महाराष्ट्र की प्रस्तुतिकरण से विश्व बैंक प्रतिनिधिमंडल प्रभावित
मुंबई, जुलाई (महासंवाद)
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि विश्व बैंक के सहयोग से राज्य में पहले भी कई बड़ी परियोजनाएँ स्थापित की गई हैं और भविष्य में भी कई परियोजनाएँ स्थापित की जाएंगी, लेकिन विश्व बैंक को न केवल बुनियादी ढांचे में बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी संस्थागत क्षमता निर्माण के लिए सहयोग करना चाहिए।
विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों के साथ वे होटल ट्राइडेंट में हुई बैठक में वे बोल रहे थे। यहां उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, मित्र संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी, विविध विभागों के सचिवों के साथ ही विश्व बैंक द्वारा भारत के कार्यकारी संचालक परमेश्वरन अय्यर और यूके, अर्जेंटीना, ब्राजील, तंजानिया, इंडोनेशिया, चीन, सऊदी अरब, मैक्सिको, पोलैंड, नाइजीरिया आदि के कार्यकारी निदेशक भी उपस्थित थे।
जीवन की गुणवत्ता में और सुधार पर जोर
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बैंक न केवल एक निधि देनेवाली संस्था है, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विकासशील देशों के लिए ज्ञान का एक बड़ा स्रोत है। विश्व बैंक के साथ राज्य की साझेदारी से महाराष्ट्र के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में और सुधार होगा। देश में महाराष्ट्र में सबसे कुशल जनशक्ति, हमारे राज्य में उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा और हरित प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य देखभाल और बंदरगाह अवसंरचना सुविधा इस क्षेत्र में पर्याप्त प्रयास कर रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कृषि सुधार, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और सबके लिए आवास के लिए उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदमों की जानकारी दी। महाराष्ट्र आर्थिक सलाहकार परिषद की स्थापना करनेवाला महाराष्ट्र एकमात्र राज्य है। यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को साकार करने के लिए इस परिषद की स्थापना की है।
परिषद द्वारा की गई सिफारिशों का फास्ट ट्रैक कमेटी के माध्यम से अध्ययन कराया जाएगा और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए कदम उठाए जाएंगे।
कमजोरों को सशक्त बनाना
हमारी सरकार शाश्वत विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है, यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक जनोन्मुख सरकार है जो गरीबों और कमजोरों को सशक्त बनाना इस विश्व बैंक के इन उद्देश्यों के अनुरूप ऐसी हमारी नीतियां और कार्यक्रम है। हम सभी देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व में कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री दुनिया के सभी देशों के साथ आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित मजबूत संबंध बनाए रहेंगे इसके लिए प्रयास किये हैं।
महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाने का लक्ष्य : उपमुख्यमंत्री
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने खासकर नदी जोड़ो परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाना है। पश्चिमीवाहिनी की नदियों का समुद्र में जानेवाला पानी गोदावरी घाटी की ओर मोड़ना साथ ही पूर्व और पश्चिम विदर्भ नदी जोड़ो परियोजना से वहां के जिलों में सूखा के अंत को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रारंभिक बैठक में महाराष्ट्र की ओर से योजना विभाग के प्रधान सचिव सौरव विजय और सचिव शैला ए ने महाराष्ट्र की ओर से प्रस्तुतिकरण किया गया। विश्व बैंक के सहयोग से राज्य में कई परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और कुछ परियोजनाएँ चल रही हैं तो कुछ परियोजनाओं पर कार्यवाही शुरू है। विशेष रूप से, जलस्वराज्य परियोजना चरण एक, चरण दो, विभिन्न जल संसाधन परियोजनाओं में सुधार, महाराष्ट्र जल क्षेत्र सुधार परियोजना, कृषि प्रतिस्पर्धी परियोजनाएँ पहले ही पूरी हो चुकी हैं। वर्तमान में कृषि और ग्रामीण विकास की स्मार्ट परियोजना, जल संसाधन परियोजनाओं की सुरक्षा, सुधार, कार्यक्षमता और रखरखाव की परियोजना इसके अलावा पोकरा जैसी परियोजना भी शुरू हैं। कौशल विकास सतर्कता परियोजना, पर्यावरण को लेकर एमआरडीपी जैसी परियोजनाओं पर कार्यवाही शुरू है।
विश्व बैंक से उम्मीदें
इसके अलावा नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना, मुंबई महानगर में परिवहन में सुधार परियोजना, हरित ऊर्जा, राज्य के हर जिले में आर्थिक विकास और नागरिकों को तेज़ सेवाएँ प्रदान करने जैसी परियोजनाओं के संबंध में विश्व बैंक से सहयोग अपेक्षित है, इस बात पर प्रस्तुतीकरण में जोर दिया गया है। इस अवसर पर विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों ने विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा की।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि विश्व बैंक के सहयोग से राज्य में पहले भी कई बड़ी परियोजनाएँ स्थापित की गई हैं और भविष्य में भी कई परियोजनाएँ स्थापित की जाएंगी, लेकिन विश्व बैंक को न केवल बुनियादी ढांचे में बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी संस्थागत क्षमता निर्माण के लिए सहयोग करना चाहिए।
विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों के साथ वे होटल ट्राइडेंट में हुई बैठक में वे बोल रहे थे। यहां उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, मित्र संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी, विविध विभागों के सचिवों के साथ ही विश्व बैंक द्वारा भारत के कार्यकारी संचालक परमेश्वरन अय्यर और यूके, अर्जेंटीना, ब्राजील, तंजानिया, इंडोनेशिया, चीन, सऊदी अरब, मैक्सिको, पोलैंड, नाइजीरिया आदि के कार्यकारी निदेशक भी उपस्थित थे।
जीवन की गुणवत्ता में और सुधार पर जोर
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बैंक न केवल एक निधि देनेवाली संस्था है, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विकासशील देशों के लिए ज्ञान का एक बड़ा स्रोत है। विश्व बैंक के साथ राज्य की साझेदारी से महाराष्ट्र के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में और सुधार होगा। देश में महाराष्ट्र में सबसे कुशल जनशक्ति, हमारे राज्य में उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा और हरित प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य देखभाल और बंदरगाह अवसंरचना सुविधा इस क्षेत्र में पर्याप्त प्रयास कर रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कृषि सुधार, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और सबके लिए आवास के लिए उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदमों की जानकारी दी। महाराष्ट्र आर्थिक सलाहकार परिषद की स्थापना करनेवाला महाराष्ट्र एकमात्र राज्य है। यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को साकार करने के लिए इस परिषद की स्थापना की है।
परिषद द्वारा की गई सिफारिशों का फास्ट ट्रैक कमेटी के माध्यम से अध्ययन कराया जाएगा और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए कदम उठाए जाएंगे।
कमजोरों को सशक्त बनाना
हमारी सरकार शाश्वत विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है, यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक जनोन्मुख सरकार है जो गरीबों और कमजोरों को सशक्त बनाना इस विश्व बैंक के इन उद्देश्यों के अनुरूप ऐसी हमारी नीतियां और कार्यक्रम है। हम सभी देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व में कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री दुनिया के सभी देशों के साथ आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित मजबूत संबंध बनाए रहेंगे इसके लिए प्रयास किये हैं।
महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाने का लक्ष्य : उपमुख्यमंत्री
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने खासकर नदी जोड़ो परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाना है। पश्चिमीवाहिनी की नदियों का समुद्र में जानेवाला पानी गोदावरी घाटी की ओर मोड़ना साथ ही पूर्व और पश्चिम विदर्भ नदी जोड़ो परियोजना से वहां के जिलों में सूखा के अंत को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रारंभिक बैठक में महाराष्ट्र की ओर से योजना विभाग के प्रधान सचिव सौरव विजय और सचिव शैला ए ने महाराष्ट्र की ओर से प्रस्तुतिकरण किया गया। विश्व बैंक के सहयोग से राज्य में कई परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और कुछ परियोजनाएँ चल रही हैं तो कुछ परियोजनाओं पर कार्यवाही शुरू है। विशेष रूप से, जलस्वराज्य परियोजना चरण एक, चरण दो, विभिन्न जल संसाधन परियोजनाओं में सुधार, महाराष्ट्र जल क्षेत्र सुधार परियोजना, कृषि प्रतिस्पर्धी परियोजनाएँ पहले ही पूरी हो चुकी हैं। वर्तमान में कृषि और ग्रामीण विकास की स्मार्ट परियोजना, जल संसाधन परियोजनाओं की सुरक्षा, सुधार, कार्यक्षमता और रखरखाव की परियोजना इसके अलावा पोकरा जैसी परियोजना भी शुरू हैं। कौशल विकास सतर्कता परियोजना, पर्यावरण को लेकर एमआरडीपी जैसी परियोजनाओं पर कार्यवाही शुरू है।
विश्व बैंक से उम्मीदें
इसके अलावा नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना, मुंबई महानगर में परिवहन में सुधार परियोजना, हरित ऊर्जा, राज्य के हर जिले में आर्थिक विकास और नागरिकों को तेज़ सेवाएँ प्रदान करने जैसी परियोजनाओं के संबंध में विश्व बैंक से सहयोग अपेक्षित है, इस बात पर प्रस्तुतीकरण में जोर दिया गया है। इस अवसर पर विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों ने विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा की।

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