पुणे, सितंबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
08 सितंबर 2023 को अपराह्न 03.00 बजे प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे कार्यालय के मध्यवर्ती सभागृह में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। राजभाषा के इस महापर्व में प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे के महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, गोवा में स्थित 109 अधीनस्थ कार्यालयों को भी वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जोड़ा गया। प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे संगठन के स्तर पर प्रथम बार संगठन के सर्वप्रभारी डॉ. राजीव एस. चव्हाण, भा.र.ले.से. रा.र.अ. प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे के कुशाग्र मार्गदर्शन में दिनांक 01.09.2023 से दिनांक 08.09.2023 तक विभिन्न प्रतियोगिताओं यथा हिंदी निबंध प्रतियोगिता, हिंदी स्वरचित कविता प्रतियोगिता, हिंदी पोस्टर प्रतियोगिता, हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता, हिंदी प्रश्नमंच प्रतियोगिता का सुव्यवस्थित तरीके से आकर्षक रूपक आयोजन किया गया। उक्त सभी प्रतियोगिताओं में मुख्य कार्यालय तथा संगठन के प्रतिभागियों ने पूरे उमंग, उत्साह, उल्लास एवं जोश के साथ भाग लिया। उक्त कार्यक्रम में श्री वी.एस. कांबले, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक श्री राजापुरे विक्रम अशोक, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा उप नियंत्रक, श्रीमती एस.आर.बोईड, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक, श्री स्वप्निल हनमाने, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा वरिष्ठ सहायक नियंत्रक, श्री आर.के.बिंद्रू, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक, श्री एम.वेकंट राव, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक तथा श्रीमती वैशाली डिसूजा, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक भी सहभागी थे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
उक्त महान एवं शानदार कार्यक्रम का ईश्वर के भजन गायन से शुभारंभ हुआ। कार्यालय के कार्मिकों ने मधुर सुर में ईश्वर भक्ति गीत गाकर पूरे सभागृह को मंत्रमुग्ध कर दिया। हमको मन की शक्ति देना, ऐ मालिक तेरे बंदे हम ने श्रोतागणों एवं उपस्थित गणमान्य जनों के बीच समा बांध दिया।
श्री बी.एस. कांबले, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक ने मुख्य अतिथि डॉ. राजीव एस. चव्हाण, भा.र.ले.से. एन.डी.सी. प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे को पुष्पगुच्छ देकर सादरपूर्वक स्वागत अभिवादन किया। मुख्य अतिथि महोदय तथा अन्य भारतीय रक्षा लेखा सेवा अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर पूरे हॉल को ज्योतिर्मय कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अनिल कुडिया, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं का सारांश सभा के समक्ष प्रस्तुत किया। सहायक निदेशक महोदय ने सभा को इस तथ्य से आगाह किया कि प्रधान नियंत्रक महोदय के मार्गदर्शन तथा अध्यक्षता में प्रथम बार विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन संगठन के स्तर पर सफलतापूर्वक किया गया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों के उत्साहवर्धक योगदान ने प्रतियोगिताओं को सफल बनाने में अहम भूमिका अदा की ।
तत्पश्चात, श्री बी.एस.कांबले, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक महोदय ने कार्यालय तथा संगठन में हुए राजभाषा की स्थिति, गति एवं प्रगति की गहन समीक्षा की। प्रधान नियंत्रक महोदय के कुशल मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी निर्णयों के बलबूते प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे ने क, ख एवं ग सभी क्षेत्रों में वार्षिक कार्यक्रम के अनुसार लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। संयुक्त नियंत्रक महोदय ने सभा को यह सूचित किया कि समय के साथ किस तरह हिंदी देश- विदेश में फैलती एवं लोकप्रिय भी होती जा रही है। आज देश के अहिंदी राज्यों में भी हिंदी को बड़े चाव से पढ़ी, लिखी एवं समझी जाती है।
