सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने वर्ष 2025 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए डिजिटल फुटप्रिंट पर आधारित क्रेडिट असेसमेंट मॉडल (सीएएम) लॉन्च किया।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) द्वारा डिजिटल क्रेडिट अंडरराइटिंग कार्यक्रमों के तहत 1 अप्रैल से 31 दिसंबर, 2025 के बीच 52,300 करोड़ रुपये से अधिक के 3.96 लाख से अधिक एमएसएमई ऋण आवेदनों को स्वीकृत किया गया है।
यह क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल इकोसिस्टम में उपलब्ध डिजिटल रूप से प्राप्त और सत्यापन योग्य डेटा का लाभ उठाता है और सभी ऋण आवेदनों के लिए वस्तुनिष्ठ निर्णय लेने और विद्यमान बैंक खाते वाले (ईटीबी) और नए बैंक खाते वाले (एनटीबी) दोनों एमएसएमई उधारकर्ताओं के लिए मॉडल-आधारित सीमा मूल्यांकन का उपयोग करके एमएसएमई ऋण मूल्यांकन के लिए स्वचालित प्रक्रियाएं तैयार करता है।
इस मॉडल द्वारा डिजिटल फुटप्रिंट्स का उपयोग केवाईसी प्रमाणीकरण, मोबाइल और ईमेल सत्यापन, जीएसटी डेटा विश्लेषण, बैंक स्टेटमेंट विश्लेषण (अकाउंट एग्रीगेटर का उपयोग करके), आईटीआर सत्यापन और क्रेडिट सूचना कंपनियों (सीआईसी) के डेटा का उपयोग करके उचित जांच पड़ताल, धोखाधड़ी की जांच आदि के लिए किया जाता है।
ऐसे मॉडलों के उपयोग से एमएसएमई को मिलने वाले लाभों में ऑनलाइन माध्यम से कहीं से भी आवेदन जमा करना, कागजी कार्रवाई और शाखाओं तक जाने में कमी, डिजिटल माध्यम से तत्काल सैद्धांतिक स्वीकृति, ऋण प्रस्तावों का सुचारू प्रसंस्करण, संपूर्ण प्रक्रिया (एसटीपी), टर्नअराउंड टाइम (टीएटी) में कमी, वस्तुनिष्ठ डेटा/लेनदेन व्यवहार और क्रेडिट इतिहास के आधार पर ऋण निर्णय और सीजीटीएमएसई जैसी क्रेडिट गारंटी योजनाओं का एकीकरण शामिल हैं।
प्रमुख विशेषताऐं
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) द्वारा डिजिटल क्रेडिट अंडरराइटिंग कार्यक्रमों के तहत 1 अप्रैल से 31 दिसंबर, 2025 के बीच 52,300 करोड़ रुपये से अधिक के 3.96 लाख से अधिक एमएसएमई ऋण आवेदनों को स्वीकृत किया गया है।
यह क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल इकोसिस्टम में उपलब्ध डिजिटल रूप से प्राप्त और सत्यापन योग्य डेटा का लाभ उठाता है और सभी ऋण आवेदनों के लिए वस्तुनिष्ठ निर्णय लेने और विद्यमान बैंक खाते वाले (ईटीबी) और नए बैंक खाते वाले (एनटीबी) दोनों एमएसएमई उधारकर्ताओं के लिए मॉडल-आधारित सीमा मूल्यांकन का उपयोग करके एमएसएमई ऋण मूल्यांकन के लिए स्वचालित प्रक्रियाएं तैयार करता है।
इस मॉडल द्वारा डिजिटल फुटप्रिंट्स का उपयोग केवाईसी प्रमाणीकरण, मोबाइल और ईमेल सत्यापन, जीएसटी डेटा विश्लेषण, बैंक स्टेटमेंट विश्लेषण (अकाउंट एग्रीगेटर का उपयोग करके), आईटीआर सत्यापन और क्रेडिट सूचना कंपनियों (सीआईसी) के डेटा का उपयोग करके उचित जांच पड़ताल, धोखाधड़ी की जांच आदि के लिए किया जाता है।
ऐसे मॉडलों के उपयोग से एमएसएमई को मिलने वाले लाभों में ऑनलाइन माध्यम से कहीं से भी आवेदन जमा करना, कागजी कार्रवाई और शाखाओं तक जाने में कमी, डिजिटल माध्यम से तत्काल सैद्धांतिक स्वीकृति, ऋण प्रस्तावों का सुचारू प्रसंस्करण, संपूर्ण प्रक्रिया (एसटीपी), टर्नअराउंड टाइम (टीएटी) में कमी, वस्तुनिष्ठ डेटा/लेनदेन व्यवहार और क्रेडिट इतिहास के आधार पर ऋण निर्णय और सीजीटीएमएसई जैसी क्रेडिट गारंटी योजनाओं का एकीकरण शामिल हैं।
प्रमुख विशेषताऐं
- ग्राहक के डिजिटल फुटप्रिंट (जीएसटी, आयकर रिपोर्ट, बैंक खाता विवरण, सीआईसी रिपोर्ट आदि) के आधार पर एमएसएमई ऋणों के लिए तत्काल सैद्धांतिक स्वीकृति।
- बैंकों द्वारा परिभाषित ऋण राशि की विशिष्ट सीमाओं के भीतर ऋण प्राप्त करने के लिए जन समर्थ पोर्टल (https://www.jansamarth.in) पर एक संपूर्ण प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन प्राप्त किए जाते हैं।
- विभिन्न एपीआई के माध्यम से डिजिटल रूप से प्राप्त डेटा के आधार पर उचित जांच पड़ताल की जा रही है।
- निर्णय लेने में लगने वाला समय कम हो जाता है और सीजीटीएमएसई जैसे क्रेडिट गारंटी पोर्टलों के साथ एकीकरण संभव हो जाता है।
- ऋण लेने वालों को ऋण आवेदन के लिए शाखाओं में जाने की आवश्यकता नहीं है। एमएसएमई प्रवर्तकों को 24/365 आधार पर कहीं से भी ऋण के लिए आवेदन करने की सुविधा प्राप्त है।
- आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करने की सुविधा उपलब्ध है और ऋण की स्वीकृति के दौरान वास्तविक प्रतियां जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
- ऋण आवेदन पूरा होते ही, निर्णय की सूचना आवेदक को ऑनलाइन दी जाएगी, जिससे प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो जाएगा।

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