हड़पसर, अक्टूबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
पुणे के पूर्व शिक्षा निदेशक कैप्टन एस.एस. सालगांवकर से मिलकर पुराने वर्षों की यादें फिर से ताजा हो गईं। उनकी ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हुई, लेकिन निवास और फोन नंबर बदलने के बाद बीच में उनसे संपर्क टूट गया था, लेकिन फिर से उनके साथ संपर्क होने पर उनसे मिलकर हमें बहुत-बहुत खुशी हुई है। उनके स्वास्थ्य की तहेदिल से पूछताछ की। उनके साथ हुई भेंट का एहसास बहुत ही अच्छा लगा। इन यादगार लम्हों को अपने दिलों में हम समेटकर रखेंगे। इन शब्दों में मानवतावादी समाजसेवा संघटना के सदस्यों ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। एक अध्ययनशील और नियमों का कड़ाई से पालन करनेवाले सेना का कैप्टन पदभार संभालनेवाले शिक्षा निदेशक थे। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनके पैर में लगी बंदूक की गोली को उन्होंने स्मृति के रूप में संजोकर रखा है। सौभाग्य से हमें यह देखने को मिला। कड़कड़ाती ठंड में सीमा पर तैनात रहते हुए खुद को जमीन में पांच से छह फीट गहरे गड्ढे में दबाकर और ऊपरी हिस्से को लकड़ी से ढककर डटकर तैनात रहनेवाले जवानों का अनुभव सुनकर हम स्तब्ध हो गए। उनके साथ कई नई और पुरानी यादें ताजा हो गईं। मानवतावादी संघटना के लिए यह भेंट अविस्मरणीय रहेगी। यह भावना मानवतावादी समाज सेवा संघटना के संस्थापक अध्यक्ष गफ्फार खान ने व्यक्त की।
पुणे के पूर्व शिक्षा निदेशक कैप्टन एस.एस. सालगांवकर से मिलकर पुराने वर्षों की यादें फिर से ताजा हो गईं। उनकी ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हुई, लेकिन निवास और फोन नंबर बदलने के बाद बीच में उनसे संपर्क टूट गया था, लेकिन फिर से उनके साथ संपर्क होने पर उनसे मिलकर हमें बहुत-बहुत खुशी हुई है। उनके स्वास्थ्य की तहेदिल से पूछताछ की। उनके साथ हुई भेंट का एहसास बहुत ही अच्छा लगा। इन यादगार लम्हों को अपने दिलों में हम समेटकर रखेंगे। इन शब्दों में मानवतावादी समाजसेवा संघटना के सदस्यों ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। एक अध्ययनशील और नियमों का कड़ाई से पालन करनेवाले सेना का कैप्टन पदभार संभालनेवाले शिक्षा निदेशक थे। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनके पैर में लगी बंदूक की गोली को उन्होंने स्मृति के रूप में संजोकर रखा है। सौभाग्य से हमें यह देखने को मिला। कड़कड़ाती ठंड में सीमा पर तैनात रहते हुए खुद को जमीन में पांच से छह फीट गहरे गड्ढे में दबाकर और ऊपरी हिस्से को लकड़ी से ढककर डटकर तैनात रहनेवाले जवानों का अनुभव सुनकर हम स्तब्ध हो गए। उनके साथ कई नई और पुरानी यादें ताजा हो गईं। मानवतावादी संघटना के लिए यह भेंट अविस्मरणीय रहेगी। यह भावना मानवतावादी समाज सेवा संघटना के संस्थापक अध्यक्ष गफ्फार खान ने व्यक्त की।

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