प्रधान नियंत्रक महोदय ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सर्वप्रथम भाषा के इस महापर्व में उपस्थित भारतीय रक्षा लेखा सेवा अधिकारियों तथा कर्मचारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। महोदय ने सभा को 14 सितंबर, 1949 के दिन के महत्व, गरिमा व इसके महिमा से अवगत कराया। संविधान ने 14 सितंबर, 1949 को सर्वसम्मति से हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकृत करने का प्रस्ताव पारित किया था। वर्ष 1953 को राजभाषा प्रचारिणी सभा ने प्रथम बार 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया। इसके पश्चात हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। महोदय ने वर्ष 1963 को पारित हुए राजभाषा अधिनियम से सभी को परिचित कराया। राजभाषा अधिनियम 1963 केंद्र सरकार के कार्यालयों में प्रयुक्कत होने वाली राजभाषा तथा इसके प्रचार, प्रसार के मुख्य कारकों का ही सार है।
प्रधान नियंत्रक महोदय ने सभा को यह अवगत कराया कि यह देश बहु भाषा-भाषी वाला देश है। यह देश भाषाओं का भवसागर है। संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित 22 भाषाओं में से एक भाषा हिंदी भाषा है। अतः इस वैविध्यपूर्ण, विविधता से भरी देश में किसी भी एक देश का राष्ट्रभाषा बनना संभव नहीं है। स्वाधीनता के पश्चात जब हिंदी को राजभाषा के रूप में पूरे देश भर में लागू करने की बात की गई, तब दक्षिण भारत के कुछ राज्यों से पुरजोर हुआ। तत्पश्चात अंग्रेजी एवं हिंदी आधिकारिक रूप से भारत सरकार की कार्यकारिणी की भाषा बनी रही, परंतु आज समय एवं परिस्थिति बदली है। आज हिंदी को हर प्रांत, हर राज्य के लोग गर्मजोशी से अपना रहे हैं।
मुख्य अतिथि महोदय ने सभा को इस तथ्य के साथ सचेत किया कि आज भी हिंदी को हीनता की भावना से देखा जाता है। आज भी लोग हिंदी में बात करना हीनता का द्योतक मानते हैं। इसी कारण आजकल बच्चों को अंग्रेजी मीडियम वाले स्कूल में भर्ती करवाने की होड़ सी लगी हुई है। यदि हम इसी तरह हिंदी को शंका की दृष्टि से, हीन भावना की दृष्टि से देखते रहे तो हिंदी का उद्धार, उत्थान व हिंदी की प्रगति संभव नहीं होगी। हिंदी की प्रगति की डोर हमारे हाथों में ही है।
मुख्य अतिथि महोदय ने सभा को यह जानकारी दी कि किस तरह भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1975 में हिंदी के प्रचार - प्रसार के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया था। 1975 से भारत, मॉरीशस, यूनाइटेड किंगडम, त्रिनिदाद और टोबैगो, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विभिन्न देशों में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया। विश्व हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी, 2006 को मनाया गया था। तब से यह हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था।
प्रधान नियंत्रक महोदय ने सभा को यह भी सूचित किया कि हिंदी को सहज, सरल, प्रवाहमयी बनाने हेतु राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय सदैव प्रतिबद्ध है। हाल ही में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय ने ‘कंठस्थ सॉफ्टवेयर’ लॉन्च किया है, जिसकी सहायता से हिंदी से अंग्रेजी तथा अंग्रेजी से हिंदी भाषा में दैनंदिन कार्यालयीन कार्य सुगमता से संपन्न हो सकेंगे। साथ ही, महोदय ने यह भी सूचित किया कि राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय की ‘लीला सॉफ्टवेयर’ की सहायता से कोई भी अहिंदी भाषी आसानी से हिंदी भाषा सीख सकता है। यह सारे उपकरण दैनंदिन जीवन में हिंदी को प्रचार-प्रसार करने का सशक्त माध्यम है।
उक्त शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि महोदय ने प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र तथा नकद पुरस्कार से सम्मानित किया। महोदय ने सभी विजेताओं तथा प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को बधाइयाँ एवं शाबाशी दी तथा धन्यवाद भी दिया, जिनके कारण प्रतियोगिताओं का सफल एवं सुचारु रूप से क्रियान्वयन हो पाया।
अंत में डॉ. अनिल कुडिया, सहायक निदेशक (रा.भा.) ने हिंदी पखवाड़ा व समापन समारोह के कुशल प्रबंधन हेतु प्रशासन विभाग का धन्यवाद किया। साथ ही प्रतियोगिताओं के निर्णायकों का भी तहेदिल से मनपूर्वक आभार व्यक्त किया।
राष्ट्र गान के साथ समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन सुचारू रूप से श्रीमती कविता सत्तुरवार, वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी द्वारा किया गया।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा।
यह जानकारी पुणे रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी श्री महेश अय्यंगार द्वारा दी गई है।
