पुणे, सितंबर (जिमाका)
‘चला जाणूया नदीला’ पहल के तहत किये गये कार्यों के आधार पर एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए और गतिविधियों में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाए। यह अपील वन विभाग के प्रधान सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी ने की है।
टेलीविजन प्रणाली के माध्यम से आयोजित की गई समीक्षा बैठक में पुणे विभागीय आयुक्त सौरभ राव, जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख, मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण, सांस्कृतिक कार्य संचालक बिभीषण चावरे, डॉ. सुमंत पांडे, नरेंद्र चुग, पुणे विभाग जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, वन, जलसंपदा, सांस्कृतिक कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
श्री.रेड्डी ने कहा कि राज्य की हर नदी से जुड़े विषय अलग-अलग होंगे। अत: गतिविधि की एक निश्चित प्रक्रिया तय कर जन-जागरूकता के उपाय किये जाने चाहिए। नदी संरक्षण एवं नदी प्रदूषण को कम करने के लिए संबंधित पक्षों के साथ एक चर्चासत्र आयोजित किया जाना चाहिए। इसमें सामने आए बिंदुओं के आधार पर प्रक्रियाएं तय की जाएं। जनभागीदारी बढ़ाने के लिए जनजागरूकता के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया के माध्यम से अच्छे संदेश और किये जा रहे कार्यों की जानकारी प्रसारित की जानी चाहिए। पहल के माध्यम से किए गए कार्यों के आधार पर एक समेकित रिपोर्ट तैयार करें और सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने की पहल पर विचार करें।
विभागीय आयुक्त श्री राव ने कहा कि प्रदूषण को कम करना, सौंदर्यीकरण और बाढ़ नियंत्रण जैसे तीन स्तरों पर पुणे विभाग में गतिविधियां लागू की जा रही हैं। विभाग की 20 नदियों का चयन प्रारंभिक तौर पर किया गया है। ‘नमामि चंद्रभागा’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से नदी तल को विकसित करने का काम किया जा रहा है। 5 हजार अधिक आबादी रहनेवाले गांव का प्रदूषित पानी नदी में न जाए इसलिए ग्रामपंचायत में गंदे पानी का ऑडिट कराकर शुद्धिकरण में आ रही कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निधि उपलब्ध करायी जा रही है। पुणे में ‘जायका’ योजना के जरिए सीवेज शुद्धिकरण काम किया जाएगा। राम नदी जैसी महत्वपूर्ण नदियों को पुनर्जीवित करने और शहर के नदी तटों पर कचरे के अवैध डंपिंग को रोकने के लिए उपाय किए गए हैं।
डॉ. देशमुख ने कहा कि ‘चला जाणूया नदीला’ पहल के तहत जिले में सामाजिक संगठनों के सहयोग से काम शुरू कर दिया गया है। उसके लिए समन्वय अधिकारियों की बैठकें हुईं। पुणे महानगरपालिका शिक्षा, खान विभाग और जल संसाधन विभाग ने नदीवार समन्वय पदाधिकारी नियुक्त किये हैं। जिले की पांच नदियों का भी सर्वेक्षण किया गया है, अपेक्षित उपायों को जिला वार्षिक नवाचार योजना के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा। इंद्रायणी नदी के शुद्धिकरण के लिए कार्यक्रम चलाया गया है। राष्ट्रीय हरित पंचाट की सिफ़ारिशों के अनुरूप उपायों पर विचार किया जा रहा है।
इस अवसर पर श्री पांडे द्वारा गतिविधि की जानकारी दी गयी। पुणे, सातारा और सोलापुर में अच्छा काम हो रहा है। पुणे विभाग में 25 नदियों के लिए 75 नदी रक्षक काम कर रहे हैं। महेंद्र महाजन ने सोलापुर जिले में कासालगंगा नदी को लेकर आयोजित गतिविधियों की सफलता की जानकारी दी। सातारा जिले के रमाकांत कुलकर्णी और सोलापुर जिले के रवींद्र होराल ने भी सूचना दी।
