पुणे, अक्टूबर (जिमाका)
पुणे जिले का पहला ‘मधाचे गांव’ (शहद का गांव) के रूप में भोर तालुका के गुहिणी गांव का चयन करने के लिए महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल ने परिसर का निरीक्षण करके भौगोलिक स्थिति की समीक्षा की।
महाराष्ट्र राज्य खादी और ग्रामोद्योग मंडल के अध्यक्ष रवींद्र साठे की अवधारणा के अनुसार राज्य में कुल 10 शहद गांव करने का इरादा है। मंडल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर. विमला के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र में शहद गांव की अवधारणा को लागू करने के लिए भोर तालुका में गुहिणी गांव का चयन करने के लिए मधकेंद्र योजना के तहत एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया था।
महाबलेश्वर शहद निदेशालय के निदेशक डी.आर. पाटिल, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एस.आर.खरात, वेल्हे के तोरणा राजगढ़ परिसर समाजोन्नति न्यास सामाजिक संस्था के व्यवस्थापक रमेश आंबेकर, गांव के पदाधिकारी, ग्रामीण एवं मधुमक्खी पालनेवाले उपस्थित थे।
महाबलेश्वर शहद निदेशालय के निदेशक डी.आर. पाटिल ने शहद केन्द्र योजना एवं शहद गांव संकल्पना के क्रियान्वयन की जानकारी दी। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एस.आर. खरात ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल विकास योजना, मध केंद्र योजना, शहद गांव के बारे में मार्गदर्शन किया गया।
कार्यक्रम के बाद निदेशक श्री पाटिल ने यहां के वन क्षेत्र में जाम्भूल पौधे का पौधारोपण किया।
गुहिणी गांव की जानकारी
गुहिणी गांव छत्रपति शिवाजी महाराज के पदस्पर्श से पावन हुए तोरणा, राजगढ़, मढेघाट परिसर की गोद में, भाटघर बांध के पिछले भाग में प्रकृति के निकट सान्निध्य में बसा हुआ एक छोटा सा गाँव है। यहां मधुमक्खी पालन के लिए उपयोगी जाम्भूल, आम, कर्वी, करवार, अर्जुन, कंडलवन और अखारा आदि पौधे फूल बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। गांव के लगभग 15 मधुमक्खी पालनेवाले पारंपरिक तरीके से अग्या, सातेरी, फुलोरी पिकला हुआ शहद इकट्ठा करते हैं। विभिन्न प्रकार के शहद की कीमतें 800 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच है।
पुणे जिले का पहला ‘मधाचे गांव’ (शहद का गांव) के रूप में भोर तालुका के गुहिणी गांव का चयन करने के लिए महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल ने परिसर का निरीक्षण करके भौगोलिक स्थिति की समीक्षा की।
महाराष्ट्र राज्य खादी और ग्रामोद्योग मंडल के अध्यक्ष रवींद्र साठे की अवधारणा के अनुसार राज्य में कुल 10 शहद गांव करने का इरादा है। मंडल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर. विमला के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र में शहद गांव की अवधारणा को लागू करने के लिए भोर तालुका में गुहिणी गांव का चयन करने के लिए मधकेंद्र योजना के तहत एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया था।
महाबलेश्वर शहद निदेशालय के निदेशक डी.आर. पाटिल, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एस.आर.खरात, वेल्हे के तोरणा राजगढ़ परिसर समाजोन्नति न्यास सामाजिक संस्था के व्यवस्थापक रमेश आंबेकर, गांव के पदाधिकारी, ग्रामीण एवं मधुमक्खी पालनेवाले उपस्थित थे।
महाबलेश्वर शहद निदेशालय के निदेशक डी.आर. पाटिल ने शहद केन्द्र योजना एवं शहद गांव संकल्पना के क्रियान्वयन की जानकारी दी। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एस.आर. खरात ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल विकास योजना, मध केंद्र योजना, शहद गांव के बारे में मार्गदर्शन किया गया।
कार्यक्रम के बाद निदेशक श्री पाटिल ने यहां के वन क्षेत्र में जाम्भूल पौधे का पौधारोपण किया।
गुहिणी गांव की जानकारी
गुहिणी गांव छत्रपति शिवाजी महाराज के पदस्पर्श से पावन हुए तोरणा, राजगढ़, मढेघाट परिसर की गोद में, भाटघर बांध के पिछले भाग में प्रकृति के निकट सान्निध्य में बसा हुआ एक छोटा सा गाँव है। यहां मधुमक्खी पालन के लिए उपयोगी जाम्भूल, आम, कर्वी, करवार, अर्जुन, कंडलवन और अखारा आदि पौधे फूल बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। गांव के लगभग 15 मधुमक्खी पालनेवाले पारंपरिक तरीके से अग्या, सातेरी, फुलोरी पिकला हुआ शहद इकट्ठा करते हैं। विभिन्न प्रकार के शहद की कीमतें 800 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच है।

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