उमेद अभियान के माध्यम से खरीददार-विक्रेताओं का सम्मेलन संपन्न
पुणे, नवंबर (जिमाका)
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित स्वयं सहायता समूह अपने आर्थिक उत्थान के लिए शहरी बाजार में प्रवेश कर अपनी अलग पहचान बनायें, प्रशासन ऐसे समूहों को आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। यह विचार जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण ने व्यक्त किये।
महिला स्वयं सहायता समूहों की उत्पादों के विपणन के लिए उमेद महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण विकास मिशन, जिला ग्रामीण विकास तंत्र और जिला परिषद पुणे के सहयोग से पुणे के अल्प बचत भवन में गुरुवार (2 नवंबर) को आयोजित ‘खरीदारों और विक्रेताओं’ की एक दिवसीय सम्मेलन में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां विभागीय आयुक्तालय के उपायुक्त (विकास) विजय मुलीक, उपायुक्त (आस्थापना) राहुल साकोरे, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्रकांत वाघमारे, सहायक आयुक्त (विकास) सोनली घुले, ग्रामीण विकास यंत्रणा की परियोजना संचालक शालिनी कडू, राज्य व्यवस्थापक हरेश्वर मगरे आदि उपस्थित थे।
श्री चव्हाण ने आगे कहा कि स्वयं सहायता समूहों के शुद्ध, सात्विक और मिलावट रहित उत्पादों की मांग बढ़ रही है, इसलिए उन्हें आर्थिक उत्थान के लिए अपने उत्पादों को शहरी बाजारों में बेचना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित स्वयं सहायता समूह अपने आर्थिक उत्थान के लिए शहरी बाजार में प्रवेश कर अपनी अलग पहचान बनायें, प्रशासन ऐसे समूहों को आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। यह विचार जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण ने व्यक्त किये।
महिला स्वयं सहायता समूहों की उत्पादों के विपणन के लिए उमेद महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण विकास मिशन, जिला ग्रामीण विकास तंत्र और जिला परिषद पुणे के सहयोग से पुणे के अल्प बचत भवन में गुरुवार (2 नवंबर) को आयोजित ‘खरीदारों और विक्रेताओं’ की एक दिवसीय सम्मेलन में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां विभागीय आयुक्तालय के उपायुक्त (विकास) विजय मुलीक, उपायुक्त (आस्थापना) राहुल साकोरे, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्रकांत वाघमारे, सहायक आयुक्त (विकास) सोनली घुले, ग्रामीण विकास यंत्रणा की परियोजना संचालक शालिनी कडू, राज्य व्यवस्थापक हरेश्वर मगरे आदि उपस्थित थे।
श्री चव्हाण ने आगे कहा कि स्वयं सहायता समूहों के शुद्ध, सात्विक और मिलावट रहित उत्पादों की मांग बढ़ रही है, इसलिए उन्हें आर्थिक उत्थान के लिए अपने उत्पादों को शहरी बाजारों में बेचना चाहिए।
विभागीय आयुक्तालय के उपायुक्त (विकास) विजय मुलीक ने कहा कि खरीदारों और विक्रेताओं का सम्मेलन एक अच्छी अवधारणा है। वर्तमान समय में समाज को स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की आवश्यकता है, स्वयं सहायता समूहों की ग्रामीण महिलाएं ऐसे खाद्य पदार्थ तैयार कर रही हैं। इस सम्मेलन के कारण अब महिलाओं के उत्पादों को सीधे ग्राहक मिलेंगे और उनके व्यवसाय को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।
अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्रकांत वाघमारे ने कहा कि इस प्रशंसनीय पहल के माध्यम से स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित उत्पादों को सभी उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। खरीदारों और उपभोक्ताओं के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बड़े बाजार उपलब्ध हो सकते हैं।
