एमआईटी-एडीटी में ‘नागरिक सेवा और राष्ट्रनिर्माण’ राष्ट्रीय परिषद संपन्न
लोनी कालभोर, फरवरी (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। जब सिविल सेवा परीक्षा में नैतिकता विषय को शामिल करने का निर्णय लिया गया तो इसकी व्यापक आलोचना हुई हालांकि, उस समय की सरकार और मंत्रालय ने आयोग पर पूरा भरोसा दिखाया, जिसके चलते ये बदलाव अच्छे से लागू हो गए। समय के साथ नैतिकता के महत्व को सभी ने स्वीकार कर लिया। यह प्रतिपादन यूपीएससी के पूर्व अध्यक्ष डॉ.डी.पी.अग्रवाल ने व्यक्त किए।
एमआईटी आर्ट, डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय, विश्वराजबाग, पुणे स्थित स्कूल ऑफ इंडियन सिविल सर्विसेज (एसआईसीएस) की ओर से सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए “सिविल सेवा व राष्ट्रनिर्माण” विषय पर आयोजित की गई राष्ट्रीय परिषद में वे बोल रहे थे।
इस अवसर पर यहां महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. किशोर राजे निम्बालकर, विश्वविद्यालय के कार्यकारी अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. डॉ. मंगेश कराड, प्रोवोस्ट डॉ. सायली गणकर, प्रो-कुलपति डॉ. मोहित दुबे, स्कूल ऑफ इंडियन सिविल सर्विसेज के निदेशक डॉ. सुजीत धर्मपात्रे, स्कूल ऑफ लॉ के अधिष्ठाता डॉ. गोविंद राजपाल के साथ अन्य गणमान्य प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
आगे डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षाओं में नैतिकता विषय को शामिल किए जाने से पहले इसे सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान (आईआईटीएम), ग्वालियर में लागू किया गया था। नैतिकता किसी को भी परेशानी दिए बिना काम को अच्छे से पूरा करने में मददगार होती है।नैतिक मूल्यों के पालन से ही विश्व में शांति स्थापित होती है। अतः देश की रीढ़ माने जानेवाले भविष्य के प्रशासकों में नैतिक मूल्यों का होना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर कोई सिविल सेवक नहीं बन सकता है लेकिन यूपीएससी व एमपीएससी के अलावा, समाज में अच्छे बदलाव लाकर देश बनाने में भी योगदान दिया जा सकता है।
इस अवसर पर प्रो. डॉ. मंगेश कराड ने कहा कि भारत को एक विकसित देश बनाने की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ सरकारी अधिकारियों की नहीं है, बल्कि हर नागरिक को अपने नागरिक कर्तव्यों के बारे में पता होना चाहिए। अगर हर नागरिक अपने क्षेत्र में ईमानदारी से और नियमों को मानकर काम करे, तो साल 2047 तक भारत एक विकसित देश बन जाएगा और सार्वभौमिक महाशक्ति के रूप में उभरेगा।
कार्यक्रम के उद्घाटन के पश्चात दोपहर के सत्र में डॉ. पल्लवी दराडे (आईआरएस), प्रदीप कुमार यादव (आईपीएस) तथा पुणे की आयकर आयुक्त वैशाली पतेंगे (आईआरएस) ने सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रोवोस्ट डॉ. सायली गणकर ने की। सूत्र - संचालन प्रो. स्नेहा वाघटकर ने आभार प्रदर्शन डॉ. सुजीत धर्मपात्रे ने किया।
"प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शन हेतु ‘लक्ष्य’ क्लब की स्थापना"
इस अवसर पर सिविल सेवा तथा राज्य सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए ‘लक्ष्य’ नामक क्लब की स्थापना की गई। इस क्लब के माध्यम से विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग, प्रबंधन एवं अन्य संकायों के छात्र जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, उनके लिए एमआईटी-एसआईसीएस के प्राध्यापकों एवं विशेषज्ञों द्वारा निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।


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