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ज्येष्ठ नागरिक समाज में अपनी पहचान बनाएं : मधुकर पवार

आंबेगांव खुर्द, जुलाई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
समाज में उन्नत बनाने के लिए ज्येष्ठ नागरिक समाज में अपनी पहचान बनाएं, मित्र बनाएं और अपने अनुभवों को साझा करें, यह उद्गार मा. मधुकर पवार, अध्यक्ष, मध्यवर्ती ज्येष्ठ नागरिक संघटना पुणे ने व्यक्त किए। उन्होंने ज्येष्ठ नागरिक संघ के प्रथम व वसंतराव थोरात विरंगुला केंद्र जांभुलवाडी रोड के द्वितीय वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए आगे कहा कि ज्येष्ठ नागरिकों का एक साथ होना, संघ बनाना, उसे बनाए रखना और आनंदपूर्वक ऐसे समारोहों में भाग लेना उनके स्वस्थ व आनंदी जीवन के लिए आवश्यक है और इसीलिए ज्येष्ठ नागरिक संघ की स्थापना की जाती है। 
कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में बोलते हुए एसोसिएशन ऑफ सीनियर सिटीजन पुणे दक्षिण के अध्यक्ष एस.आर. पाटिल ने कहा कि ज्येष्ठ नागरिक संघ बनाने का उद्देश्य यह है ज्येष्ठ नागरिक आरोगी व आनंदी जीवन बिताएं। उन्होंने कहा कि ज्येष्ठ नागरिकों को हमेशा व्यायाम करना चाहिए, वेट लिफ्टिंग और तीव्र चालन के साथ-साथ एक्टिव रहना चाहिए। अपने पसंद के कार्यक्रमों जैसे नृत्य, गायन, वादन आदि में व्यस्त रहना चाहिए। इससे डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को संतुलित बनाए रखने में बहुत मदद मिलती है और स्मृति भंग नहीं होता। इस अवसर पर उपस्थित माधुरी पवार उपाध्यक्ष मध्यवर्ती ज्येष्ठ नागरिक संघ ने बहुत प्रसन्नता व्यक्त की, आयोजकों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि ज्येष्ठ नागरिक संघ में महिलाओं की स्वतंत्र भूमिका होनी चाहिए।
इस अवसर पर संघ के संस्थापक अध्यक्ष चंद्रकांत गुरव ने प्रास्ताविक प्रस्तुत करते हुए कहा कि जांभुलवाडी रोड पर ज्येष्ठ नागरिक संघ की स्थापना करने के लिए सिद्धिविनायक सोसायटी स्थित उत्तम दलवी के बंगले पर पहली बैठक हुई थी। उसके बाद लोग जुड़ते गए और एक वर्ष पूर्व उसका पंजीकरण भी हो गया। संघ और विरंगुला केंद्र के लिए कै. वसंतराव थोरात ने स्वयं जगह दी और उसका उद्घाटन भी किया। उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक बताया कि आज के कार्यक्रम में उनके सुपुत्र चंद्रशेखर थोरात, चंद्रकांत थोरात व उनका परिवार भी उपस्थित है। उन्होंने इस अवसर पर अपने पुराने साथी ज्येष्ठ नागरिक जो हमें छोड़कर इस संसार से विदा हो गए हैं उन्हें भी याद किया और अंतो मोडक, विनोद कुमार त्यागी, हणमंत पोतदार को श्रद्धांजलि अर्पित की। 
इस अवसर पर अशोककुमार निवंगुणे ने  संघ और विरंगुला केंद्र की स्थापना का जिक्र करते हुए कहा कि तात्या साहब यानी वसंतराव थोरात ने जगह दी और एक्टिव फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष श्रीकांत लिपाणे ने उस जगह पर निर्माण कराया और इनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता। ज्ञानेश्वर सोलस्कर ने भी समारोह को संबोधित किया और कहा कि इससे क्षेत्र में ज्येष्ठ नागरिक संघ हमारे लिए बहुत काम कर रहा है। अध्यक्ष गुरव जी लाइट पानी की समस्याओं को फोन करके निराकरण कर देते हैं।
समारोह का प्रारंभ हुआ श्रीकांतराव देशपांडे व उनकी टीम के संगीत कार्यक्रम से। देशपांडे जी ने अपनी समधुर आवाज में गणेश वंदना की और फिर एक भजन। हारमोनियम पर साथ देने वाली लता वक्षी ने ‘राधा न बोले रे’ गीत जैसे ही शुरू किया तालियों की गड़गड़ाहट से हाल गूंज उठा। अरुण पोंणसे ने क़िस्मत फिल्म का गाना महेंद्र कपूर की आवाज में पेश किया - लाखों हैं यहां दिलवाले पर प्यार नहीं मिलता। क्षमा पुरुषोत्तम देवगांवकर ने खानदान फिल्म का गाना तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा..। बहुत सुरीली आवाज में पेश किया। फिर उन्होंने अपने पतिदेव पुरुषोत्तम देवगांवकर के साथ एक युगल गीत भी प्रस्तुत किया। समारोह में एक समां उस समय बंध गया जब अशोक कुमार निवंगुणे ने सीटी बजाकर ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में तबले पर थे कुमार सोनवणे और संगीत कार्यक्रम का संचालन कर रही थी स्वाति दिवाण। 
इसके पूर्व चंद्रशेखर थोरात, चंद्रकांत थोरात, सौ. शालन ने छत्रपति शिवाजी महाराज तथा कै. वसंतराव थोरात की प्रतिमा पर पुष्पांजलि देकर पूजन किया। सभी मंंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया।  मंंचासीन अतिथियों, थोरात परिवार के साथ साथ युवा संवाद के प्रतिनिधि धनंजय दर्ज व सिद्धिविनायक सामाजिक व शैक्षणिक संस्था के कार्यालयीन सचिव विनोद खुडे, राहुल माने व उनकी धर्मपत्नी का भी शॉल श्रीफल भेंट कर स्वागत सम्मान किया गया। समारोह में संतोष बोडके, दिलीप तोडकर, भीमाजी डोंगरे और अंकुश राव जांभले को ज्येष्ठ नागरिक संघ के परिचय पत्र दिए गए। 
कार्यक्रम का संचालन संघ के उपाध्यक्ष संजय रणसिंग ने बहुत अच्छी तरह शेरोशायरी के साथ सरलतापूर्वक किया। संघ के सचिव मंहाल्साकांत जोशी ने आभार प्रदर्शन किया। इस समारोह को सफल बनाने में संघ के कोषाध्यक्ष चंद्रकांत घोडके, रंगोलीकार श्रीकांत जोशी, अशोककुमार निवंगुणे, जयसिंह जांभले, बैजनाथ शेटे, अनिल ढोकले, प्रकाश निकालजे, अशोक खोत का योगदान प्रशंसनीय रहा। वंदे मातरम् गीत के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

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