ग्रामीण विकास यंत्रणा की परियोजना संचालक शालिनी कडू ने गतिविधि के बारे में जानकारी दी। जिले में कुल 26 हजार 725 महिला स्व-सहायता समूह हैं। प्रभाग संघ संस्था और ग्राम संघ 1 संस्था 1 हजार 200 हैं। इन संगठनों के माध्यम से लगभग 3 लाख महिलाएं एक साथ आई हैं। ये महिलाएं व्यवसाय में उतर चुकी हैं और इस सम्मेलन के माध्यम से वे सीधे खरीदारों से मिलेंगी। भविष्य में उपभोक्ताओं के माध्यम से स्वयं सहायता समूह को वस्तुओं, सेवाओं की भारी मांग मिलेगी।
सम्मेलन में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित किए गए सामान की खरीद के अनुसार रिलायंस मार्ट, फॉर्म दीदी, डे-आसरा, गावकी, नारी शक्ति महिला शेतकरी कंपनी सहित विभिन्न 30 ग्राहक उपस्थित थे। साथ ही इस दौरान ग्राहकों ने स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को देखकर उन्हें मांग आदेश देने के लिए और आगे के लेनदेन के लिए चर्चा की।
इस अवसर पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के लिए पुणे जिला परिषद की पहल पर जिले के 42 स्थानों पर स्वयं सहायता समूहों द्वारा ‘पुण्यश्री सुपर मार्केट’ शुरू किया गया है। इस सुपर मार्केट में उपलब्ध विभिन्न उत्पादों, सामग्रियों के बारे में जानकारी देनेवाली एक पुस्तिका का प्रकाशन श्री चव्हाण द्वारा किया गया। यह पुस्तिका डिजिटल रूप में जिला परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।
इस अवसर पर विभिन्न संगठन, किसान उत्पादक संगठन, खरीददार के साथ जिला ग्रामीण विकास प्रणाली के जिला अभियान प्रबंधक नितिन पतंगे, कनिष्ठ प्रशासन अधिकारी प्रशांत दीक्षित, जिला प्रबंधक सपना करकंडे, सोनाली अवचट, वृषाली मोहिते, आश्रुबा मुंढे, सभी तालुका के तालुका अभियान प्रबंधक, तालुका प्रबंधक और प्रभाग के समन्वयक उपस्थित थे।
अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्रकांत वाघमारे ने कहा कि इस प्रशंसनीय पहल के माध्यम से स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित उत्पादों को सभी उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। खरीदारों और उपभोक्ताओं के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बड़े बाजार उपलब्ध हो सकते हैं।
ग्रामीण विकास यंत्रणा की परियोजना संचालक शालिनी कडू ने गतिविधि के बारे में जानकारी दी। जिले में कुल 26 हजार 725 महिला स्व-सहायता समूह हैं। प्रभाग संघ संस्था और ग्राम संघ 1 संस्था 1 हजार 200 हैं। इन संगठनों के माध्यम से लगभग 3 लाख महिलाएं एक साथ आई हैं। ये महिलाएं व्यवसाय में उतर चुकी हैं और इस सम्मेलन के माध्यम से वे सीधे खरीदारों से मिलेंगी। भविष्य में उपभोक्ताओं के माध्यम से स्वयं सहायता समूह को वस्तुओं, सेवाओं की भारी मांग मिलेगी।
सम्मेलन में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित किए गए सामान की खरीद के अनुसार रिलायंस मार्ट, फॉर्म दीदी, डे-आसरा, गावकी, नारी शक्ति महिला शेतकरी कंपनी सहित विभिन्न 30 ग्राहक उपस्थित थे। साथ ही इस दौरान ग्राहकों ने स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को देखकर उन्हें मांग आदेश देने के लिए और आगे के लेनदेन के लिए चर्चा की।
इस अवसर पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के लिए पुणे जिला परिषद की पहल पर जिले के 42 स्थानों पर स्वयं सहायता समूहों द्वारा ‘पुण्यश्री सुपर मार्केट’ शुरू किया गया है। इस सुपर मार्केट में उपलब्ध विभिन्न उत्पादों, सामग्रियों के बारे में जानकारी देनेवाली एक पुस्तिका का प्रकाशन श्री चव्हाण द्वारा किया गया। यह पुस्तिका डिजिटल रूप में जिला परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।
इस अवसर पर विभिन्न संगठन, किसान उत्पादक संगठन, खरीददार के साथ जिला ग्रामीण विकास प्रणाली के जिला अभियान प्रबंधक नितिन पतंगे, कनिष्ठ प्रशासन अधिकारी प्रशांत दीक्षित, जिला प्रबंधक सपना करकंडे, सोनाली अवचट, वृषाली मोहिते, आश्रुबा मुंढे, सभी तालुका के तालुका अभियान प्रबंधक, तालुका प्रबंधक और प्रभाग के समन्वयक उपस्थित थे।


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