर सिंह ने किया, जबकि पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम की पूर्व मेयर उषा उर्फ माई ढोरे, आलंदी देवस्थान की ट्रस्टी व संतपीठ के निदेशक ह.भ.प. डॉ. अभय तिलक, वारकरी शिक्षण संस्था आलंदी के ट्रस्टी ह.भ.प. दिनकर शास्त्री भुकेले आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान परिचयात्मक भाषण में संतपीठ के निदेशक ह.भ.प. अभय तिलक, जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज संतपीठ की स्थापना से लेकर आज तक की प्रगति का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यद्यपि भक्ति संत के जीवन का प्राण है, वह भक्ति निरंतर शिक्षा का स्रोत या ऊर्जा केंद्र होगी जो ज्ञान की नींव है।
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के आयुक्त एवं संतपीठ के अध्यक्ष शेखर सिंह ने सभी वाद्य यंत्रों की पूजा कर निशुल्क साम्प्रदायिक संगीत शिक्षा का शुभारंभ करते हुए कहा कि वाद्य यंत्रों के स्पंदन से निकलने वाली तरंगें जीवन पर बहुत प्रभाव डालती हैं, इसलिए हमें उन स्पंदनों को संरक्षित करना चाहिए। ‘संतपीठ मुक्त सांप्रदायिक संगीत शिक्षा देने वाला अद्वितीय माध्यम है।
पिंपरी-चिंचवड़ की पूर्व महापौर उषा उर्फ माई ढोरे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मुफ्त साम्प्रदायिक संगीत शिक्षा से युवा और वृद्ध आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त करेंगे और टालगाँव चिखली में निर्मित संतपीठ इस प्रकार की शिक्षा का एक आदर्श उदाहरण होगा।
भोसरी विधानसभा विधायक महेश लांडगे ने इंटरकॉम सिस्टम के माध्यम से बधाई संदेश भेजकर मुक्त साम्प्रदायिक संगीत शिक्षा की पहल की कामना की और वारकरी शिक्षा संस्थान से श्री दिनकर शास्त्री भुकेले ने भी सभी उपस्थित लोगों की ओर से प्रतिनिधि रूप में इस अवधारणा की कामना की।
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम द्वारा आयोजित जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज संतपीठ टालगाँव चिखली में नि:शुल्क साम्प्रदायिक संगीत शिक्षा का उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथियों, ग्रामीणों की उपस्थिति एवं गणमान्य व्यक्तियों के आशीर्वाद से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति बोर्ड के अध्यक्ष एवं संतपीठ के निदेशक ह.भ.प. डॉ. सदानंद मोरे ने की। कार्यक्रम का उद्घाटन पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम के आयुक्त व संतपीठ के अध्यक्ष शेखर सिंह ने किया, जबकि पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम की पूर्व मेयर उषा उर्फ माई ढोरे, आलंदी देवस्थान की ट्रस्टी व संतपीठ के निदेशक ह.भ.प. डॉ. अभय तिलक, वारकरी शिक्षण संस्था आलंदी के ट्रस्टी ह.भ.प. दिनकर शास्त्री भुकेले आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान परिचयात्मक भाषण में संतपीठ के निदेशक ह.भ.प. अभय तिलक, जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज संतपीठ की स्थापना से लेकर आज तक की प्रगति का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यद्यपि भक्ति संत के जीवन का प्राण है, वह भक्ति निरंतर शिक्षा का स्रोत या ऊर्जा केंद्र होगी जो ज्ञान की नींव है।
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के आयुक्त एवं संतपीठ के अध्यक्ष शेखर सिंह ने सभी वाद्य यंत्रों की पूजा कर निशुल्क साम्प्रदायिक संगीत शिक्षा का शुभारंभ करते हुए कहा कि वाद्य यंत्रों के स्पंदन से निकलने वाली तरंगें जीवन पर बहुत प्रभाव डालती हैं, इसलिए हमें उन स्पंदनों को संरक्षित करना चाहिए। ‘संतपीठ मुक्त सांप्रदायिक संगीत शिक्षा देने वाला अद्वितीय माध्यम है।
पिंपरी-चिंचवड़ की पूर्व महापौर उषा उर्फ माई ढोरे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मुफ्त साम्प्रदायिक संगीत शिक्षा से युवा और वृद्ध आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त करेंगे और टालगाँव चिखली में निर्मित संतपीठ इस प्रकार की शिक्षा का एक आदर्श उदाहरण होगा।
भोसरी विधानसभा विधायक महेश लांडगे ने इंटरकॉम सिस्टम के माध्यम से बधाई संदेश भेजकर मुक्त साम्प्रदायिक संगीत शिक्षा की पहल की कामना की और वारकरी शिक्षा संस्थान से श्री दिनकर शास्त्री भुकेले ने भी सभी उपस्थित लोगों की ओर से प्रतिनिधि रूप में इस अवधारणा की कामना की।

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