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शिक्षा विभाग के राज्यस्तरीय शिक्षा परिषद का शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने किया उद्घाटन

‘अडॉप्ट अ स्कूल’ का निर्णय स्कूलों के विकास के लिए लिया : शिक्षा मंत्री
पुणे, अक्टूबर (जिमाका)
सामाजिक उत्तरदायित्व निधि का उपयोग पहले भी कई स्कूलों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया गया है। उसी तर्ज पर ‘अडॉप्ट अ स्कूल’ यह निर्णय केवल स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक सुविधाओं के विकास के लिए लिया गया है और इसका निजीकरण से कोई रिश्ता नहीं है। यह जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने दी है।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के अंतर्गत क्षेत्रीय अधिकारियों की राज्यस्तरीय कार्यशाला और स्कूल शिक्षा एवं खेल विभाग के दो दिवसीय राज्यस्तरीय शिक्षा सम्मेलन का उद्घाटन शिक्षा मंत्री श्री केसरकर के शुभ हाथों से किया गया। इस अवसर पर यहां स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल, शिक्षा आयुक्त सूरज मांढरे, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के संचालक अमोल येडगे, शिक्षा विभाग के सहसचिव इम्तियाज काझी, योजना शिक्षा संचालक डॉ. महेश पालकर, महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के संचालक नंदकुमार बेडसे, राज्य शिक्षा मंडल के अध्यक्ष शरद गोसावी, बालभारती के संचालक कृष्णकुमार पाटिल, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक संचालक संपत सूर्यवंशी आदि उपस्थित थे। 
श्री केसरकर ने कहा कि जबकि हमारे पास एक अच्छी शिक्षा प्रणाली रहते हुए ऑनलाइन नामांकन में गिरावट के कारण हम परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) में दूसरे से सातवें स्थान पर खिसक गए हैं। इसमें सुधार के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। सभी मंडलों की शिक्षा प्रणालियों को एकीकृत कर राज्य के लिए आदर्श शिक्षा प्रणाली एवं पाठ्यक्रम तैयार किया जाए। 
नई शिक्षा नीति में व्यवसाय एजूकेशन पर जोर
शिक्षा को भावी पीढ़ी को आकार देने के एक औजार के रूप में देखा जाना चाहिए। शिक्षा सस्वर पाठ (पाठांतर) का नहीं तो समझकर लेने का शास्त्र है। नई शिक्षा नीति के अनुसार एससीईआरटी को तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ को शामिल करना चाहिए परंतु इसके बाद बार-बार बदलाव, प्रयोग नहीं किए जाने चाहिए। बच्चों को श्रम के महत्व का एहसास कराने के लिए नई नीति में कृषि शिक्षा, स्काउट गाइड को शामिल किया गया है। व्यवसायिक शिक्षा, कृषि शिक्षा प्राथमिक स्तर से ही प्रारम्भ होनी चाहिए। बच्चों पर किताबों का बोझ कम करने के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों को स्कूल स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। शिक्षा विभाग में स्कूलों में सारी जानकारी को कम्प्यूटरीकृत कर सॉफ्टवेयर के माध्यम से जोड़ा जाए तो इस पर लगने वाला समय बच्चों के शैक्षणिक विकास में लगाया जा सकता है। भविष्य में बच्चों की उपस्थिति भी स्वचालित ढंग से होगी। बच्चों का परीक्षा परिणाम भी कुछ ही सेकंड में ऑनलाइन चेक किया जा सकता है, ऐसी तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। वास्तविक स्कूली शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है। इसमें प्रौद्योगिकी को भी जोड़ा जा सकता है। शिक्षकों का ज्ञान समय-समय पर अद्यतन किया जाना चाहिए। इसके लिए जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम को अपनी जिम्मेदारी के रूप में देखें
मंत्री श्री केसरकर ने कहा कि नवभारत साक्षरता कार्यक्रम केंद्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है और स्कूल इसके कार्यान्वयन का केंद्र बिंदु हैं। नई साक्षरता को आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के ज्ञान के समकक्ष बनाया जाना चाहिए और यह शिक्षकों की जिम्मेदारी है। अतः इस अभियान को राज्य में सफल बनाने का प्रयास करें।
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल ने कहा कि नई शिक्षा नीति में बालक-बालिकाओं की संयुक्त शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। कम संख्या वाले स्कूलों की तुलना में अधिक संख्या वाले स्कूलों में बच्चे अच्छी तरह से ज्ञान को बेहतर ढंग से ग्रहण कर रहे हैं, ऐसा दिखाई दिया गया है। समूह विद्यालय जैसे प्रयोग उपयोगी सिद्ध हुए हैं, लेकिन किसी भी स्कूल को बंद करने की कोई नीति नहीं है। पीजीआई रैंकिंग में 10 वीं के अंक और परिणाम को भी ध्यान में रखा जाता है। निजी अनुदानित स्कूलों में शिक्षा पर भी शिक्षा अधिकारियों को ध्यान देना होगा। स्कूलों में पिरीऑडिक असेसमेंट टेस्ट शुरू किए जाएंगे और निजी अनुदानित स्कूल भी अगले महीने से ये परीक्षाएं आयोजित करना शुरू कर देंगे।
शिक्षा आयुक्त सूरज मांढरे ने कहा कि राज्य में लगभग 1 करोड़ 63 लाख निरक्षर हैं और गाँवों में 10 प्रतिशत नागरिक निरक्षर पाये गये। शिक्षा विभाग न केवल स्कूली छात्रों को बल्कि समाज के सभी सदस्यों को शिक्षा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है। इस कार्यक्रम में व्यावसायिकता जोड़ी गई है और नवभारत साक्षरता अभियान को प्राथमिकतावाले कार्यक्रम के रूप में देखा जाना चाहिए।
योजना शिक्षा संचालक डॉ. महेश पालकर ने प्रास्ताविक किया। इस अवसर पर बालभारती के ‘शिक्षण गाथा’ इस तिमाही मासिक का, जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्था के वार्षिक अंक का, निपुण भारत अंतर्गत गुणवत्ता में सुधार पुस्तिका को प्रकाशित किया गया।
कार्यशाला में सभी विभागीय उपसंचालक, जिला परिषद के शिक्षणाधिकारी, जिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्था के प्राचार्य आदि उपस्थित थे।

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