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पठन प्रेरणा दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति मंडल द्वारा संयुक्त रूप से राज्य में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

मुंबई, अक्टूबर (महासंवाद)
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जन्मदिन 15 अक्टूबर को सरकार की ओर से  ‘पठन प्रेरणा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं और सभी को इन कार्यक्रमों का लाभ उठाना चाहिए। यह अपील महाराष्ट्र राज्य साहित्य व संस्कृति मंडल की सचिव डॉ. मीनाक्षी पाटिल ने की है। 
पठन प्रेरणा दिवस के अवसर पर रविवार, दिनांक 15 अक्टूबर को सुबह 11 बजे महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति मंडल द्वारा प्रकाशित ‘महाराष्ट्राच्या सामाजिक सांस्कृतिक स्थित्यंतराचा इतिहास’ ग्रंथ पर ‘चर्चा एवं अभिवाचन’ नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम रवीन्द्र नाट्य मंदिर इमारत, प्रभादेवी, मुंबई में होगा।
इन कार्यक्रमों के साथ-साथ महाराष्ट्र के साहित्यिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के सहयोग से पूरे महाराष्ट्र में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। उक्त कार्यक्रमों में दिनांक 13 अक्टूबर को सुबह 9 बजे महावीर महाविद्यालय, कोल्हापुर द्वारा संयुक्त रूप से वाचनकट्टा, व्याख्यान, पुस्तक प्रदर्शनी, पोस्टर प्रदर्शनी, अभिजात मराठी के लिए राष्ट्रपति को दो हजार पत्रों का लेखन ऐसे कार्यक्रम महावीर महाविद्यालय, कोल्हापुर में होंगे। 
दिनांक 14 अक्टूबर प्रातः 10 बजे पूज्य साने गुरुजी संस्कारमाला सार्वजनिक वाचनालय, कुंटुर, जि.नांदेड द्वारा संयुक्त रूप से, ‘व्याख्यान व काव्यवाचन : लेखक आपल्या भेटीला’ यह कार्यक्रम आ.मा. स्कूल व वि.जा.भ.ज. कमवि कुंटुरतांडा, ता.नायगांव, जि.नांदेड में आयोजन किया गया है। प्रातः 10 बजे महाराष्ट्र साहित्य परिषद, पुणे द्वारा संयुक्त रूप से ‘आम्ही काय वाचतो आणि का वाचतो?’ विषय  पर महाविद्यालयी के छात्रों का मनोगत का कार्यक्रम गरवारे महाविद्यालय, पुणे मेें आयोजित किया गया है। साथ ही सुबह 11:30 बजे मराठी विभाग, शिवाजी विद्यापीठ, कोल्हापुर द्वारा संयुक्त रूप से  ‘अभिवाचन व काव्यवाचन’ कार्यक्रम शिवाजी विद्यापीठ, कोल्हापुर में आयोजित किया गया है। शाम 5:30 बजे मुंबई मराठी साहित्य संघ, मुंबई द्वारा संयुक्त रूप से ‘व्याख्यान व अभिवाचन’ कार्यक्रम मुंबई मराठी साहित्य संघ, गिरगांव, मुंबई में होगा। वैसे ही शाम 7 बजे दक्षिण महाराष्ट्र साहित्य सभा, कोल्हापुर द्वारा संयुक्त रूप से ‘नाट्य अभिवाचन : संगीत देवबाभळी’ कार्यक्रम नाईट कॉलेज ऑफ आर्टस् एण्ड कॉमर्स, इचलकरंजी, जि. कोल्हापुर में आयोजित किया गया है।
दिनांक 15 अक्टूबर प्रातः 11 बजे मराठी विभाग, स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाडा विद्यापीठ, नांदेड द्वारा संयुक्त रूप से, ‘व्याख्यान : वाचन संस्कृतीचे वर्तमान आणि युवक’ यह कार्यक्रम ऑनलाईन आयोजित किया गया है। शाम 5:30 बजे मराठवाडा साहित्य परिषद, छत्रपति संभाजीनगर द्वारा संयुक्त रूप से ‘पुस्तकावर निबंधवाचन व चर्चा’ यह कार्यक्रम ना.गो. नांदापूरकर सभागृह, मराठवाडा साहित्य परिषद, सन्मित्र कॉलोनी, छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित किया गया है।
दिनांक 16 अक्टूबर दोपहर 12.30 बजे विदर्भ साहित्य संघ, नागपुर द्वारा संयुक्त रूप से, ‘कथाकथन’ यह कार्यक्रम विदर्भ साहित्य संघ, नागपुर में होगा। प्रातः 10 बजे जिजामाता शास्त्र व कला महाविद्यालय, अहमदनगर द्वारा संयुक्त रूप से, ‘ग्रंथ प्रदर्शन आणि व्याख्यान’ यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। प्रातः 10 बजे दक्षिण महाराष्ट्र साहित्य सभा, कोल्हापुर द्वारा संयुक्त रूप से, ‘व्याख्यान : वाचनाचे महत्त्व’ यह कार्यक्रम जूनियर कॉलेज, जयसिंगपुर, जि. कोल्हापुर यहां आयोजित किया गया है। सुबह 11:30 बजे मराठी विभाग, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज विद्यापीठ, नागपुर द्वारा संयुक्त रूप से, ‘मराठी गद्यलेखनाचे अभिवाचन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
दिनांक 17 अक्टूबर प्रातः 11 बजे मराठी विभाग, मुंबई विद्यापीठ, मुंबई द्वारा संयुक्त रूप से, ‘व्याख्यान : समकालीन वाचनसंस्कृती’ कार्यक्रम आयोजित किया गया है। तो सुबह 10 बजे दक्षिण महाराष्ट्र साहित्य सभा, कोल्हापुर द्वारा संयुक्त रूप से, ‘व्याख्यान : कशासाठी  वाचायचे?’ यह कार्यक्रम पेठवडगांव, ता. हातकणंगले, जि. कोल्हापुर में आयोजित किया गया है।
दिनांक 18 अक्टूबर सायं 5.30 बजे दक्षिण महाराष्ट्र साहित्य सभा, कोल्हापुर द्वारा संयुक्त रूप से ‘परिसंवाद’ इचलकरंजी, कोल्हापुर में आयोजित किया गया है। 
दिनांक 21 अक्टूबर शाम 5 बजे महाराष्ट्र साहित्य परिषद, शाखा-पिंपरी चिंचवड पुणे द्वारा संयुक्त रूप से, ‘वाचक मेळावा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया है। 
पठन प्रेरणा दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति मंडल द्वारा संयुक्त रूप से उपरोक्त विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है और इन कार्यक्रमों का सभी को लाभ उठाना चाहिए। यह अपील महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति मंडल की सचिव डॉ. पाटिल ने की है।

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