मुंबई, अगस्त (महासंवाद)
राज्य सरकार द्वारा रायगढ़ जिले के बाढ़ संभावित गांवों में आपातकालीन प्रबंधन हेतु विभिन्न उपाय किये जा रहे हैं। राहत और पुनर्वास मंत्री अनिल पाटिल ने विधान परिषद को बताया कि कोंकण आपदा न्यूनीकरण परियोजना को लागू करने के लिए 1,032 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सदस्य प्रसाद लाड ने मानसून सत्र के दौरान रायगढ़ जिले के 355 गांवों में बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को लेकर सवाल उठाया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राहत एवं पुनर्वास मंत्री श्री पाटिल बोल रहे थे।
मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि रायगढ़ जिले में वरिष्ठ भूवैज्ञानिकों और भूजल सर्वेक्षण और विकास एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, पहाड़ की चोटी और तलहटी पर 103 गांव भूस्खलन के खतरे में हैं, जिनमें से 9 बेहद खतरनाक हैं, 11 मध्यम खतरनाक हैं और 83 कम खतरनाक हैं। इसमें भूस्खलन संभावित गांव, बाढ़ संभावित गांवों में आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न होती है तो अस्थायी रूप सें स्थानांतरण के लिए स्कूल, समाज मंदिर आदि जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
आपदा पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए ग्रामवार तलाठी, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम सेवक, कृषि सहायक, कृषि सेवक, कोतवाल, पुलिस पाटिल, आपदा मित्र, सखी, स्थानीय गैर सरकारी संगठनों के सदस्यों का गठन किया गया है। साथ ही, किसी भी आपदा पर तत्काल प्रतिक्रिया के लिए जिले के सभी कार्यालयों में 24x7 घंटे तालुका नियंत्रण कक्ष चालू कर दिए गए हैं। साथ ही सरकार की ओर से आपातकालीन प्रबंधन के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि कोंकण आपदा न्यूनीकरण परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए 1032 करोड़ रुपये के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है।
राज्य सरकार द्वारा रायगढ़ जिले के बाढ़ संभावित गांवों में आपातकालीन प्रबंधन हेतु विभिन्न उपाय किये जा रहे हैं। राहत और पुनर्वास मंत्री अनिल पाटिल ने विधान परिषद को बताया कि कोंकण आपदा न्यूनीकरण परियोजना को लागू करने के लिए 1,032 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सदस्य प्रसाद लाड ने मानसून सत्र के दौरान रायगढ़ जिले के 355 गांवों में बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को लेकर सवाल उठाया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राहत एवं पुनर्वास मंत्री श्री पाटिल बोल रहे थे।
मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि रायगढ़ जिले में वरिष्ठ भूवैज्ञानिकों और भूजल सर्वेक्षण और विकास एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, पहाड़ की चोटी और तलहटी पर 103 गांव भूस्खलन के खतरे में हैं, जिनमें से 9 बेहद खतरनाक हैं, 11 मध्यम खतरनाक हैं और 83 कम खतरनाक हैं। इसमें भूस्खलन संभावित गांव, बाढ़ संभावित गांवों में आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न होती है तो अस्थायी रूप सें स्थानांतरण के लिए स्कूल, समाज मंदिर आदि जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
आपदा पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए ग्रामवार तलाठी, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम सेवक, कृषि सहायक, कृषि सेवक, कोतवाल, पुलिस पाटिल, आपदा मित्र, सखी, स्थानीय गैर सरकारी संगठनों के सदस्यों का गठन किया गया है। साथ ही, किसी भी आपदा पर तत्काल प्रतिक्रिया के लिए जिले के सभी कार्यालयों में 24x7 घंटे तालुका नियंत्रण कक्ष चालू कर दिए गए हैं। साथ ही सरकार की ओर से आपातकालीन प्रबंधन के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि कोंकण आपदा न्यूनीकरण परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए 1032 करोड़ रुपये के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है।

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