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संजीवन सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा ‘जीवन रोटी मुफ्त भोजन सेवा’ जारी

जीवन रोटी मुफ्त भोजन सेवा कोविड पीड़ित मरीज व उनके रिश्तेदारों के लिए शुरू करते हुए संजीवन सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा एक विधायक कदम उठाया गया है।
पुणे, जून (ह.ए. प्रतिनिधि)

‘जीवन रोटी मुफ्त भोजन सेवा’ की पहल कोविड पीड़ित मरीज और उनके रिश्तेदारों के लिए करते हुए संजीवन सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा एक विधायक कदम उठाया गया है। 
संजीवन सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा संचालित जीवन रोटी कोविड मरीज और उनके रिश्तेदारों को सुबह और शाम  दोनों समय खाना (टिफ़िन) पहुँचा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भोजन की सुविधा है, पर प्राइवेट अस्पतालों में गांव से आए हुए मरीजों की अच्छी खाने की देखभाल नहीं है। लॉकडाउन के कारण सभी होटल और रेस्टोरेंट बंद थे। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने जीवन रोटी के माध्यम से अभी तक 6 प्राइवेट अस्पतालों को मुफ्त भोजन की सेवा प्रदान की है जो अभी भी शुरू है। भोजन में अंडे, दाल, दाल का पानी, चावल, हररोज अलग अलग सब्जियां, रोटी, सलाद और अंकुरित अनाज 3 खाने के पैकिंग में दिया जाता है। चपाती, दाल का पानी और अंडे अलग पैक में, इसलिए कि सब अच्छे से खा सकें। मरीजों की अन्नदान सेवा   ही ईश्वर सेवा है। यह जानकारी संजीवन सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष संजय दिवे ने दी है।
संजय दिवे ने आगे बताया कि खाने के टिफिन पर सकारात्मक संदेश लिखा जाता है, जिससे उन्हें शक्ति और आधार मिल सके, जैसे कि ‘डरो मत आप अकेले नहीं हैं।’ ‘भरोसा रखें आप निश्चित जीतेंगे और कोरोना हारेगा।’ ‘हम आपके लिए प्रार्थना कर रहे हैं।’ ‘यह मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं, इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है।’ अच्छे हुये मरीज और उनके रिश्तेदार जीवन रोटी का आभार व्यक्त कर रहे हैं। टिफ़िन बांटने वाले पूरी तरह से सुरक्षित और सुसज्जित रहते हैं। हैंड ग्लोज, फेस शील्ड, सर्जिकल कैप, डबल मास्क पहनकर समय पर टिफ़िन पहुँचाते हैं। इस सेवा कार्य में संजीवन सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी के बहुत से सदस्य और स्वयं सेवक परिश्रम कर रहे हैं।
संस्था के अध्यक्ष संजय दिवे, अस्मिता दिवे, संजीवन दिवे, अनिकेत शेंडे, शेखर गेडाम, युगल गेडाम, भूषण अंभोरे, सार्थक नगराले, मनीष आत्राम, क्रीश आत्राम, अर्पणा आरोटकर, छाया लोखंडे, पायल शेलके, आस्था चाफलकर, ईशा और पायल  वाहाने, निलेश शेंडे, करुणा मेश्राम, हर्षाली मेश्राम, राहुल मनोहरे, प्रणाली शेंडे, निकिता पवार, शुभम मेश्राम, करण शेलके, सुनीता शेलके, देवीदास शेलके, गजानन देवकर, रामेश्वर शिंदे, ब्लेस हातोले और सोनिया हातोले अथक परिश्रम कर रहे हैं।

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