हड़पसर, अगस्त (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
पुणे, हड़पसर, फुरसुंगी एवं शेवालेवाड़ी परिसर से होकर बहनेवाली नई मुला-मुठा नहर की सुरंग को हड़पसर तक ही रोका जाए। यह मांग महाराष्ट्र राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भारतीय जनता पार्टी पुणे जिला के उपाध्यक्ष राहुल शेवाले ने की है।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए राहुल शेवाले ने कहा कि राज्य सरकार ने खडकवासला से फुरसुंगी तक नई मुला मुठा नहर का पानी सुरंग के माध्यम से ले जाने के काम को हाल ही में मंजूरी दी गई है। सरकार की ओर से उस काम का सर्वे कर लिया गया है और आगे का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। सरकार ने कहा है कि अगर उक्त नहर का पानी सुरंग से लिया जाये तो दो टीएमसी पानी की बचत होगी।
वर्तमान में तथ्यों पर नजर डालें तो खडकवासला से हड़पसर तक नहर के दोनों किनारों पर निवासी क्षेत्र है और बड़ी संख्या में इमारतें खड़ी हो गई हैं।
वहां खेती की मात्रा कम हो गई है। अतः इस क्षेत्र में सुरंगों के माध्यम से पानी ले जाना उपयुक्त है, लेकिन हड़पसर के आगे के हिस्से में यानी साडेसतरानली, मांजरी बुद्रुक, शेवालेवाड़ी, फुरसुंगी, लोनी और उससे आगे के गांवों में कई किसान हजारों एकड़ में खेती कर गन्ना, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, केला और सब्जियां जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। इस क्षेत्र में कृषि के लिए आवश्यक हजारों कुएं और बोरहोल हैं। ये कुएं और कुपनलिकाएं प्राकृतिक रूप से क्षेत्र से बहनेवाली पुरानी और नई नहरों से रिसने वाले पानी से जुड़ी हुई हैं, जिससे कृषि के लिए आवश्यक पानी कुछ हद तक उपलब्ध हो जाता है। लाखों किसानों की आजीविका इसी खेती पर निर्भर है। यदि नहर के पानी को हड़पसर के आगे के भाग में बंद सुरंगों तक ले जाया जाता है तो किसानों के कुओं और बोरहोल तक पानी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो जाएगा और यहां की खेती समाप्त होने से किसानों के सामने भुखमरी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस कारण यदि यह सुरंग फुरसुंगी की बजाय हड़पसर तक ही बनाई जाए तो यहां की खेती भी बचेगी और किसान भी बचे रहेंगे। हमारा आपसे अनुरोध है कि इस ओर गंभीरता से ध्यान दें और हमें न्याय दें।
पुणे, हड़पसर, फुरसुंगी एवं शेवालेवाड़ी परिसर से होकर बहनेवाली नई मुला-मुठा नहर की सुरंग को हड़पसर तक ही रोका जाए। यह मांग महाराष्ट्र राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भारतीय जनता पार्टी पुणे जिला के उपाध्यक्ष राहुल शेवाले ने की है।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए राहुल शेवाले ने कहा कि राज्य सरकार ने खडकवासला से फुरसुंगी तक नई मुला मुठा नहर का पानी सुरंग के माध्यम से ले जाने के काम को हाल ही में मंजूरी दी गई है। सरकार की ओर से उस काम का सर्वे कर लिया गया है और आगे का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। सरकार ने कहा है कि अगर उक्त नहर का पानी सुरंग से लिया जाये तो दो टीएमसी पानी की बचत होगी।
वर्तमान में तथ्यों पर नजर डालें तो खडकवासला से हड़पसर तक नहर के दोनों किनारों पर निवासी क्षेत्र है और बड़ी संख्या में इमारतें खड़ी हो गई हैं।
वहां खेती की मात्रा कम हो गई है। अतः इस क्षेत्र में सुरंगों के माध्यम से पानी ले जाना उपयुक्त है, लेकिन हड़पसर के आगे के हिस्से में यानी साडेसतरानली, मांजरी बुद्रुक, शेवालेवाड़ी, फुरसुंगी, लोनी और उससे आगे के गांवों में कई किसान हजारों एकड़ में खेती कर गन्ना, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, केला और सब्जियां जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। इस क्षेत्र में कृषि के लिए आवश्यक हजारों कुएं और बोरहोल हैं। ये कुएं और कुपनलिकाएं प्राकृतिक रूप से क्षेत्र से बहनेवाली पुरानी और नई नहरों से रिसने वाले पानी से जुड़ी हुई हैं, जिससे कृषि के लिए आवश्यक पानी कुछ हद तक उपलब्ध हो जाता है। लाखों किसानों की आजीविका इसी खेती पर निर्भर है। यदि नहर के पानी को हड़पसर के आगे के भाग में बंद सुरंगों तक ले जाया जाता है तो किसानों के कुओं और बोरहोल तक पानी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो जाएगा और यहां की खेती समाप्त होने से किसानों के सामने भुखमरी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस कारण यदि यह सुरंग फुरसुंगी की बजाय हड़पसर तक ही बनाई जाए तो यहां की खेती भी बचेगी और किसान भी बचे रहेंगे। हमारा आपसे अनुरोध है कि इस ओर गंभीरता से ध्यान दें और हमें न्याय दें।

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