पुणे, अक्टूबर (जिमाका)
मुंबई, पुणे जैसे शिक्षा के केंद्र वाले महानगरों में भेदभाव की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए शिक्षा का अधिकार कानून में बदलाव जरूरी है और इसके लिए हम सरकार को सुझाव देंगे। यह जानकारी राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा एडवोकेट सुशीबेन शाह ने दी है।
महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा पुणे के महात्मा गांधी प्रशिक्षण केंद्र, महिला एवं बाल विकास कार्यालय, पुणे में आयोग के सदस्यों के साथ पुणे विभाग के लंबित मामलों की दो दिवसीय सुनवाई आयोजित की गई थी, तब वे बोल रही थीं।
इन दो दिनों में 50 सुनवाई की गईं। इस सुनवाई में खासतौर पर पुणे, पिंपरी विभाग में स्कूल फीस बढ़ोतरी, बाल यौन शोषण, पोक्सो के तहत दर्ज अपराध आदि को लेकर सुनवाई हुई।
इस बैठक के दौरान राज्य शिक्षा आयुक्त सूरज मांढरे की एडवोकेट शाह ने मुलाकात कर राज्य बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम में संशोधन की सिफारिशें कीं और इसमें बदलाव का सुझाव दिया, इसलिए अगले सप्ताह शिक्षा विभाग के सभी उप निदेशक वीडियो प्रणाली के माध्यम से बैठक कर इस कानून के बारे में उनकी राय जानेंगे।
एडवोकेट शाह ने महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त प्रशांत नारनवरे से मुलाकात की और बाल सुधार गृह में बुनियादी सुविधाओं की कमी और सुरक्षा के बारे में चर्चा की। पुणे के मुक्तांगन स्कूल में हुए रैगिंग के मामले में केस दर्ज करने के साथ-साथ समुपदेशन करना भी जरूरी है. यह राय उन्होंने दी। इसके लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगा। यह विश्वास एडवोकेट सुशीबेन शाह ने संबंधित अभिभावक प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें दिया।
इस सुनवाई में महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार आयोग के सदस्य चैतन्य पुरंदरे, जयश्री पालवे, सायली पालखेडकर, संजय पेंगर, प्रज्ञा खोसरे आदि उपस्थित थे।
मुंबई, पुणे जैसे शिक्षा के केंद्र वाले महानगरों में भेदभाव की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए शिक्षा का अधिकार कानून में बदलाव जरूरी है और इसके लिए हम सरकार को सुझाव देंगे। यह जानकारी राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा एडवोकेट सुशीबेन शाह ने दी है।
महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा पुणे के महात्मा गांधी प्रशिक्षण केंद्र, महिला एवं बाल विकास कार्यालय, पुणे में आयोग के सदस्यों के साथ पुणे विभाग के लंबित मामलों की दो दिवसीय सुनवाई आयोजित की गई थी, तब वे बोल रही थीं।
इन दो दिनों में 50 सुनवाई की गईं। इस सुनवाई में खासतौर पर पुणे, पिंपरी विभाग में स्कूल फीस बढ़ोतरी, बाल यौन शोषण, पोक्सो के तहत दर्ज अपराध आदि को लेकर सुनवाई हुई।
इस बैठक के दौरान राज्य शिक्षा आयुक्त सूरज मांढरे की एडवोकेट शाह ने मुलाकात कर राज्य बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम में संशोधन की सिफारिशें कीं और इसमें बदलाव का सुझाव दिया, इसलिए अगले सप्ताह शिक्षा विभाग के सभी उप निदेशक वीडियो प्रणाली के माध्यम से बैठक कर इस कानून के बारे में उनकी राय जानेंगे।
एडवोकेट शाह ने महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त प्रशांत नारनवरे से मुलाकात की और बाल सुधार गृह में बुनियादी सुविधाओं की कमी और सुरक्षा के बारे में चर्चा की। पुणे के मुक्तांगन स्कूल में हुए रैगिंग के मामले में केस दर्ज करने के साथ-साथ समुपदेशन करना भी जरूरी है. यह राय उन्होंने दी। इसके लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगा। यह विश्वास एडवोकेट सुशीबेन शाह ने संबंधित अभिभावक प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें दिया।
इस सुनवाई में महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार आयोग के सदस्य चैतन्य पुरंदरे, जयश्री पालवे, सायली पालखेडकर, संजय पेंगर, प्रज्ञा खोसरे आदि उपस्थित थे।

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