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प्रथम पुरस्कार अस्वीकार करने वाले ‘बेटी बचाओ अभियान’ के जनक डॉ. गणेश राख बने अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के मानक वाहक

हड़पसर, अगस्त (ह.ए. प्रतिनिधि)

समुदाय उन्मुख कार्यों को ध्यान में रखते हुए समाज में विभिन्न संगठन-संस्था पुरस्कार के रूप में प्रशंसा से पीठ थपथपाते हैं, लेकिन प्रशंसा नहीं चाहिए क्योंकि दो शब्द बोल नहीं सकता। सम्मान के बाद बोलने से डरता था, प्रथम पुरस्कार से उस डर को दूर किया। उसके बाद मातृभाषा के साथ हिंदी और अंग्रेजी में जवाब देते हुए एक नहीं दो नहीं हजारों पुरस्कारों को स्वीकार किया। प्रथम पुरस्कार अस्वीकृत करके आज अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के मानक वाहक बन सका। यह विचार ‘बेटी बचाओ अभियान’ के जनक व मेडिकेअर हॉस्पिटल के संस्थापक अध्यक्ष डॉ.गणेश राख ने व्यक्त किए। 
हमारे प्रतिनिधि के साथ वार्ता करते हुए बेटी बचाओ अभियान के जनक डॉ. गणेश राख ने कहा कि 3 जनवरी 2012 को मेडिकेअर हॉस्पिटल में बेटिया रानी का जन्म होने पर बिल न लेने का मन में ठाना और उसी के माध्यम से ‘बेटी बचाओ अभियान’ की नीव रखी गई, आगे चलकर उसे बहुत ही अच्छा प्रतिसाद मिलता गया। समाज के सभी स्तरों से अभियान की सराहना शुरू हुई, मेरे इस कार्य को ध्यान में रखते हुए भ्रष्टाचार निर्मूलन संघटना की ओर से दिलीप भाडले ने दिसंबर 2012 को पुरस्कार घोषित करने के बाद मैंने उन्हें साफ इंकार कर दिया, लेकिन उन्होंने आग्रह करने के बाद पुरस्कार स्वीकार करने के बाद नहीं बोलूंगा इन शर्तों पर पुरस्कार स्वीकार करने के लिए कहा। इस बीच, गणमान्य व्यक्तियों के हाथों पुरस्कार प्रदान किया गया और मेरे सामने माइक दिया गया तब मेरे पसीने छूट गए। धन्यवाद, शुक्रिया अदा करके मैंने कार्यकर्ताओं के नाम लेकर भाषण का समय निकाला। इससे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। तब से लेकर अब तक मुझे गांव, शहर, जिला, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हजारों पुरस्कार मिल चुके हैं। पुरस्कार रखने के लिए घर और अस्पताल में पर्याप्त जगह नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रथम पुरस्कार से ही मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में स्थानीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्गदर्शन करने की इच्छा जागृत हुई।
उन्होंने बताया कि मातृभूमि करमाला (जिला सोलापुर) ने जन्मस्थान पुरस्कार को अपने दिल में रखा है। बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने मुझे पुरस्कार देकर सम्मानित करते हुए कहा कि दुनिया में मेरे फैन हैं, लेकिन मैं डॉ. गणेश राख का फैन हूं। यह सुनने के बाद मुझे काम करने के लिए और प्रोत्साहन मिला। उसके बाद जिला, राज्य और पूरे देश में ‘बेटी बचाओ अभियान रैली’ के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुंचा सका हूं, इससे मानसिक रूप से अच्छा महसूस कर रहा हूं। प्रथम पुरस्कार के दौरान दो वाक्य नहीं बोले जा रहे थे, तब से लेकर अब तक दुनिया भर में कई कार्यक्रमों और रैलियों के माध्यम से हिंदी-अंग्रेजी और मातृभाषा में मार्गदर्शन प्रदान करने में सफल रहा हूं। समाज में सम्मान से काम का दायरा बढ़ता है, यह हमने अब तक के पुरस्कारों से भी सीखा है, मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है।
भ्रष्टाचार निर्मूलन संघटना के दिलीप भाडले ने कहा कि दृढ़ संकल्पित समाज के निर्माण में जो बहुमूल्य योगदान निभाते हैं ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों को पुरस्कार देकर सम्मान करने की जरूरत है, उससे ही समाज की उन्नति होती है। इसी भावना से डॉ. गणेश राख का पुरस्कार के लिए चयन किया गया था। उन्होंने पहली बार पुरस्कार से इनकार कर दिया था। हालांकि, उन्होंने भाषण न करने की शर्त पर पुरस्कार स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त की, फिर भी हमने उनसे दो शब्द कहने को कहा। फिर उनकी बेटी को बचाने के काम का दायरा और हमने जो पुरस्कार दिया उसकी कदर बढ़ गई। हमें यह कहते हुए भी गर्व हो रहा है। 

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