कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से 19 जनवरी 2026 को पुणे में एक महत्वपूर्ण उद्योग परामर्श का आयोजन करेगा। यह परामर्श प्रधानमंत्री द्वारा विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप घोषित एक ऐतिहासिक पहल, पीएम-सेतु (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन) के क्रियान्वयन का भाग है जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल का निर्माण करना है। यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी (यशादा) में आयोजित इस परामर्श का उद्देश्य उद्योग की भागीदारी को बढ़ावा देना और योजना के उद्योग-उन्मुखी कार्यान्वयन ढांचे के बारे में जानकारी देना है। निर्माण, वस्त्र, ऑटोमोटिव, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल एवं गैस तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली 50 से अधिक पात्र कंपनियां इसमें भाग लेंगी। भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी, महाराष्ट्र सरकार के कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग की अपर मुख्य सचिव सुश्री मनीषा वर्मा के साथ परामर्श की अध्यक्षता करेंगी और क्षेत्र के आईटीआई और उद्योगों का दौरा भी करेंगी।
पीएम-सेतु का उद्देश्य हब-एंड-स्पोक दृष्टिकोण के माध्यम से देश भर के 1,000 सरकारी आईटीआई का आधुनिकीकरण करना है। इस योजना के तहत 200 हब आईटीआई को उन्नत बुनियादी ढांचे और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के लिए सहायता प्रदान की जाएगी जबकि 800 स्पोक आईटीआई जिलों में प्रशिक्षण का विस्तार करेंगे। इस योजना में आईटीआई का स्वामित्व सरकार का होगा लेकिन इन संस्थानों का प्रबंधन उद्योग करेंगे जिससे मांग-आधारित प्रशिक्षण, शिक्षुता और प्रमुख उद्योगों के साथ क्लस्टर-आधारित साझेदारी के माध्यम से नियोजन हो सकेंगे। अधिकारियों ने परामर्श सत्र में बताया कि पीएम-सेतु किस प्रकार उद्योग के लिए एक व्यवस्थित मंच तैयार करता है जिससे वे आवधिक भागीदारी से आगे बढ़कर कौशल विकास तंत्र में शासन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेकर एक सतत भूमिका निभा सके। उद्योग क्लस्टर मॉडल के माध्यम से भागीदार संस्थागत शासन में सीधे योगदान दे सकेंगे, प्रशिक्षण को वास्तविक समय की श्रम बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल सकेंगे, पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों में सुधार का समर्थन कर सकेंगे, संकाय के कौशल विकास को सक्षम बना सकेंगे और शिक्षुता एवं नियोजन प्रक्रियाओं को मजबूत कर सकेंगे। इससे भर्ती की लागत कम होगी, उत्पादकता में सुधार होगा और उद्योग मानकों के अनुरूप रोजगार के लिए तैयार प्रतिभाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने भी प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया है जिसमें 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रारंभिक समूहों की पहचान की है और योजना के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के साथ ही 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी राज्य संचालन समितियों को अधिसूचित किया है।
परामर्श प्रक्रिया के अंतर्गत, राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उद्योग और संस्थागत साझेदारियों को औपचारिक रूप देने हेतु समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इस समझौता ज्ञापन आदान-प्रदान में व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय (डीवीईटी), महाराष्ट्र सरकार और फिएट इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया तथा अनुदीप फाउंडेशन के बीच तथा डीवीईटी और एसडीएन/वाधवानी के बीच साझेदारियां शामिल होंगी।
पीएम-सेतु भारत के कौशल विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने जा रहा है—यह योजना सरकार और उद्योग के सहयोग से उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों के निर्माण, भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने और उभरते विकास क्षेत्रों के लिए एक मजबूत प्रतिभा आपूर्ति श्रृंखला बनाने के तरीके को पुन: परिभाषित करेगी। संस्थागत शासन को मजबूत करके, प्रशिक्षण प्रणालियों का आधुनिकीकरण करके और कौशल को श्रम बाजार की मांग के अनुरूप ढालकर, यह योजना भारत के युवाओं को विकसित भारत के अवसरों के लिए तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
पीएम-सेतु का उद्देश्य हब-एंड-स्पोक दृष्टिकोण के माध्यम से देश भर के 1,000 सरकारी आईटीआई का आधुनिकीकरण करना है। इस योजना के तहत 200 हब आईटीआई को उन्नत बुनियादी ढांचे और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के लिए सहायता प्रदान की जाएगी जबकि 800 स्पोक आईटीआई जिलों में प्रशिक्षण का विस्तार करेंगे। इस योजना में आईटीआई का स्वामित्व सरकार का होगा लेकिन इन संस्थानों का प्रबंधन उद्योग करेंगे जिससे मांग-आधारित प्रशिक्षण, शिक्षुता और प्रमुख उद्योगों के साथ क्लस्टर-आधारित साझेदारी के माध्यम से नियोजन हो सकेंगे। अधिकारियों ने परामर्श सत्र में बताया कि पीएम-सेतु किस प्रकार उद्योग के लिए एक व्यवस्थित मंच तैयार करता है जिससे वे आवधिक भागीदारी से आगे बढ़कर कौशल विकास तंत्र में शासन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेकर एक सतत भूमिका निभा सके। उद्योग क्लस्टर मॉडल के माध्यम से भागीदार संस्थागत शासन में सीधे योगदान दे सकेंगे, प्रशिक्षण को वास्तविक समय की श्रम बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल सकेंगे, पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों में सुधार का समर्थन कर सकेंगे, संकाय के कौशल विकास को सक्षम बना सकेंगे और शिक्षुता एवं नियोजन प्रक्रियाओं को मजबूत कर सकेंगे। इससे भर्ती की लागत कम होगी, उत्पादकता में सुधार होगा और उद्योग मानकों के अनुरूप रोजगार के लिए तैयार प्रतिभाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने भी प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया है जिसमें 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रारंभिक समूहों की पहचान की है और योजना के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के साथ ही 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी राज्य संचालन समितियों को अधिसूचित किया है।
परामर्श प्रक्रिया के अंतर्गत, राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उद्योग और संस्थागत साझेदारियों को औपचारिक रूप देने हेतु समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इस समझौता ज्ञापन आदान-प्रदान में व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय (डीवीईटी), महाराष्ट्र सरकार और फिएट इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया तथा अनुदीप फाउंडेशन के बीच तथा डीवीईटी और एसडीएन/वाधवानी के बीच साझेदारियां शामिल होंगी।
पीएम-सेतु भारत के कौशल विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने जा रहा है—यह योजना सरकार और उद्योग के सहयोग से उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों के निर्माण, भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने और उभरते विकास क्षेत्रों के लिए एक मजबूत प्रतिभा आपूर्ति श्रृंखला बनाने के तरीके को पुन: परिभाषित करेगी। संस्थागत शासन को मजबूत करके, प्रशिक्षण प्रणालियों का आधुनिकीकरण करके और कौशल को श्रम बाजार की मांग के अनुरूप ढालकर, यह योजना भारत के युवाओं को विकसित भारत के अवसरों के लिए तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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