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चुनावी साक्षरता मंडल लोकतांत्रिक मूल्यों की शिक्षा देनेवाला एक मंच : मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत देशपांडे

पुणे, अक्टूबर (जिमाका)
चुनावी साक्षरता मंडलों का काम केवल मतदाता पंजीकरण तक ही सीमित नहीं है बल्कि लोकतंत्र के महत्व, इसके विभिन्न घटकों और मतदाताओं को उनकी भूमिका के बारे में शिक्षित करने का यह एक मंच है। ऐसा प्रतिपादन मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत देशपांडे ने व्यक्त किया। 
जिला निर्वाचन अधिकारी का कार्यालय, वर्शिप अर्थ फाउंडेशन व जिले के 108 स्कूल व महाविद्यालयों में निर्वाचन साक्षरता मंडल के संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समझौता ज्ञापन कार्यक्रम में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख, उपजिला चुनाव अधिकारी मीनल कलसकर, स्वीप की नोडल अधिकारी अर्चना तांबे, वर्शिप अर्थ फाउंडेशन के संस्थापक पराग मते, व्यवस्थापकीय संचालक तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी तेजस गुजराथी, स्पेक्ट्रम अकादमी के संचालक सुनील पाटिल, चुनावी साक्षरता मंडल के राज्यस्तरीय समन्यवक अल्ताफ पिरजादे, विविध महाविद्यालयों के प्राचार्य, समन्वयक अधिकारी आदि उपस्थित थे। 
श्री देशपांडे ने कहा कि छात्रों में लोकतंत्र के प्रति जागरूक करना और लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना को मजबूत करना है ताकि वे समाज में अच्छे नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभा सकें। यह चुनाव साक्षरता मंडल की स्थापना के पीछे की भूमिका है, इसलिए प्रत्येक स्कूल और महाविद्यालय में एक चुनाव साक्षरता मंडल होना चाहिए। कुछ इस तरह की भूमिका भारत चुनाव आयोग की है। प्रत्येक विद्यालय एवं महाविद्यालय को इसमें भाग लेना चाहिए तथा नये मतदाताओं का पंजीकरण कराना चाहिए। ऐसी अपील भी उन्होंने इस अवसर पर की। 
शहरी परिसर में और युवाओं में मतदान के प्रति काफी उदासीनता दिखाई देती है। आज उन्हें लोकतंत्र के महत्व, चुनाव के प्रति अपने अधिकारों के बारे में समझाने की जरूरत है। मतदान प्रक्रिया में समावेशिता एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। उसके तहत समाज में महिलाओं, विकलांगों, तृतीयपंथी, घुमंतू जनजातियों, अनुसूचित जनजातियों आदि के बीच चुनावी प्रक्रिया के बारे में बड़े पैमाने पर जन जागरूकता पैदा की जा रही है। इसके लिए संबंधित संस्थाओं में सामाजिक संगठनों एवं व्यक्तियों के सहयोग से कार्य किया जा रहा है।
मतदान प्रक्रिया में 18 से 19 और 20 से 29 आयु वर्ग के युवाओं की भागीदारी जनसंख्या के अनुपात में कम है, जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। भविष्य में स्कूल-महाविद्यालयों में भी मतदाता जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। ईवीएम मशीनों का प्रदर्शन किया जाएगा। राष्ट्रीय मतदाता दिवस एवं संविधान दिवस के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे तथा इसके लिए विद्यालयों एवं महाविद्यालयों को विभिन्न नवीन गतिविधियाँ क्रियान्वित कर इनमें भाग लेना चाहिए। इस तरह की गतिविधि से विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखार मिलेगा। उनके काम की टिप्पणी मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा ली जाएगी। 
पुणे जिले में लागू इस पथदर्शी पहल को राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाना शुरू हो गया है। इसके लिए समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिष्ठित व्यक्ति इसमें भाग ले रहे हैं। इस पहल को उत्साहवर्धक प्रतिसाद भी मिल रहा है। इन गतिविधियों को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा रिकॉर्ड किया गया है और आयोग के आगामी दौरे के दौरान जिले के कॉलेज का दौरा करने की योजना बनाई जा रही है।

मतदाता पंजीकरण के लिए समाज के सभी वर्गों को एक साथ आना चाहिए : जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख
जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख ने कहा कि जिले में 21 निर्वाचन क्षेत्र, 80 लाख मतदाता और 8 हजार से अधिक मतदान केंद्र हैं, इसलिए चुनाव के लिए आवश्यक  व्यवस्था एवं तैयारी अन्य जिलों की तुलना में बड़े पैमाने पर करनी पड़ती है। कुल जनसंख्या की तुलना में 18 से 29 आयु वर्ग में मतदाता पंजीकरण में हम पीछे हैं, यह चिंता की बात है। 
मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत समाज के सभी घटकों को मतदाता सूची में शामिल करना, मतदाता सूची को अद्यतन करना, शुद्धिकरण आदि काम करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही मतदाताओं का प्रतिशत बढ़ाने के भी प्रयास करने होंगे। युवाओं को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराकर चुनाव प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए। इसके लिए स्कूल-महाविद्यालयों के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों को मतदाता पंजीकरण के लिए एक साथ आना चाहिए। यह अपील करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से सहयोग किया जायेगा।
श्री पाटिल और श्री गुजराती ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मतदाता जागरूकता एवं मतदाता पंजीकरण के लिए वे सहयोग करेंगे।

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