08 सितंबर 2023 को अपराह्न 03.00 बजे प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे कार्यालय के मध्यवर्ती सभागृह में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। राजभाषा के इस महापर्व में प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे के महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, गोवा में स्थित 109 अधीनस्थ कार्यालयों को भी वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जोड़ा गया। प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे संगठन के स्तर पर प्रथम बार संगठन के सर्वप्रभारी डॉ. राजीव एस. चव्हाण, भा.र.ले.से. रा.र.अ. प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे के कुशाग्र मार्गदर्शन में दिनांक 01.09.2023 से दिनांक 08.09.2023 तक विभिन्न प्रतियोगिताओं यथा हिंदी निबंध प्रतियोगिता, हिंदी स्वरचित कविता प्रतियोगिता, हिंदी पोस्टर प्रतियोगिता, हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता, हिंदी प्रश्नमंच प्रतियोगिता का सुव्यवस्थित तरीके से आकर्षक रूपक आयोजन किया गया। उक्त सभी प्रतियोगिताओं में मुख्य कार्यालय तथा संगठन के प्रतिभागियों ने पूरे उमंग, उत्साह, उल्लास एवं जोश के साथ भाग लिया। उक्त कार्यक्रम में श्री वी.एस. कांबले, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक श्री राजापुरे विक्रम अशोक, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा उप नियंत्रक, श्रीमती एस.आर.बोईड, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक, श्री स्वप्निल हनमाने, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा वरिष्ठ सहायक नियंत्रक, श्री आर.के.बिंद्रू, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक, श्री एम.वेकंट राव, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक तथा श्रीमती वैशाली डिसूजा, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक भी सहभागी थे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
उक्त महान एवं शानदार कार्यक्रम का ईश्वर के भजन गायन से शुभारंभ हुआ। कार्यालय के कार्मिकों ने मधुर सुर में ईश्वर भक्ति गीत गाकर पूरे सभागृह को मंत्रमुग्ध कर दिया। हमको मन की शक्ति देना, ऐ मालिक तेरे बंदे हम ने श्रोतागणों एवं उपस्थित गणमान्य जनों के बीच समा बांध दिया।
श्री बी.एस. कांबले, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक ने मुख्य अतिथि डॉ. राजीव एस. चव्हाण, भा.र.ले.से. एन.डी.सी. प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे को पुष्पगुच्छ देकर सादरपूर्वक स्वागत अभिवादन किया। मुख्य अतिथि महोदय तथा अन्य भारतीय रक्षा लेखा सेवा अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर पूरे हॉल को ज्योतिर्मय कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अनिल कुडिया, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं का सारांश सभा के समक्ष प्रस्तुत किया। सहायक निदेशक महोदय ने सभा को इस तथ्य से आगाह किया कि प्रधान नियंत्रक महोदय के मार्गदर्शन तथा अध्यक्षता में प्रथम बार विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन संगठन के स्तर पर सफलतापूर्वक किया गया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों के उत्साहवर्धक योगदान ने प्रतियोगिताओं को सफल बनाने में अहम भूमिका अदा की ।
तत्पश्चात, श्री बी.एस.कांबले, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक महोदय ने कार्यालय तथा संगठन में हुए राजभाषा की स्थिति, गति एवं प्रगति की गहन समीक्षा की। प्रधान नियंत्रक महोदय के कुशल मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी निर्णयों के बलबूते प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे ने क, ख एवं ग सभी क्षेत्रों में वार्षिक कार्यक्रम के अनुसार लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। संयुक्त नियंत्रक महोदय ने सभा को यह सूचित किया कि समय के साथ किस तरह हिंदी देश- विदेश में फैलती एवं लोकप्रिय भी होती जा रही है। आज देश के अहिंदी राज्यों में भी हिंदी को बड़े चाव से पढ़ी, लिखी एवं समझी जाती है।
