जयसिंहपुर, सितंबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
कोल्हापुर जिले के शिरोल तालुका के मौजे धरनगुट्टी गांव के सुपुत्र डॉ. सुनील दादा पाटिल को भारत सरकार द्वारा दिए जानेवाले अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ के लिए साहित्य विभाग द्वारा नामांकित किया गया है।
डॉ. सुनील पाटिल पिछले 25-30 वर्षों से साहित्य के क्षेत्र में बहुत प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं। पढ़ना लगभग हर किसी का शौक होता है, लेकिन इस पढ़ने की भी कुछ सीमाएं हैं, पढ़ने के लिए समय पाने के लिए व्यक्ति छुट्टियों का इंतज़ार करता है। डॉ. सुनील पाटिल ने अपने पढ़ने-लिखने के शौक को पूरा करने के लिए ‘प्रिंसिपल’ की नौकरी छोड़ दी और वर्तमान में विशेष पुस्तकों के लिए एक अलग घर बनाकर पठन आंदोलन में काम कर रहे हैं। नौकरी में अब तक बहुत संघर्ष किया, तनाव सहा, लेकिन डॉ. सुनील पाटिल ने कहा कि वह अपनी अगली जिंदगी पढ़ने-लिखने के शौक के लिए बिताएंगे।
डॉ. पाटिल 1990 के बाद गंभीरता से लिखनेवाले कवि हैं। उन्होंने अब तक सैकड़ों पुस्तकों का संपादन एवं लेखन किया है तथा कुछ हजार पुस्तकों का मुद्रण एवं प्रकाशन किया है। साहित्य के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ के लिए नामांकित किया गया है और हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली से इस संबंध में एक आधिकारिक ईमेल प्राप्त हुआ है।
स्वस्थ एवं सुसंस्कृत समाज के निर्माण एवं पढ़ने की संस्कृति को बढ़ाने हेतु डॉ. सुनील पाटिल का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने सार्वजनिक ग्रंथालयों को सशक्त बनाने के लिए कदम उठाए हैं। इसमें सैकड़ों सार्वजनिक ग्रंथालयों और जेल ग्रंथालयों को बड़ी मात्रा में किताबें उपहार में देकर अपना अमूल्य योगदान दिया है। उन्हें पहले भी अपने साहित्यिक और प्रकाशन कार्य के लिए कई राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उनके नाम कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड हैं।
एक उद्यमशील व्यक्तित्व के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कवि-लेखक-संपादक और प्रकाशक डॉ. सुनील पाटिल का कार्य युवाओं के लिए एक आदर्श और पूरे समाज के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार अपमान और गरीबी का जीवन जीना पड़े तो एक समय ऐसा आएगा कि वह क्रोधित हो जाएगा और जो प्रगति करेगा वह पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर देगा ! कुछ लोग अपने भविष्य के लिए आवश्यक गुणों के साथ पैदा होते हैं। डॉ. सुनील पाटिल जो विश्व प्रसिद्ध कवितासागर पब्लिशिंग हाउस के संस्थापक निदेशक हैं। उन्हें छोटी उम्र से ही पढ़ने-लिखने में रुचि थी। बचपन में उनके घर की स्थिति बहुत ख़राब थी, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत, टैलेंट और प्रतिभाओं के दम पर आज अपना नाम कमाया है। हाल ही में वर्तनी के प्रति काफी अरुचि दिखाई दे रही है। हमारी भावनाओं और विचारों की वाहक भाषा और लिपि शुद्ध, स्पष्ट और सुंदर होनी चाहिए। पहले वर्तनी या लिखावट को सुधारने का प्रयास किया जाता था, लेकिन अब यह काफी हद तक उपेक्षित है, जो बच्चे चित्रकारी के शौकीन हैं उन्हें अपनी लिखावट सुधारने में काफी मदद मिलती है। लिखावट को अक्सर हमारे स्वभाव का दर्पण माना जाता है, इसलिए वे पढ़ने की संस्कृति के साथ-साथ लेखन संस्कृति की ओर विभिन्न विद्यालयों के माध्यम से अपनी पत्नी श्रीमती संजीवनी के साथ लगातार प्रयास कर रहे है। उनके कार्य की सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए और उनके कार्य को आगे बढ़ाने के लिए मौजे धरनगुट्टी गांव की ओर से उन्हें हर तरह का सहयोग दिया जा रहा है। उनकी इस खास उपलब्धि के लिए हर स्तर से सराहना और बधाई दी जा रही है।
