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यूनिसेफ की ‘पासपोर्ट टू अर्निंग’ पहल के माध्यम से एक मिलियन विद्यार्थियों को प्रमाणित किया गया

    शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव श्री संजय कुमार ने 11 अक्टूबर 2023 को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर यूनिसेफ द्वारा अपने पासपोर्ट टू अर्निंग’ (पी2कार्यक्रम के तहत एक मिलियन प्रमाणन की उपलब्धि हासिल करने के उपलक्ष्य में आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉकृष्ण कुमार द्विवेदीयुवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) के युवा कार्यक्रम विभाग के संयुक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रऔर भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैक्कैफ्री भी उपस्थित थीं।
    यूनिसेफ के वैश्विक स्तर के सीखने-से-कमाई संबंधी कदमपासपोर्ट टू अर्निंग’ (पी2ने भारत में एक मिलियन से अधिक युवाओं को वित्तीय साक्षरता और डिजिटल उत्पादकता के क्षेत्रों में कुशल बनाया और प्रमाणित किया है। यह उपलब्धि युवाओं को भविष्य के काम और जीवन के लिए प्रासंगिक कौशल हासिल करने में मदद करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेष रूप सेभारत में पी2ई पाठ्यक्रमों से लाभान्वित होने वाले सभी युवा शिक्षार्थियों में से 62 प्रतिशत किशोरियां एवं युवतियां हैं।
   भारत मेंराष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूपपी2ई पहल डिजिटल उत्पादकतावित्तीय साक्षरतारोजगार हेतु योग्यता संबंधी कौशल और नौकरी के लिए तैयार कौशल से संबंधित प्रमाणन (सर्टिफिकेट) पाठ्यक्रमों तक निशुल्क पहुंच प्रदान करती है। पी2ई समाधान ऑनलाइनहाइब्रिड एवं ऑफलाइन शिक्षण मॉडल का भी प्रावधान करता है।
    इस डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का लक्ष्य 2024 तक भारत में 14-29 वर्ष के आयु वर्ग के पांच मिलियन युवाओं को दीर्घकालिक टिकाऊ कौशल प्रदान करना और फिर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के लिए नौकरीस्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना है।
    इस अवसर पर बोलते हुएश्री संजय कुमार ने कहामुझे यह जानकर खुशी हुई कि यूनिसेफ की पासपोर्ट टू अर्निंग’ (पी2पहल युवाओं के समग्र विकास के लिए 21वीं सदी के कौशल का निर्माण करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है। इस पहल के परिणाम इसकी सार्थकता को प्रमाणित करते हैंशुभारंभ के बाद से,पी2ई के तहत केवल 11 महीनों में एक मिलियन असाधारण युवाओं द्वारा एक मिलियन से अधिक पाठ्यक्रमों को पूरा किया गया है। इस यात्रा का हिस्सा बनने वाले सभी हितधारकों को बहुत-बहुत बधाई।
    इस कार्यक्रम में बोलते हुए, सिंथिया मैक्कैफ्री ने कहायूनिसेफ का मानना ​​है कि जब किशोरियां एवं युवतियां उपकरणकौशल व आर्थिक अवसरों से लैस होती हैंतो वे एक अधिक समावेशी एवं समृद्ध दुनिया के निर्माण की दिशा में एक अजेय शक्ति बन जाती हैं। हमें खुशी है कि पासपोर्ट टू अर्निंग’ (पी2कार्यक्रम ने अपने पहले वर्ष में एक मिलियन युवाओं को प्रशिक्षित करने की उपलब्धि हासिल की हैजिसमें सीखने वाले कुल युवा शिक्षार्थियों में से 62 प्रतिशत युवतियां हैं। नारी शक्तिके माध्यम से प्रगति को आगे बढ़ाने के भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूपपी2ई कार्यक्रम युवतियों के लिए मार्ग प्रशस्त करने के प्रति समर्पित है ताकि उन्हें सही कौशल एवं सफल होने के अवसरों के साथ जोड़ा जा सके और सीखने से कमाई की दिशा में स्थानांतरित करने और दुनिया को एजेंडा 2030 की ओर ले जाने की प्रक्रिया का नेतृत्व करने में समर्थ बनाया जा सके।
    डॉके.केद्विवेदी ने कहामाननीय प्रधानमंत्री अक्सर कहा है कि युवाओं में कौशल का विकास एक राष्ट्रीय आवश्यकता है और यह आत्मनिर्भर भारत की नींव है। मैं पासपोर्ट टू अर्निंग’ (पी2कार्यक्रम के निर्माण में यूनिसेफ इंडियायूवाह और अन्य भागीदारों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करता हूं। यह भविष्य के लिए तैयार युवा श्रमशक्ति के विकास में सरकारनिजी क्षेत्र और नागरिक समाज के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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