प्रधान नियंत्रक महोदय ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सर्वप्रथम भाषा के इस महापर्व में उपस्थित भारतीय रक्षा लेखा सेवा अधिकारियों तथा कर्मचारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। महोदय ने सभा को 14 सितंबर, 1949 के दिन के महत्व, गरिमा व इसके महिमा से अवगत कराया। संविधान ने 14 सितंबर, 1949 को सर्वसम्मति से हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकृत करने का प्रस्ताव पारित किया था। वर्ष 1953 को राजभाषा प्रचारिणी सभा ने प्रथम बार 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया। इसके पश्चात हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। महोदय ने वर्ष 1963 को पारित हुए राजभाषा अधिनियम से सभी को परिचित कराया। राजभाषा अधिनियम 1963 केंद्र सरकार के कार्यालयों में प्रयुक्कत होने वाली राजभाषा तथा इसके प्रचार, प्रसार के मुख्य कारकों का ही सार है।
प्रधान नियंत्रक महोदय ने सभा को यह अवगत कराया कि यह देश बहु भाषा-भाषी वाला देश है। यह देश भाषाओं का भवसागर है। संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित 22 भाषाओं में से एक भाषा हिंदी भाषा है। अतः इस वैविध्यपूर्ण, विविधता से भरी देश में किसी भी एक देश का राष्ट्रभाषा बनना संभव नहीं है। स्वाधीनता के पश्चात जब हिंदी को राजभाषा के रूप में पूरे देश भर में लागू करने की बात की गई, तब दक्षिण भारत के कुछ राज्यों से पुरजोर हुआ। तत्पश्चात अंग्रेजी एवं हिंदी आधिकारिक रूप से भारत सरकार की कार्यकारिणी की भाषा बनी रही, परंतु आज समय एवं परिस्थिति बदली है। आज हिंदी को हर प्रांत, हर राज्य के लोग गर्मजोशी से अपना रहे हैं।
मुख्य अतिथि महोदय ने सभा को इस तथ्य के साथ सचेत किया कि आज भी हिंदी को हीनता की भावना से देखा जाता है। आज भी लोग हिंदी में बात करना हीनता का द्योतक मानते हैं। इसी कारण आजकल बच्चों को अंग्रेजी मीडियम वाले स्कूल में भर्ती करवाने की होड़ सी लगी हुई है। यदि हम इसी तरह हिंदी को शंका की दृष्टि से, हीन भावना की दृष्टि से देखते रहे तो हिंदी का उद्धार, उत्थान व हिंदी की प्रगति संभव नहीं होगी। हिंदी की प्रगति की डोर हमारे हाथों में ही है।
मुख्य अतिथि महोदय ने सभा को यह जानकारी दी कि किस तरह भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1975 में हिंदी के प्रचार - प्रसार के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया था। 1975 से भारत, मॉरीशस, यूनाइटेड किंगडम, त्रिनिदाद और टोबैगो, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विभिन्न देशों में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया। विश्व हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी, 2006 को मनाया गया था। तब से यह हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था।
प्रधान नियंत्रक महोदय ने सभा को यह भी सूचित किया कि हिंदी को सहज, सरल, प्रवाहमयी बनाने हेतु राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय सदैव प्रतिबद्ध है। हाल ही में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय ने ‘कंठस्थ सॉफ्टवेयर’ लॉन्च किया है, जिसकी सहायता से हिंदी से अंग्रेजी तथा अंग्रेजी से हिंदी भाषा में दैनंदिन कार्यालयीन कार्य सुगमता से संपन्न हो सकेंगे। साथ ही, महोदय ने यह भी सूचित किया कि राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय की ‘लीला सॉफ्टवेयर’ की सहायता से कोई भी अहिंदी भाषी आसानी से हिंदी भाषा सीख सकता है। यह सारे उपकरण दैनंदिन जीवन में हिंदी को प्रचार-प्रसार करने का सशक्त माध्यम है।
उक्त शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि महोदय ने प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र तथा नकद पुरस्कार से सम्मानित किया। महोदय ने सभी विजेताओं तथा प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को बधाइयाँ एवं शाबाशी दी तथा धन्यवाद भी दिया, जिनके कारण प्रतियोगिताओं का सफल एवं सुचारु रूप से क्रियान्वयन हो पाया।
अंत में डॉ. अनिल कुडिया, सहायक निदेशक (रा.भा.) ने हिंदी पखवाड़ा व समापन समारोह के कुशल प्रबंधन हेतु प्रशासन विभाग का धन्यवाद किया। साथ ही प्रतियोगिताओं के निर्णायकों का भी तहेदिल से मनपूर्वक आभार व्यक्त किया।
राष्ट्र गान के साथ समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन सुचारू रूप से श्रीमती कविता सत्तुरवार, वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी द्वारा किया गया।
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा।
यह जानकारी पुणे रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी श्री महेश अय्यंगार द्वारा दी गई है।
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