‘चला जाणूया नदीला’ पहल के तहत किये गये कार्यों के आधार पर एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए और गतिविधियों में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाए। यह अपील वन विभाग के प्रधान सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी ने की है।
टेलीविजन प्रणाली के माध्यम से आयोजित की गई समीक्षा बैठक में पुणे विभागीय आयुक्त सौरभ राव, जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख, मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण, सांस्कृतिक कार्य संचालक बिभीषण चावरे, डॉ. सुमंत पांडे, नरेंद्र चुग, पुणे विभाग जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, वन, जलसंपदा, सांस्कृतिक कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
श्री.रेड्डी ने कहा कि राज्य की हर नदी से जुड़े विषय अलग-अलग होंगे। अत: गतिविधि की एक निश्चित प्रक्रिया तय कर जन-जागरूकता के उपाय किये जाने चाहिए। नदी संरक्षण एवं नदी प्रदूषण को कम करने के लिए संबंधित पक्षों के साथ एक चर्चासत्र आयोजित किया जाना चाहिए। इसमें सामने आए बिंदुओं के आधार पर प्रक्रियाएं तय की जाएं। जनभागीदारी बढ़ाने के लिए जनजागरूकता के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया के माध्यम से अच्छे संदेश और किये जा रहे कार्यों की जानकारी प्रसारित की जानी चाहिए। पहल के माध्यम से किए गए कार्यों के आधार पर एक समेकित रिपोर्ट तैयार करें और सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने की पहल पर विचार करें।
विभागीय आयुक्त श्री राव ने कहा कि प्रदूषण को कम करना, सौंदर्यीकरण और बाढ़ नियंत्रण जैसे तीन स्तरों पर पुणे विभाग में गतिविधियां लागू की जा रही हैं। विभाग की 20 नदियों का चयन प्रारंभिक तौर पर किया गया है। ‘नमामि चंद्रभागा’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से नदी तल को विकसित करने का काम किया जा रहा है। 5 हजार अधिक आबादी रहनेवाले गांव का प्रदूषित पानी नदी में न जाए इसलिए ग्रामपंचायत में गंदे पानी का ऑडिट कराकर शुद्धिकरण में आ रही कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निधि उपलब्ध करायी जा रही है। पुणे में ‘जायका’ योजना के जरिए सीवेज शुद्धिकरण काम किया जाएगा। राम नदी जैसी महत्वपूर्ण नदियों को पुनर्जीवित करने और शहर के नदी तटों पर कचरे के अवैध डंपिंग को रोकने के लिए उपाय किए गए हैं।
डॉ. देशमुख ने कहा कि ‘चला जाणूया नदीला’ पहल के तहत जिले में सामाजिक संगठनों के सहयोग से काम शुरू कर दिया गया है। उसके लिए समन्वय अधिकारियों की बैठकें हुईं। पुणे महानगरपालिका शिक्षा, खान विभाग और जल संसाधन विभाग ने नदीवार समन्वय पदाधिकारी नियुक्त किये हैं। जिले की पांच नदियों का भी सर्वेक्षण किया गया है, अपेक्षित उपायों को जिला वार्षिक नवाचार योजना के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा। इंद्रायणी नदी के शुद्धिकरण के लिए कार्यक्रम चलाया गया है। राष्ट्रीय हरित पंचाट की सिफ़ारिशों के अनुरूप उपायों पर विचार किया जा रहा है।
इस अवसर पर श्री पांडे द्वारा गतिविधि की जानकारी दी गयी। पुणे, सातारा और सोलापुर में अच्छा काम हो रहा है। पुणे विभाग में 25 नदियों के लिए 75 नदी रक्षक काम कर रहे हैं। महेंद्र महाजन ने सोलापुर जिले में कासालगंगा नदी को लेकर आयोजित गतिविधियों की सफलता की जानकारी दी। सातारा जिले के रमाकांत कुलकर्णी और सोलापुर जिले के रवींद्र होराल ने भी सूचना दी।

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