कोल्हापुर जिले के शिरोल तालुका के मौजे धरनगुट्टी गांव के सुपुत्र डॉ. सुनील दादा पाटिल को भारत सरकार द्वारा दिए जानेवाले अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ के लिए साहित्य विभाग द्वारा नामांकित किया गया है।
डॉ. सुनील पाटिल पिछले 25-30 वर्षों से साहित्य के क्षेत्र में बहुत प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं। पढ़ना लगभग हर किसी का शौक होता है, लेकिन इस पढ़ने की भी कुछ सीमाएं हैं, पढ़ने के लिए समय पाने के लिए व्यक्ति छुट्टियों का इंतज़ार करता है। डॉ. सुनील पाटिल ने अपने पढ़ने-लिखने के शौक को पूरा करने के लिए ‘प्रिंसिपल’ की नौकरी छोड़ दी और वर्तमान में विशेष पुस्तकों के लिए एक अलग घर बनाकर पठन आंदोलन में काम कर रहे हैं। नौकरी में अब तक बहुत संघर्ष किया, तनाव सहा, लेकिन डॉ. सुनील पाटिल ने कहा कि वह अपनी अगली जिंदगी पढ़ने-लिखने के शौक के लिए बिताएंगे।
डॉ. पाटिल 1990 के बाद गंभीरता से लिखनेवाले कवि हैं। उन्होंने अब तक सैकड़ों पुस्तकों का संपादन एवं लेखन किया है तथा कुछ हजार पुस्तकों का मुद्रण एवं प्रकाशन किया है। साहित्य के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ के लिए नामांकित किया गया है और हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली से इस संबंध में एक आधिकारिक ईमेल प्राप्त हुआ है।
स्वस्थ एवं सुसंस्कृत समाज के निर्माण एवं पढ़ने की संस्कृति को बढ़ाने हेतु डॉ. सुनील पाटिल का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने सार्वजनिक ग्रंथालयों को सशक्त बनाने के लिए कदम उठाए हैं। इसमें सैकड़ों सार्वजनिक ग्रंथालयों और जेल ग्रंथालयों को बड़ी मात्रा में किताबें उपहार में देकर अपना अमूल्य योगदान दिया है। उन्हें पहले भी अपने साहित्यिक और प्रकाशन कार्य के लिए कई राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उनके नाम कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड हैं।
एक उद्यमशील व्यक्तित्व के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कवि-लेखक-संपादक और प्रकाशक डॉ. सुनील पाटिल का कार्य युवाओं के लिए एक आदर्श और पूरे समाज के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार अपमान और गरीबी का जीवन जीना पड़े तो एक समय ऐसा आएगा कि वह क्रोधित हो जाएगा और जो प्रगति करेगा वह पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर देगा ! कुछ लोग अपने भविष्य के लिए आवश्यक गुणों के साथ पैदा होते हैं। डॉ. सुनील पाटिल जो विश्व प्रसिद्ध कवितासागर पब्लिशिंग हाउस के संस्थापक निदेशक हैं। उन्हें छोटी उम्र से ही पढ़ने-लिखने में रुचि थी। बचपन में उनके घर की स्थिति बहुत ख़राब थी, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत, टैलेंट और प्रतिभाओं के दम पर आज अपना नाम कमाया है। हाल ही में वर्तनी के प्रति काफी अरुचि दिखाई दे रही है। हमारी भावनाओं और विचारों की वाहक भाषा और लिपि शुद्ध, स्पष्ट और सुंदर होनी चाहिए। पहले वर्तनी या लिखावट को सुधारने का प्रयास किया जाता था, लेकिन अब यह काफी हद तक उपेक्षित है, जो बच्चे चित्रकारी के शौकीन हैं उन्हें अपनी लिखावट सुधारने में काफी मदद मिलती है। लिखावट को अक्सर हमारे स्वभाव का दर्पण माना जाता है, इसलिए वे पढ़ने की संस्कृति के साथ-साथ लेखन संस्कृति की ओर विभिन्न विद्यालयों के माध्यम से अपनी पत्नी श्रीमती संजीवनी के साथ लगातार प्रयास कर रहे है। उनके कार्य की सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए और उनके कार्य को आगे बढ़ाने के लिए मौजे धरनगुट्टी गांव की ओर से उन्हें हर तरह का सहयोग दिया जा रहा है। उनकी इस खास उपलब्धि के लिए हर स्तर से सराहना और बधाई दी जा रही है।

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